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प्राचीन भारत में क्रांति तथा प्रतिक्रांति - लेखक - डॉ. भीमराव आम्बेडकर

Prachin Bharat Me Kranti Aur Pratikranti dr Bhimrao Ramji Ambedkar

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01 जून 2023
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     विद्रोह करने के अधिकार शूद्र वर्ण को नहीं, बल्कि केवल तीन उच्च वर्णों को गया है। यह बहुत स्वाभाविक है, क्योंकि इस व्यवस्था के कार्यान्वयन से इन्हीं तीन वर्णों को लाभ होता है। लेकिन कल्पना कीजिए कि अगर इस व्यवस्था को समाप्त करने में क्षत्रिय वर्ण राजा की सहायता करें, तब क्या किया जा सकता है? मनु सभी वर्गों, विशेष रूप से क्षत्रियों को दंड देने का अधिकार ब्राह्मणों को देता है।

     11.31. ब्राह्मण जो धर्म ज्ञाता होता है, किसी के किसी भी अपराध की शिकायत राजा से न करे, क्योंकि वह अपनी ही शक्ति से उन सभी लोगों को दंडित कर सकता है, जो उसे क्षति पहुंचाते हैं।

     11.32. उसकी निजी शक्ति जो केवल उसी पर निर्भर करती है, राजकीय शक्ति से प्रबल होती है जो कि दूसरे व्यक्तियों पर निर्भर है। अतः ब्राह्मण अपनी शक्ति के द्वारा ही अपने शत्रुओं का दमन कर सकता है।

     11.33. वह निस्संकोच शक्तिशाली मंत्रों का प्रयोग कर सकता है जो अथर्वन को प्राप्त हुए और जो उसके द्वारा अंगिरस को दिए गए, क्योंकि वाणी ही ब्राह्मण का शस्त्रास्त्र है, जिससे वह अपने शत्रुओं का विनाश कर सकता है।

     9.320. यदि कोई क्षत्रिय ब्राह्मण के विरुद्ध सभी अवसरों पर हिंसक ढंग से शस्त्र उठाता है तो उसे स्वयं वह ब्राह्मण दंड देगा, क्योंकि क्षत्रिय मूल रूप से ब्राह्मण से ही पैदा हुआ है।

     ब्राह्मण जब तक शस्त्रास्त्र न ग्रहण करे, तब तक क्षत्रिय को किस प्रकार दंडित कर सकता है? मनु इसे जानता था, अतः वह क्षत्रियों को दंडित करने के लिए ब्राह्मणों को शस्त्रास्त्र ग्रहण करने का अधिकार देता है।

Hindu Samaj ke Achar Vichar dr Bhimrao Ramji Ambedkar

     12.100. वेदज्ञाता मनुष्य सेनापतित्व, राज्य, दंडप्रणेतृत्त्व (न्यायाधीश आदि होने ) और संपूर्ण लोकों के स्वामित्व के योग्य है।

     मनु चातुर्वर्ण्य व्यवस्था का इतना प्रबल पक्षधर है कि उसने यह मौलिक परिवर्तन करने में कोई कमी नहीं रखी। ब्राह्मण द्वारा शास्त्रास्त्र ग्रहण करने का आग्रह एक मौ. लिक परिवर्तन है जो मनु पूर्व विद्यमान नहीं था। ब्राह्मण द्वारा शस्त्रास्त्र ग्रहण न किए जाने का बड़ा कठोर नियम था । मनु पूर्व आपस्तम्ब धर्म सूत्र में यह नियम निम्नानुसार वर्णित है:

     1.10.29.6. ब्राह्मण अपने हाथ में चाहे उसे जांचने की ही इच्छा क्यों न हो शस्त्र ग्रहण नहीं करेगा।

     मनु के उत्तराधिकारी बौद्धायन ने अपने सूत्र में उसमें और संशोधन किया:

     2.24.18. गौ की रक्षा हेतु ब्राह्मण, अथवा वर्ण के विषय में भ्रांति होने पर ब्राह्मण और वैश्य भी शस्त्रास्त्र ग्रहण कर सकते हैं, जो धर्म-सम्मत और हर कीमत पर मान्य है।