भंडारा, 8 अगस्त 2025: मंडल दिवस के अवसर पर ओबीसी सेवा संघ और अन्य ओबीसी संगठनों द्वारा आयोजित विदर्भ स्तरीय जनगणना यात्रा का समापन समारोह भंडारा में अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस यात्रा ने विदर्भ के सात जिलों के सैकड़ों गांवों में जाकर जातीय जनगणना की मागणी को बुलंद किया और ओबीसी समाज की एकता को मजबूत किया। समापन समारोह में अध्यक्षीय भाषण देते हुए अॅड. प्रदीप ढोबले ने संविधान को ओबीसी समाज के उत्थान और मुक्ति का मुख्य साधन बताया। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक किताब नहीं है, बल्कि यह हमारे अस्तित्व, समानता और स्वाभिमान का जीवंत हथियार है। ओबीसी समाज को अपनी मुक्ति के लिए संविधान के मार्ग पर चलते हुए संघर्ष करना चाहिए, ताकि सामाजिक न्याय और समानता की प्राप्ति हो सके।
इस अवसर पर ओबीसी युवा अधिकार मंच के संयोजक उमेश कोर्राम ने भी मार्गदर्शन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक केंद्र सरकार ओबीसी की जातिवार जनगणना नहीं कराती और आंकड़ों के आधार पर ओबीसी समाज को उचित निधि उपलब्ध नहीं कराती। उमेश कोर्राम ने यात्रा के दौरान गांव-गांव में जागरूकता फैलाने के प्रयासों का जिक्र किया और बताया कि विदर्भ के कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर ओबीसी समाज की समस्याओं को उजागर किया है। मुख्य मार्गदर्शक डॉ. संजय शेंडे, जो नागपुर से आए थे, ने संवैधानिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के विचारों को गांवों में जागृत करना आवश्यक है। समानता और संतों के विचारों का अनुसरण करते हुए मुक्ति के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि समाज में अंधविश्वास और असमानता का अंत हो सके। डॉ. शेंडे ने ओबीसी समाज को एकजुट रहकर अपने हक्कों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
समापन समारोह में ओबीसी सेवा संघ के संस्थापक अध्यक्ष प्रदीप ढोबले, डॉ. संजय शेंडे, उमेश कोर्राम, सावन कटरे, खेमेंद्र कटरे, गोपाल सेलोकर, जिला अध्यक्ष सदानंद ईलमे, ओबीसी जनगणना परिषद के मुख्य समन्वयक, योगेश शेंडे, यूथ फॉर सोशल जस्टिस के अध्यक्ष भैयाजी लांबट, प्रभाकर वैरागड़े, मंगला वाडीभस्मे, कृतल आकरे, ललिता देशमुख, अनिता बोरकर, हीरा झंझाड, सुभाष उके, सुरेश खंगार यांच्यासह कई प्रमुख ओबीसी नेते और कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन महिला सेवा संघ की महासचिव शुभदा झंझाड और गोपाल देशमुख ने किया, जबकि जिला महासचिव संजीव बोरकर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में राजू धुर्वे, दिनेश आकरे, संजय आजबले, संजीव बावनकर, दिलीप बावनकर, रमेश शहारे, रोशन उरकुडे, अरुण जगनाडे, श्रीकृष्ण पडोले, प्रो. विष्णु जगनाडे, ईश्वर निकुले, भाऊराव वंजारी, सुभाष पाल, प्रकाश मुटकुरे, प्रमोद गिरहेपुंजे, नामदेव वैद्य, संजय माटे, संजय मोहतुरे, राजू निंबार्ते, वामन गोडहुले, अविनाश गायधने, संतोष जांगले, युवराज नंदनवार, गंगाधर भदाले, श्रीपत भूरे, राजेंद्र ठवकर यांनी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस यात्रा ने विदर्भ के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ओबीसी समाज की एकता को मजबूत किया। कार्यकर्ताओं ने गांवों में जाकर जातीय जनगणना की आवश्यकता, ओबीसी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, शेतकऱ्यांसाठी कर्जमाफी, और अन्य मुद्दों पर जागरूकता फैलाई। समापन समारोह में लगे नारों ने सभी को जोश से भर दिया, और ओबीसी समाज की मुक्ति के लिए संविधान को मुख्य साधन मानते हुए कार्यकर्ताओं ने आगे का संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम ने ओबीसी समाज को नई ऊर्जा प्रदान की और सामाजिक समानता, बंधुत्व, और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की महत्वता पर जोर दिया। भंडारा में यह यात्रा समाप्त होने के साथ ही ओबीसी समाज की आवाज और मजबूत हुई है, और आने वाले दिनों में यह मागणियां केंद्र सरकार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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