प्राचीन भारत में क्रांति तथा प्रतिक्रांति - लेखक - डॉ. भीमराव आम्बेडकर
Prachin Bharat Me Kranti Aur Pratikranti dr Bhimrao Ramji Ambedkar
21. अथवा वह कह सकता है: 'जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए गए भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण अपनी आजीविका कमाने के गलत साधन अपनाते हैं और निम्न स्तर की कलाएं दिखाते हैं, जैसे :
(1) हस्तरेखा विज्ञान - एक बच्चे के हाथी, पैरों आदि के निशानों से दीर्घ जीवन, समृद्धि आदि (अथवा उसके विपरीत) की भविष्यवाणी करना,
(2) शकुनों अथवा लक्षणों से भविष्यवाणी करना,
(3) बिजली की कड़क और खगोलीय स्थितियां देखकर शकुन-अपशकुन बताना,
(4) स्वप्नों की व्याख्या कर भविष्यवाणी करना,
(5) शरीर के निशानों के आधार पर भविष्यवाणी करना,
(6) चूहों के कुतरे हुए कपड़ों के निशानों के आधार पर शकुन-अपशकुन बताना,
(7) अग्नि को बलि चढ़ाना,
(8) चम्मच से चढ़ावा चढ़ाना,
(9-13) देवताओं को भूसी भूसी और अनाज का आटा, उबालने योग्य भूसी निकाला हुआ अनाज, घी और तेल की भेंट चढ़ाना,
(14) सरसों मुंह से उगलकर अग्नि में डालना,
(15) देवताओं के लिए भेंट स्वरूप दाहिने घुटने से खून निकालना,
(16) अंगुलियों की गांठे आदि देखकर मंत्र गुनगुनाने के बाद यह बताना कि अमुक आदमी जन्म से भाग्यशाली है अथवा नहीं,
(17 ) यह बताना कि जिस स्थान पर मकान अथवा क्रीड़ा-स्थल बनना है, वह शुभ है अथवा नहीं,
(18) रीति-रिवाजों के नियमों के बारे में सलाह देना,
(19) दुष्ट आत्माओं को समाधि क्षेत्र में गिरा देना,
(20) भूतों को भगाना,
(21) मिट्टी के घर में निवास करते समय तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना,
(22) सांपों के तंत्र-मंत्र बोलना,
(23) जहर की तंत्र विद्या दिखाना,
(24) बिच्छू की तंत्र विद्या दिखाना,
(25) चुहिया की तंत्र विद्या दिखाना,
(26) पक्षी की तंत्र विद्या दिखाना,
(27) कौए की तंत्र विद्या दिखाना,
(28) यह भविष्यवाणी करना कि आदमी कितने वर्ष और जीयेगा,
(29) मुसीबत से बचने के लिए तंत्र-मंत्र देना, और
(30) जानवरों को नियंत्रण में रखना ।
‘परिव्राजक गौतम ऐसी तुच्छ कलाओं से दूर रहते हैं । '
22. अथवा वह कह सकता है: 'जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण क्षुद्र स्तर की कलाएं दिखाकर अपनी आजीविका कमाने के लिए गलत साधन अपनाते थे। निम्नलिखित चीजों और प्राणियों में अच्छे और बुरे गुण बताते थे तथा उनके निशान देखकर उसके मालिक को शुभ या अशुभ बताते थे, जैसे:
रत्न, तख्ता, पोशाक, तलवारें, बाण, धनुष, अन्य शस्त्र, पुरुष, स्त्रियां, लड़कियां, दास, दासियां, हाथी, घोड़े, भैंसें, सांड, बैल, बकरियां, भेड़, मुर्गा, मुर्गी, बटर, गोह, हिलसा, कछुए और अन्य प्राणी ।
'परिव्राजक गौतम ऐसी क्षुद्र कलाओं से दूर रहते हैं। '
23. अथवा वह कह सकता है : 'जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण निम्न स्तर की कलाओं द्वारा अपनी आजीविका कमाने के लिए अनुचित साधन अपनाते हैं, जैसे कि इस प्रकार की भविष्यवाणी करना
