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भगवान बुद्ध और उनका धम्म - लेखक -  डॉ. भीमराव आम्बेडकर

Bhagwan Buddha aur Unka Dhamma Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

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16 जून 2023
Book
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(२) किसा - गोतमी को संतोष

१. किसी गोतमी का विवाह श्रावस्ती के एक ब्योपारी के पुत्र से हुआ था ।

२. विवाह के कुछ समय बाद वह पुत्रवती हुई ।

Kisa - Gotami Ko Santosh - Mahakarunik - Bhagwan Buddha aur Unka Dhamma - Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

३. दुर्भाग्य से अभी उसमें चलने-फिरने की ताकत भी नहीं आई थी कि उसे साँप ने डस लिया और वह चल बसा ।

४. सांप के काटे का छोटा सा दाग बच्चे की मृत्यु का कारण कैसे हो सकता था ?

५. उसे यह विश्वास ही नहीं होता था कि उसका बच्चा वास्तव में मर गया हैं, क्योंकि इस से पहले उसने 'मृत्यु' देखी ही न थी ।

६. इसलिये उसने अपने पुत्र की मृत देह ली और एक घर से दूसरे घर घूमने लगी। उसकी दशा ऐसी विचित्र थी कि लोगों ने समझा कि वह पागल हो गई है ।

७. अन्त में एक वृद्ध पुरुष ने उसे श्रमण गौतम के पास जाने का परामर्श दिया। उसके भाग्य से तथागत श्रावस्ती में ही थे ।

८. इसलिये वह तथागत के पास आई और अपने मृत पुत्र के लिये दवाई चाही ।

९. तथागत ने उसकी कष्ट- गाथा और उसका विलाप सुना ।

१०. तब तथागत ने कहा-- “नगर में जाओ और किसी ऐसे घर से जहाँ कोई मरा न हो कुछ सरसों के दाने ले आओ । मैं तुम्हा बच्चे को जिला दूंगा ।"

११. उसे यह बात अत्यन्त सरल मालूम दी । अपने मृत पुत्र की देह लिये उसने नगर में प्रवेश किया ।

१२. लेकिन उसे शीघ्र ही पता लगा कि वह कितने भ्रम में थी । उसे एक भी घर ऐसा न मिला जहाँ कोई न कोई मरा न हो ।

१३. एक गृहस्थ ने उसे कहा--"जो जीते हैं वे थोडे हैं, जो मर गये हैं वे ही अधिक है ?"

१४. वह तथागत के पास वापस लौट आई - निराश और खाली हाथ ।

१५. तब तथागत ने पूछा- “किसा गोतमी! क्या मृत्यु सभी के लिये नहीं हैं, क्या केवल उसी के साथ यह अप्रिय घटना घटी है ?"

१६. वह तब गई और बच्चे का अन्तिम क्रिया कर दी । किसा गोतमी कह रही थी-- “सभी कुछ अनित्य है । यही नियम है।”