भाषावार राज्यों के संबंध में विचार - डॉ. भीमराव अम्बेडकर
Thoughts on Linguistic States Book by Dr Bhimrao Ramji Ambedka
अध्याय 7
महाराष्ट्र की समस्याएं और समाधान
महाराष्ट्र भी एक और क्षेत्र है, जो विवाद का विषय बना हुआ है। इसके हल के लिए चार प्रस्ताव मैदान में हैं :
(1) बंबई राज्य को यथावत बना रहने दिया जाए, अर्थात् इसे एक मिश्रित राज्य रहने दिया जाए, जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात और बंबई तीनों आ जाएं।
(2) वर्तमान राज्य को भंग कर दिया जाए, महाराष्ट्र और गुजरात को अलग-अलग कर दिया जाए और उनके दो पृथक-पृथक राज्य बना दिए जाएं।
(3) संयुक्त महाराष्ट्र बना दिए जाए, जिसका बंबई भी एक राज्य हो ।
(4) बंबई को महाराष्ट्र से अलग करके उसे एक पृथक नगर राज्य बना दिया जाए।
मैं यहां अपने प्रस्ताव भी प्रस्तुत करता हूं, जो इस प्रकार हैं :
बंबई को मिश्रित राज्य न रहने दिया जाए।
मैं महाराष्ट्र को चार राज्यों में विभक्त करने के पक्ष में हूं (देखें मानचित्र 5 ) (1) महाराष्ट्र नगर राज्य (बंबई). (2) पश्चिमी महाराष्ट्र (3) मध्य महाराष्ट्र, और (4) पूर्वी महाराष्ट्र ।
महाराष्ट्र नगर राज्य बंबई नगर जिसमें महाराष्ट्र का वह क्षेत्र सम्मिलित हो, जो उसे एक अच्छा और सशक्त नगर राज्य बना सके ।
पश्चिमी महाराष्ट्र - (1) थाना, (2) कोलाबा, (3) रत्नागिरी, ( 4 ) पूना, (5) उत्तर सतारा, (6) दक्षिण सतारा, (7) कोल्हापुर, और (8) मराठी भाषी क्षेत्र जो कर्नाटक को दे दिए गए हैं।
मध्य महाराष्ट्र (1) डोंगा, (2) पूर्व खानदेश (3) पश्चिम खानदेश (4) नासिक, (5) अहमनगर, (6) औरंगाबाद (7) नांदेड़, (8) परभणी (9) बीड़, ( 10 ) उस्मानाबाद, (11) शोलापुर सिटी और शोलापुर जिले का मराठी-भाषी क्षेत्र, और ( 12 ) वे मराठी भाषी क्षेत्र, जो तेलंगाना को सौंप दिए गए हैं।
पूर्वी महाराष्ट्र - (1) बुलढाना, (2) यवतमाल, (3) अकोला (4) अमरावती, ( 5 ) वर्धा, (6) चांदा, (7) नागपुर, (8) भंडारा (9) वे मराठी भाषी क्षेत्र, जो हिन्दी राज्यों को दे दिए गए हैं।
अब मैं इन प्रस्तावों के गुण-दोषों की जांच करूंगा ।

महाराष्ट्रीय मिश्रित राज्य के अधीन रहें
क्या बंबई को मिश्रित राज्य बना रहने दिया जाए। यह बहुत ही असामान्य प्रक्रिया है । कलकत्ता नगर पृथक नगर राज्य नहीं है। मद्रास पृथक नगर राज्य नहीं है। फिर बंबई को ही क्यों अपवाद बनाया जाए?