प्रमुख महोदय कूच करेंगे, गृह प्रमुख आक्रमण करेंगे और शत्रु पीछे हट जाएंगे,
शत्रुओं के प्रमुख आक्रमण करेंगे और हमारे प्रमुख पीछे हट जाएंगे,
गृह- प्रमुख विजयी होंगे, और हमारे प्रमुख हार जाएंगे,
विदेशी प्रमुख इस पक्ष से विजयी होंगे और हमारे प्रमुख हार जाएंगे,
इस प्रकार यह पक्ष विजयी होगा, वह पक्ष हारेगा।
'परिव्राजक गौतम इस प्रकार की क्षुद्र कलाओं से दूर रहते हैं । '
24. अथवा वह कह सकता है: 'जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण निम्न स्तर की कलाओं द्वारा अपनी आजीविका कमाने के लिए अनुचित साधन अपनाते हैं, जैसे कि यह भविष्यवाणी
करना :
(1) चंद्र ग्रहण होगा,
(2) सूर्य ग्रहण होगा,
(3) नक्षत्रों का ग्रहण होगा,
(4) सूर्य अथवा चंद्रमा का विपथन होगा,
(5) सूर्य अथवा चंद्रमा अपने सामान्य पथ पर आ जाएंगे,
(6) नक्षत्रों का विपथन होगा,
(7) नक्षत्र अपने सामान्य पथ पर आ जाएंगे,
(8) उल्कापात होगा,
(9) जंगल में अग्निकांड होगा,
(10) भूचाल आएगा,
(11) देवता गर्जन करेंगे, और
(12-15) सूर्य अथवा चंद्रमा अथवा तारों का उदय और अस्त, उनके प्रकाश में तीव्रता अथवा धुंधलापन अथवा पंद्रह प्रकार की भविष्यवाणी करना कि इनके ऐसे ऐसे परिणाम होंगे।
'परिव्राजक गौतम ऐसी क्षुद्र कलाओं से दूर रहते हैं। '
25. अथवा वह कह सकता है: 'जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण निम्न स्तर की कलाओं द्वारा अपनी आजीविका कमाने के अनुचित साधन अपनाते हैं, जैसे :
(1) भारी वर्षा की भविष्यवाणी,
(2) कम वर्षा की भविष्यवाणी,
(3) अच्छी फसल की भविष्यवाणी,
(4) अनाज की कमी होने की भविष्यवाणी,
(5) शांति की भविष्यवाणी,
(6) अशांति की भविष्यवाणी,
(7) महामारी की भविष्यवाणी,
(8) अच्छी ऋतु की भविष्यवाणी,
(9) अंगुलियों पर गणना,
( 10 ) अंगुलियों का इस्तेमाल किए बिना गणना,
(11) बड़ी संख्याओं का योग करना,
( 12 ) गाथा और कवित्त की रचना करना, और
(13) वाक्छल दिखाना, कुतर्क करना ।
'परिव्राजक गौतम इस प्रकार की क्षुद्र कलाओं से दूर रहते हैं। '
26. अथवा वह कह सकता है जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण निम्न स्तर की कलाओं द्वारा अपनी आजीविका कमाने के लिए अनुचित साधन अपनाते हैं, जैसे :
(1) विवाहों के लिए शुभ दिन निश्चित करना जिसमें वधू अथवा वर को घर लाया जाता है,
(2) विवाहों के लिए शुभ दिन निश्चित करना जिसमें वधू अथवा वर को भेजा जाता है,
(3) शांति की संधियों को संपन्न करने के लिए शुभ समय निश्चित करना (अथवा सद्भावना प्राप्त करने के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना ),
(4) विद्वेष आरंभ करने के लिए शुभ समय निश्चित करना ( अथवा विद्वेष उत्पन्न करने के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना),
(5) ऋण लेने के लिए शुभ समय निश्चित करना ( अथवा पासा फेंकने में सफलता के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना ),
