OBC जनगणना की मांग का प्रस्ताव महाराष्ट्र विधानसभा से हुआ पारित

     अगले साल से होने वाली जनगणना के दौरान ओबीसी समाज की जातिगत गणना की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजने का प्रस्ताव बुधवार को विधानसभा में पारित किया गया। विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले ने खुद इस प्रस्ताव को सदन में पेश किया जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। हालांकि विस अध्यक्ष के अचानक इस तरह का प्रस्ताव सदन में रखने से सत्ताधारी दल के नेता भौचक्के रह गए।

maharashtra_assembly_passes_resolution_seeking_caste_based_census_find_out_obc_population      दरअसल लोकसभा-विधानसभाओं में एससी-एसटी आरक्षण की अवधि अगले 10 साल तक बढ़ाने के लिए विधेयक को मंजरी देने बुधवार को विधानमंडल के दोनों सदनों का एक दिवसीय सत्र आयोजित किया गया था। सदन की कामकाज पत्रिका में ओबीसी जनगणना का विषय शामिल नहीं था। दो दिन पहले हुई कामकाज समिति की बैठक में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी गई थी। इसके बावजूद विधानसभा अध्यक्ष पटोले द्वारा यह प्रस्ताव सदन में रखने से सत्तापक्ष के नेता भौचक्के रह गए। पटोले ने ओबीसी समाज के विभिन्न संगठनों की मांगों का हवाला देते हुए कहा कि ओबीसी समाज को उनकी संख्या के हिसाब से आरक्षण नहीं मिल रहा है । इस लिए उनकी वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए जातिगत गणना जरुरी है । इस लिए 2021 में होने वाली जनगणना में ओबीसी समाज की जातिगत गणना होनी चाहिए। इस पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि इस प्रस्ताव पर चर्चा कर इसे विधानमंडल के बजट सत्र में पेश किया जाए ।

     संसदीय कार्यमंत्री अनिल परब ने भी कहा कि विधानमंडल कामकाज समिति की बैठक में तय हुए चीजों के हिसाब से ही सदन की कार्यवाही चलाई जाए। लेकिन राकांपा नेता व खाद्य-आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने प्रस्ताव पेश किए जाने का आग्रह किया । विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा कि ओबीसी जनसंख्या कितनी है, इसका पता चलना जरुरी है।