दूसरा कारण यह है कि यह पहले ही से मिश्रित राज्य है। इस मिश्रित राज्य के अधीन रहने पर महाराष्ट्रियों का क्या अनुभव है? महाराष्ट्रियों को इस मिश्रित राज्य में रहने से बहुत नुकसान हुआ। बंबई मंत्रिमंडल में महाराष्ट्रियों की क्या स्थिति है? आइए मंत्री मदों के बंटवारे पर विचार करें:
| गुजराती मंत्री | - 4 |
| मराठी मंत्री | - 4 |
| कन्नड़ मंत्री | - 1 |
| योग | - 9 |
विधानसभा में गुजराती सदस्य केवल 106 हैं, मराठी सदस्य 149 हैं, लेकिन इसके बावजूद गुजराती मंत्रियों की संख्या महाराष्ट्रीय मंत्रियों के बराबर है। अब उप-मंत्रियों का विभाजन देखें :
| मराठी भाषी | - 5 |
| गुजराती भाषी | - 2 |
| कन्नड़ भाषी | - 1 |
| योग | - 9 |
केवल उप-मंत्रियों में महाराष्ट्रीयों का एक से बहुमत है। लेकिन सबसे अधिक महत्व की बात यह है कि मंत्रियों में शक्ति और विषय की दृष्टि से किस प्रकार का विभाजन हुआ है। यह बताता है कि बंबई राज्य के मिश्रित मंत्रिमंडल में महाराष्ट्रियों को किस प्रकार की शक्ति और प्राधिकार दिया गया है।
मंत्रियों में विषयों का विभाजन
| गुजराती उप-मंत्री | महाराष्ट्रीय मंत्री | ||||||||
| 1. | मोरारजी देसाई | - | 105 | विषय | 1. | हीरे | - | 49 | विषय |
| 2. | दिनकर राव देसाई | - | 26 | विषय | 2. | निम्बालकर | - | 20 | विषय |
| 3. | जीवराज मेहता | - | 43 | विषय | 3. | तपासे | - | 15 | विषय |
| 4. | शांति लाल शाह | - | 28 | विषय | 4. | चव्हाण | - | 4 | विषय |
| योग | - | 202 | योग | - | 88 | ||||
उप-मंत्रियों में विषयों का जो विभाजन हुआ है, वह भी इसी पेटर्न पर किया गया है। उप मंत्रियों में विषयों का विभाजन
| गुजराती उप-मंत्री | महाराष्ट्रीय मंत्री | ||||||
| 1. | इन्दुमति सेठ | 12 | विषय | 1. | वाडेरेकर | 12 | विषय |
| 2. | बाबूभाई जे. पटेल | 3 | विषय | 2. | देशमुख | 4 | विषय |
| 3. | नरवणे | 5 | विषय | ||||
| 4. | साठे | 5 |
विषय |
||||
| 5. | पत्की | 3 |
विषय |
||||
| योग | 15 | योग | 29 | ||||
आइए, अब यह देखें कि महाराष्ट्र और गुजरात में विकास कार्यों पर कितना धन खर्च किया जाता है। निम्नलिखित आंकड़ों से यह अनुमान हो जाएगा कि तीन वर्षों के दौरान महाराष्ट्र और गुजरात पर प्रति व्यक्ति व्यय कितना हुआ है :
विकास कार्य पर प्रति व्यक्ति व्यय
| जनसंख्या | 1950-51 | 1951-52 | 1952-53 | ||
| 1. | महाराष्ट्र | 2,17,20,091 | 1.7 | 2.3 | 1.8 |
| 2. | गुजरात | 1,18,96,789 | 2.9 | 3.1 | 3.2 |
कैसा भेदभावपूर्ण व्यवहार है? कैसा पक्षपात है? कैसा अन्याय है? क्या कोई महाराष्ट्रियों को दोषी ठहरा सकता है, यदि वे बंबई के मिश्रित राज्य के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करें?
इस प्रकार कोई भी महाराष्ट्रीय व्यक्ति अपनी अधीनता की ऐसी स्थिति सहन नहीं कर सकता। इसलिए मिश्रित राज्य का हमेशा के लिए परित्याग कर देना चाहिए ।