(6) धन व्यय करने के लिए शुभ समय निश्चित करना (अथवा पासा फेंकने वाले प्रतिद्वंद्वी के दुर्भाग्य के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना ),
(7) लोगों को भाग्यशाली बनाने के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना,
(8) लोगों को भाग्यहीन बनाने के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना,
(9) गर्भपात कराने के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना,
(10) किसी व्यक्ति की बत्तीसी जकड़ने के लिए जादू-टोना करना,
(11) गूंगापन लाने के लिए जादू-टोना करना,
(12) किसी व्यक्ति से हार स्वीकार करवाने के लिए जादू-टोना करना,
(13) बहरापन लाने के लिए जादू-टोना करना,
(14) मायावी आइने से भविष्य सूचक उत्तर प्राप्त करना,
(15) किसी भूत ग्रस्त लड़की के माध्यम से भविष्य - सूचक उत्तर प्राप्त करना,
(16 ) देवता से भविष्य सूचक उत्तर प्राप्त करना,
(17) सूर्य की पूजा करना,
(18) श्रेष्ठतम की पूजा करना,
(19) अपने मुंह से आग की लपटें निकालना, और
(20) भाग्य की श्रीदेवी को उत्प्रेरित करना ।
‘परिव्राजक गौतम इस प्रकार की क्षुद्र कलाओं से दूर रहते हैं । '
27. अथवा वह कह सकता है: 'जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण निम्न स्तर की कलाओं द्वारा अपनी आजीविका कमाने के लिए अनुचित साधन अपनाते हैं, जैसे :
(1) निश्चित लाभ प्राप्त हो जाने पर किसी देवता को भेंट अर्पित करने की प्रतिज्ञा करना,
(2) ऐसी प्रतिज्ञाओं के लिए प्रार्थना करना,
(3) मिट्टी के मकान में रहते हुए तंत्र-मंत्र का जाप करना,
(4) पुंसत्व उत्पन्न करना,
(5) किसी आदमी को नपुंसक बनाना,
(6) आवासों के लिए शुभ स्थानों का निर्धारण करना,
(7) स्थानों को पवित्र बनाना,
(8) मुंह धोने का अनुष्ठान करना,
(9) नहाने का अनुष्ठान करना,
(10) बलि चढ़ाना,
(11-14) वमनकारी तथा रेचक दवाएं देना,
(15) लोगों को सिरदर्द से राहत दिलाने के लिए संस्कारित करना ( अर्थात् छींकने के लिए दवाई देना),
(16) लोगों के कानों में तेल डालना ( या तो कान बड़े करने के लिए अथवा कान के अंदर के घाव ठीक करने के लिए),
(17) लोगों की आंखें ठीक करना ( उनमें दवायुक्त तेल की बूंदें डालकर ठंडक पहुंचाना),
(18) नाक के जरिए दवाएं डालना,
(19) आंखों में सुरमा लगाना,
(20) आंखों के लिए मरहम देना,
(21) नेत्र चिकित्सक के रूप में कार्य करना,
(22) शल्य-1 प-चिकित्सक के रूप में कार्य करना,
(23) बाल- चिकित्सक के रूप में कार्य करना,
(24) जड़ी-बूटियां देना, और
(25) बारी-बारी से दवाएं देना ।
‘परिव्राजक गौतम इस प्रकार की तुच्छ कलाओं से दूर रहते हैं । '
'बंधुओं, ये छोटी-छोटी बातें हैं, नैतिकता के अल्प ब्यौरे हैं, जिनके बारे में गैर-धर्मांतरित
व्यक्ति तथागत की सराहना करते हुए बोल सकता है। '
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( आचरण पर लंबे परिच्छेद यहां पर समाप्त होते हैं)