महाराष्ट्र : एक भाषावार प्रांत - डॉ. भीमराव अम्बेडकर
Maharashtra as a Linguistic Province Dr Bhimrao Ambedkar
कलकत्ता और बंबई
63. बंबई को महाराष्ट्र से विलग करने के मामले पर अपना फैसला देने से पहले आयोग को कलकत्ता की स्थिति पर भी विचार कर लेना होगा। बंबई की तरह कलकत्ता भी भारत के पूरे के पूरे पूर्वी भाग का मुख्य व्यापार केंद्र है। बंबई में जिस तरह महाराष्ट्रवादी अल्पसंख्यक हैं, ठीक वही स्थिति कलकत्ता में बंगालियों की है। बंबई के महाराष्ट्रवासियों की ही तरह कलकत्ता के बंगालियों का वहां के व्यापार और उद्योगों पर आधिपत्य नहीं है। बंबई के मराठी भाषियों की तुलना में कलकत्ता के बंगालियों की स्थिति बदतर है। ऐसा इसलिए है कि मराठी भाषी कम से कम यह दावा तो कर ही सकते हैं कि बंबई के व्यापार और व्यवसाय में उनकी पूंजी नहीं लगी है तो क्या हुआ, वे वहां मजदूरों के रूप में काम तो कर ही रहे हैं। बंगाली तो यह दावा भी करने की स्थिति में नहीं हैं। यदि यह आयोग महाराष्ट्र से बंबई के विलगन के तर्कों को मान सकता है तो उसे इन्हीं तर्कों के आधार पर पश्चिम बंगाल से कलकत्ता के पृथक्करण की सिफारिश करने के लए भी तैयार रहना चाहिए, क्योंकि एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न यह पूछा जा सकता है कि यदि दिए गए कारणों से बंबई को महाराष्ट्र से अलग किया जा सकता है तो उन्हीं विद्यमान कारणों की वजह से कलकत्ता को पश्चिम बंगाल से अलग क्यों न कर दिया जाए।
