जातिप्रथा और उन्मूलन
जातिप्रथा और उन्मूलन - महात्मा गांधी को दिया गया उत्तर - लेखक - डॉ. भीमराव अम्बेडकर जातिप्रथा - उन्मूलन द्वितीय संस्करण की प्रस्तावना लाहौर के जातपांत तोड़क मंडल के लिए जो भाषण मैंने तैयार किया था, उस...
पुस्तक वाचाबहुजन दार्शनिकांच्या विचारांसाठी समर्पित
फुले, शाहू, आंबेडकर आणि बहुजन दार्शनिकांची पुस्तके
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जातिप्रथा और उन्मूलन - महात्मा गांधी को दिया गया उत्तर - लेखक - डॉ. भीमराव अम्बेडकर जातिप्रथा - उन्मूलन द्वितीय संस्करण की प्रस्तावना लाहौर के जातपांत तोड़क मंडल के लिए जो भाषण मैंने तैयार किया था, उस...
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हिंदू समाज की वर्तमान उथल-पुथल का कारण है, आत्म-परिरक्षण के भावना। एक समय था, जब इस समाज के अभिजात वर्ग को अपने परिरक्षण के बारे में कोई डर नहीं था। उनका तर्क था कि हिंदू समाज एक प्राचीनतम समाज है, उस...
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जैसा कि मैं प्रथम निबंध (‘भारत में जातिप्रथा') में बता चुका हूं, कोई जाति एकल संख्या में नहीं हो सकती। जाति केवल बहुसंख्या में ही जिंदा रह सकती है। वास्तव में तो जाति समूह का विखंडन करके ही बनी रह सकत...
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कार्ल मार्क्स तथा बुद्ध में तुलना करने के कार्य को कुछ लोगों द्वारा एक मजाक माना जाए, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। मार्क्स तथा बुद्ध के बीच 2381 वर्ष का अंतर है। बुद्ध का जन्म ई. पू. 563 में हुआ था औ...
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लेखक - डॉ. भिमराव अम्बेडकर भारत में जातिप्रथा संरचना, उत्पत्ति और विकास 9 मई, 1916 को कोलंबिया यूनिवर्सिटी, न्यूयार्क, अमरीका, में आयोजित डॉ. ए. ए. गोल्डनवाइजर गोष्ठी में नृविज्ञान पर पठित लेख भारत मे...
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- लेखक - सत्यशोधक दिनकरराव जवळकर श्री. के. ग. बागडे यांचे प्रस्तावनेसह देशाचे दुश्मन आवृत्ती पहिली १९२५, किंमत ४ आणे प्रकाशक : केशवराव मारुतीराव जेधे, जेधे मॅन्शन, पुणे मुद्रक : रामचंद्र नारायण लाड, श...
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