Hindu Dharm Ki Paheliyan - dr Bhimrao Ramji Ambedkar - हिंदू धर्म की पहेलियां - लेखक -  डॉ. भीमराव आम्बेडकर - Page 60 मुख्य मजकूराकडे जा

हिंदू धर्म की पहेलियां - लेखक -  डॉ. भीमराव आम्बेडकर

Hindu Dharm Ki Paheliyan dr Bhimrao Ramji Ambedkar

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25 ऑगस्ट 2023
Book
5,7,2,1,,

सूत संहिता के रचनाकार की बड़ी वृहद सूची है। उसमें तरेसठ जातियां हैं।

Origin of mixed castes - Manus madness or the Brahmanical system of origin of mixed castes - Hindu Dharm Ki Paheliyan - Riddle of Hinduism - Book by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

संकर जाति का नाम पिता की जाति माता की जाति
1. अम्बष्ट क्षत्रिय वैश्य
2. उर्ध्वनापित ब्राह्मण वैश्य
3. कटकर वैश्य शूद्र
4. कुंभकार ब्राह्मण वैश्य
5. कुंड ब्राह्मण विवाहित ब्राह्मण
6. गोलक ब्राह्मण विधुर ब्राह्मण
7. चक्री शूद्र वैश्य
8. दोसन्तया क्षत्रिय शूद्र
9. दोसन्ती क्षत्रिय शूद्र
10. पटट्नशाली शूद्र वैश्य
11. पुलिन्द वैश्य क्षत्रिय
12. बह्यादस शूद्र ब्राह्मण
13. भोज वैश्य क्षत्रिय
14. महिकार वैश्य वैश्य
15. मानविक शूद्र शूद्र
16. म्लेच्छ वैश्य क्षत्रिय
17. शालिका वैश्य क्षत्रिय
18. शौडिक ब्राह्मण शूद्र
19. सुलिखा ब्राह्मण शूद्र
20. सापर्ण ब्राह्मण क्षत्रिय
21. आग्नेयनर्तक अम्बष्ट अम्बष्ट
22. अपितर ब्राह्मण दौसन्ती
23. आश्रमक दंतकेवल शूद्र
24. उदबंध सनक क्षत्रिय
25. करण नट क्षत्रिय
26. कर्मा करण क्षत्रिय
27. कर्मकार रेणुका क्षत्रिय
28. करमर माहिष्य करण
29. कुक्कुण्ड मागध शूद्र
30. गुहक श्वपाच ब्राह्मण
31. चर्मोपजीवी वैदेशिका ब्राह्मण
32. चमकार आयोगव ब्राह्मणी
33. चर्मजीवी निषाद करुषी
34. तक्ष माहिष्य करण
35. तक्षवृति उग्र ब्राह्मण
36. दंतकवेलक चाण्डाल वैश्य
37. दस्यु निषाद आयोगव
38. द्रुमिल निषाद क्षत्रिय
39. नट पिछल्ल क्षत्रिय
40. नापित निषाद ब्राह्मण
41. नीलादिवर्णविक्रेता आयोगव चिरकरी
42. पिछल्ल मल्ल क्षत्रिय
43. पिंगल ब्राह्मण आयोगव
44. भागलब्ध दौसंती ब्राह्मणी
45. भरुष सुधन्वा वैश्य
46. भैरव निषाद शूद्र
47. मातंग विजन्मा वैश्य
48. मधुक वैदेहिक आयोगव
49. मालाकार दस्यु वैश्य
50. मैत्रा विजन्मा वैश्य
51. रजक विदेह ब्राह्मण
52. रथकार माहिष्य करण
53. रेणुक नापित ब्राह्मण
54. लोहकार माहिष्य ब्राह्मणी
55. वर्धकी माहिष्य ब्राह्मण
56. वार्य सुधन्वा वैश्य
57. विजन्मा भरुष वैश्य
58. शिल्प माहिष्य करण
59. श्वपच चाण्डाल ब्राह्मणी
60. सनक मागध मागध
61. समुद्र तक्षवृति वैश्य
62. सात्वत विजन्मा वैश्य
63. सुनिषाद निषाद वैश्य

     मनु द्वारा रचित पांच जातियों की श्रेणियों में से चार को तो सरलता से समझा जा सकता है। परन्तु इनमें से पांचवी श्रेणी संकर जाति के विषय में भी ऐसे ही नहीं कहा जा सकता। मस्तिष्क में अनेक प्रश्न उठते हैं। पहली बात तो यह है कि मनु की यह सूची यंत्रवत् है । यह एक सम्पूर्ण सूची नहीं है, जिसमें संकर जातियों की सभी संभावनाएं हों।

     अनुलोम और प्रतिलोम विवाहों से आर्य जातियों से उत्पन्न मिश्रित जातियों के विषय में चर्चा आती है तो मनु द्वारा जातियों के नाम स्पष्ट किए जाने चाहिए थे। चार में से प्रत्येक वर्ण के बारह अनुलोम- प्रतिलोम जातियां जन्मी । यदि उन्होंने ऐसा किया होता तो अड़तालिस जातियां बननी चाहिए थीं। दरअसल उन्होंने मिश्रित विवाहों से जनित केवल चार जातियों का उल्लेख किया है।

     अनुलोम और प्रतिलोम विवाहों के कारण जन्मी 144 जातियों की सूची मनु को प्रस्तुत करनी चाहिए थी, क्योंकि इन विवाहों की संख्या बारह है। वास्तव में मनु ने केवल ग्यारह जातियां बताई हैं। इन ग्यारह जातियों के निर्माण के विषय में उन्होंने केवल पांच के मिश्रण का उल्लेख किया है। इनमें से एक (वैदेह) अनुलोम प्रतिलोम की सूची से बाहर है। आठ का प्रसंग छोड़ ही दिया गया है।