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भगवान बुद्ध और उनका धम्म - लेखक -  डॉ. भीमराव आम्बेडकर

Bhagwan Buddha aur Unka Dhamma Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

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16 जून 2023
Book
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२. मृत्यु के बाद जीवन की चिन्ता व्यर्थ

१. एक बार स्थविर महाकाश्यप तथा स्थविर सारिपुत्र बनारस के पास ऋषिपतन के मृग-दाय में ठहरे हुए थे

२. स्थाविर सारिपुत्र, शाम के समय ध्यानावस्था से उठ, स्थविर महाकाश्यप के पास गये और एक ओर बैठ गये ।

Mrityu Ke baad Jivan Ki Chinta Vyrth - Bhagwan Buddha aur Unka Dhamma - Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

३. इस प्रकार बैठे हुए सारिपुत्र ने स्थविर महाकाश्यप से कहा: "काश्यप । क्या तथागत मरणान्तर रहते है?

४. "भगवान् बुद्ध ने यह व्याकृत नहीं किया कि तथागत मरणान्तर रहते है। "तो क्या तथागत मरणान्तर नहीं रहते ?'

५. "तो क्या तथागत मरणान्तर रहते भी है और नहीं भी रहते हैं?"

६. "भगवान् बुद्ध ने यह भी व्याकृत नहीं किया कि तथागत रहते भी हैं और नहीं भी रहते है। "

७. ”तो क्या तथागत मरणान्तर नहीं भी रहते है और नहीं नहीं भी रहते है ? '' भगवान बुद्ध ने यह भी व्याकृत नहीं किया कि तथागत मरणान्तर नहीं भी रहते हैं और नहीं नहीं भी रहते हैं।"

८. ”लेकिन तथागत ने इसे अव्याकृत क्यों नहीं किया?”

९. यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर देने से मनुष्य का कुछ भी लाभ नहीं । यह श्रेष्ठ - जीवन का आरम्भ भी नहीं । इससे न प्रज्ञा की प्राप्ति होती है और न यह निर्वाण की ओर ले जाता है । यही कारण है कि तथागत ने इसको अव्याकृत रखा है। "