भाषावार राज्यों के संबंध में विचार - डॉ. भीमराव अम्बेडकर
Thoughts on Linguistic States Book by Dr Bhimrao Ramji Ambedka
भाग III
समाधान
अध्याय 6
उत्तर का विभाजन
अब जब कि हम समस्या से अवगत हो चुके हैं, हमें इसका हल ढूंढ़ना चाहिए। हल, जाहिर है, यही हो सकता है कि हम राज्य के आकार का निर्धारण करने के लिए कोई मानदंड अपना लें। इस प्रकार का मानदंड निश्चित करना सरल नहीं है। यदि दो करोड़ की जनसंख्या को मानदंड मान लिया जाए तो दक्षिण के अधिकांश राज्य मिश्रित राज्य बन जाएंगे। इसलिए उत्तरी राज्यों के संकट का सामना करने के लिए दक्षिणी राज्यों का आकार बढ़ाना असंभव है। इसका एकमात्र समाधान यही है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों के टुकड़े कर दिए जाएं। मेरी समझ में नहीं आता कि यह हल कांग्रेस कार्यकारिणी समिति को क्यों नहीं सूझा। यह तो पूरा स्पष्ट है।
उत्तरी राज्यों का विभाजन
जैसा कि मैं कह चुका हूं आयोग ने भाषावार राज्यों की रूपरेखा तैयार करते समय उत्तर का समेकन और दक्षिण का विघटन कर दिया है। मुझे विश्वास है कि आयोग ने ऐसा जान बूझकर नहीं किया है। लेकिन जानबूझकर कर किया या अनजाने में तथ्य यही है। इसके दुष्परिणाम भी स्पष्ट हैं।

इसलिए यह जरूरी है कि इस स्थिति को सुधार लिया जाए और इसका एकमात्र तरीका यही है कि (1) उत्तर प्रदेश ( 2 ) बिहार, और (3) मध्य प्रदेश इन तीन राज्यों को छोटी-छोटी इकाइयों में बांट दिया जाए।
इस संबंध में मैं कुछ सुझाव देना चाहता हूं।
इस विभाजन से भाषावार राज्य के मूल सिद्धांतों का कोई विरोध नहीं है, इसलिए कि यदि इन राज्यों का सुझाए गए ढंग से विभाजन किया जाए, तो शेष प्रत्येक राज्य भाषावार राज्य हो जाएगा।
मुझे यह जानकार प्रसन्नता हुई कि श्री पंत ने हाल ही में इसी विषय पर संसद में हुई बहस के दौरान कहा कि मुझे उत्तर प्रदेश के बंट जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन जो कुछ उत्तर प्रदेश के बारे में कहा, वही बिहार और मध्य प्रदेश पर भी लागू होता है।
उत्तर प्रदेश का विभाजन मेरा उत्तर प्रदेश के बारे में यह प्रस्ताव है कि उसे तीन राज्यों में विभक्त कर दिया जाए (देखें मानचित्र 2 ) । इनमें से प्रत्येक राज्य की जनसंख्या लगभग 2 करोड़ हो, जिसे किसी भी राज्य के कारगर प्रशासन के लिए जनसंख्या का मानक आकार मान लिया जाए। इन तीन राज्यों की सीमा रेखाएं कहां खींची जाएं, इसका निर्देश मैंने संलग्न मानचित्र संख्या 2 में किया है।
उत्तर प्रदेश के तीन राज्यों की राजधानियां (1) मेरठ, (2) कानपुर, और (3) इलाहाबाद हो सकती हैं। ये तीनों नगर प्रत्येक राज्य के बिल्कुल बीच में स्थित हैं।
बिहार का विभाजन बिहार के संबंध में मेरा प्रस्ताव यह है कि इसे दो राज्यों में बांटा जाए (देखें मानचित्र 3 ) । इन दो राज्यों में प्रत्येक की जनसंख्या डेढ़ करोड़ से कुछ अधिक होगी। किसी भी सरकार के लिए प्रशासन के प्रयोजन के लिए यह कोई छोटी जनसंख्या नहीं है।
सीमा रेखाओं का निर्देश मैंने संलग्न मानचित्र संख्या 3 में किया है।
बिहार के इन दो राज्यों की राजधानियां (1) पटना, और (2) रांची हो सकती हैं। ये दोनों राज्यों के ठीक बीच में स्थित है।
मध्य प्रदेश का विभाजन - मध्य प्रदेश के हमारे सामने दो रूप हैं, पुराना मध्य प्रदेश और नया मध्य प्रदेश |
पुराने मध्य प्रदेश में निम्नलिखित राज्य आते हैं :
(1) वह प्रांत जो किसी समय मध्य प्रांत और बरार कहलाता था, और
(2) पूर्वी राज्यों के नाम से विदित राज्यों में से कुछ भारतीय राज्य ।
मध्य प्रदेश के इस पुराने राज्य की जनसंख्या ढाई करोड़ थी। इसमें 22 जिले थे । इसकी विधान सभा के 223 सदस्य थे।
नए मध्य प्रदेश में जिसकी आयोग ने योजना बनाई है, निम्नलिखित क्षेत्र होंगे :
(1) पुराने मध्य प्रदेश के 14 जिले,
(2) संपूर्ण भोपाल,
(3) संपूर्ण विंध्य प्रदेश,
(4) मध्य भारत जिसमें सुनेल इन्कलेव और मंदसौर जिला होगा, और
(5) राजस्थान के कोटा जिले का सिरोंज उप खंड ।
इस नए मध्य प्रदेश की कुल जनसंख्या 2 करोड़ 60 लाख 10 हजार और क्षेत्रफल लगभग 171.200 वर्गमील होगा।
मेरा सुझाव है कि इसे दो राज्यों में बांटा जाए (1) उत्तरी मध्य प्रदेश, और (2) दक्षिणी मध्य प्रदेश (देखें मानचित्र 4 ) ।
उत्तरी मध्य प्रदेश के नए राज्य में निम्नलिखित क्षेत्र शामिल होंगे :
(1) संपूर्ण विंध्य प्रदेश और
(2) संपूर्ण भोपाल राज्य ।
दक्षिणी मध्य प्रदेश के राज्य में ये होंगे :
(1) संपूर्ण इन्दौर राज्य, और
(2) महाकोशल के 14 जिले ।
इस इन्दौर राज्य की जनसंख्या लगभग 2 करोड़ होगी और इस विंध्य प्रदेश की जनसंख्या लगभग 1 करोड़ 30 लाख (देखें मानचित्र 4 ) |
आयोग ने इस भीमाकार राज्य की रचना क्यों की, यह हमारी समझ से बाहर है। प्रधानमंत्री नेहरू को भी इसकी रचना पर आश्चर्य हुआ था।
हमारी समझ में केवल इतना आता है कि आयोग की शायद यह धारणा रही हो कि एक भाषा, एक राज्य ऐसा सुस्पष्ट आदेश है, जिससे विचलन संभव नहीं। जैसा कि मैं बता हूं एक भाषा, एक राज्य कभी सुस्पष्ट आदेश हो ही नहीं सकता। वास्तव में एक भाषा एक राज्य' हमारा मापदंड होना चाहिए और इसीलिए एक भाषा-भाषी अपने को कई राज्यों में बांट सकते हैं।