नागपुर, 26 जून 2025: राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के वी.बी. कोलते मुख्य ग्रंथालय और ज्ञान स्रोत केंद्र ग्रंथालय में छत्रपति राजर्षि शाहू महाराज की जयंती का आयोजन विद्यार्थी क्रिया समिति और स्टूडेंट्स राइट्स फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बड़े उत्साह के साथ किया गया। परंपरागत रूप से लड्डू वितरण के साथ यह समारोह आयोजित हुआ, जिसमें लगभग 100 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर सामाजिक समता और आरक्षण के प्रणेता राजर्षि शाहू महाराज के योगदान को याद किया गया और उनके विचारों को विद्यार्थियों तक पहुँचाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री उमेश कोर्राम, स्टूडेंट्स राइट्स फाउंडेशन के अध्यक्ष और युवा ओबीसी अधिकार मंच के मुख्य संयोजक, ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा, “आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन योजना नहीं है, बल्कि यह वंचित वर्गों को प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का संवैधानिक अधिकार है। छत्रपति राजर्षि शाहू महाराज ने समाज में समता स्थापित करने के लिए वंचितों को शिक्षा और अधिकारों का अवसर प्रदान किया। दुर्भाग्यवश, भारत में आरक्षण को अक्सर नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो पूरी तरह गलत है। प्रत्येक वंचित वर्ग का यह हक है, और इसे समझने के लिए शाहू महाराज के जीवन और कार्य का गहन अध्ययन आवश्यक है।”
उन्होंने आगे जोड़ा, “शाहू महाराज ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को उनके सामाजिक आंदोलन में बड़े भाई की तरह सहयोग दिया। डॉ. आंबेडकर ने स्वयं कहा था कि शाहू महाराज की जयंती को दीपावली जैसे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को उनके विचारों से प्रेरणा लेनी चाहिए और सामाजिक न्याय के लिए कार्य करना चाहिए।” कोर्राम के इस वक्तव्य ने उपस्थित विद्यार्थियों में सामाजिक जागरूकता और प्रेरणा का संचार किया।
इस अवसर पर अन्य प्रमुख अतिथियों में डॉ. लखन इंगडे, भाषा संघ, नागपुर के अध्यक्ष, और डॉ. पूजा दाड़े, सहायक ग्रंथपाल, शामिल थे। दोनों ने शाहू महाराज के सामाजिक सुधारों और शैक्षणिक योगदान पर प्रकाश डाला। डॉ. इंगडे ने कहा, “शाहू महाराज ने शिक्षा को सामाजिक समानता का आधार बनाया। आज के विद्यार्थियों को उनके इस दृष्टिकोण को आत्मसात करना चाहिए।”
कार्यक्रम का आयोजन विद्यार्थी क्रिया समिति के अध्यक्ष प्रशिक खोब्रागडे और सचिव प्रकाश वाघमारे के नेतृत्व में किया गया। अन्य सक्रिय सदस्यों में योगेश काटेकर, चेतन बनसोड़, मनीष जाधव, अतुल बागडे, दत्ता पराचे, शुभम वनकर, उमेश घरड़े, संदीप सूर्यवंशी, मुन्ना वाघमारे, शुभम पवार, प्रशांत मेश्राम, अश्विन राऊत, सुनील मेश्राम, और अमोल ढोके ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन सभी ने मिलकर समारोह को सुचारू और प्रभावी बनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत परंपरागत रूप से दीप प्रज्वलन और शाहू महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजलि के साथ हुई। इसके बाद लड्डू वितरण ने समारोह में उत्सवी माहौल जोड़ा। आयोजकों ने उपस्थित विद्यार्थियों और अतिथियों को शाहू महाराज के सामाजिक समता, शिक्षा, और आरक्षण के लिए किए गए कार्यों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों ने शाहू महाराज के विचारों को अपने जीवन में लागू करने का संकल्प लिया।
इस समारोह ने न केवल शाहू महाराज के योगदान को सम्मान दिया, बल्कि युवा पीढ़ी को सामाजिक न्याय और समता के लिए प्रेरित भी किया। आयोजकों ने इस तरह के आयोजनों को भविष्य में और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की योजना व्यक्त की, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी सामाजिक जागरूकता के साथ आगे बढ़ सकें। कार्यक्रम का समापन सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए और सामूहिक भोजन के साथ हुआ।
Satyashodhak, obc, Rajarshi Chhatrapati shahu maharaj, dr Babasaheb Ambedkar