वैशाख पूर्णिमा पर महू में बुद्ध जयंती का भव्य उत्सव: बाबासाहेब के धम्म और सिद्धांतों का सम्मान

      महू, मई २०२५: वैशाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर विश्व शांति, लोक कल्याण और बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय की भावना को बढ़ावा देने वाले भगवान गौतम बुद्ध की २५६९वीं जयंती महू में उत्साह और भक्ति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर मेमोरियल सोसायटी के तत्वावधान में भीम जन्मभूमि स्मारक पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बौद्ध अनुयायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भंते प्रज्ञाशील के नेतृत्व में और संघनायक भदंत दीपांकर महाथेरो की गरिमामय उपस्थिति में नवदीक्षित श्रामणेरों ने बाबासाहेब के पवित्र अस्थिकलश को नमन किया और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

Mhow Celebrates Buddha Jayanti with Reverence for Ambedkars Legacy

      भारतीय बौद्ध महासभा के जिला अध्यक्ष शुभम रायपुरे और मीडिया प्रभारी रोहित सरदार ने बताया कि यह उत्सव दस दिवसीय श्रामणेर और बौद्धाचार्य शिविर के समापन के साथ आयोजित किया गया। इस शिविर के अंतिम दिन, वैशाख पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर, नवदीक्षित भिक्षु संघ ने त्रिशरण और पंचशील ग्रहण किए, इसके बाद बुद्ध वंदना, भीम स्तुति और महामंगल का सामूहिक सांगायन किया गया। यह आयोजन बुद्ध और बाबासाहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम बना।

      अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में भंते प्रज्ञाशील ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपने अपार बौद्धिक सामर्थ्य, संवेदनशीलता और आत्मसम्मान के बल पर भारतीय समाज में बौद्ध धम्म को पुनर्जनन दिया। उन्होंने कहा, “आधुनिक युग के महामानव बाबासाहेब ने उन करोड़ों लोगों को, जो गुलामी का जीवन जीने को मजबूर थे, बौद्ध धम्म के माध्यम से मुक्ति का मार्ग दिखाया। बुद्ध ने ध्यान, विपश्यना साधना और योग पद्धति के जरिए मानवीय चेतना को जागृत करने का रास्ता प्रशस्त किया, जो भूत, वर्तमान और भविष्य में भी प्रासंगिक है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि बाबासाहेब ने बुद्ध के सिद्धांतों को आत्मसात कर समानता, न्याय और स्वतंत्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, जिससे भारत को एक प्रबुद्ध और सशक्त राष्ट्र बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

      इस अवसर पर बुद्ध और बाबासाहेब के विचारों को अपनाने का संकल्प लिया गया। उपस्थित वक्ताओं ने बुद्ध के करुणा, मैत्री और स्वतंत्रता के सिद्धांतों को आज के संदर्भ में लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षक के.वाय. सुरवाडे गुरुजी, प्रदेश महामंत्री और मेजर डॉ. उत्तम प्रधान, प्रदेश संगठक कैलाश एम. इंगले, जिला महासचिव संतोष सपकाड, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर बुद्ध विहार, पंचशील नगर के संस्थापक अध्यक्ष रंजीत तायडे, जिला संगठक राजू गायकवाड, समता सैनिक दल के डिविजनल कमांडर विशाल सूर्यभान इंगले, महिला उपाध्यक्षा नेहा ताई इंगले, लक्ष्मण गवांदे, संदीप झनके, राजेश इंगले, सचिव मीना गवई, राजेश ठाकरे, रवि तायडे, प्रकाश निकडे, सुनील खंडेराव, राहुल हिवरे, कुणाल वाकोडे, गौरव तायडे, गणेश मोरे, राजेंद्र वाघमारे, डॉ. अजय जाधव, दिलीप वाकोडे और दिनेश रामटेके सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

      यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा। बुद्ध और बाबासाहेब के विचारों को अपनाकर समाज में समता, शांति और बंधुता स्थापित करने का संदेश इस उत्सव के माध्यम से दिया गया। इसकी जानकारी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मेमोरियल सोसायटी, भीम जन्मभूमि स्मारक, महू के सचिव राजू कुमार अंभोरे ने दी।

Satyashodhak, dr Babasaheb Ambedkar, Bahujan, Buddhism
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