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भगवान बुद्ध और उनका धम्म - लेखक -  डॉ. भीमराव आम्बेडकर

Bhagwan Buddha aur Unka Dhamma Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

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16 जून 2023
Book
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८. विवाह

१. दण्डपाणि नाम का एक शाक्य था । यशोधरा उसकी लड़की थी। अपने सौन्दर्य और 'शिल' के लिये वह प्रसिद्ध थी ।

२. यशोधरा अपने सोलहवें वर्ष में पहुंच गई थी और दण्डपाणी को उसके विवाह की चिन्ता ने आ घेरा था ।

३. प्रथा के अनुसार दण्डपाणि ने अपने सभी पडोसी 'देशो' के तरूणों को अपनी लड़की के 'स्वयंवर' में सम्मिलित होने का निमंत्रण भेजा ।

४. सिद्धार्थ गौतम के नाम भी एक निमंत्रण भेजा गया था ।

५. सिद्धार्थ गौतम का भी सोलहवाँ वर्ष पूरा हो चुका था । उसके माता-पिता भी उसकी शादी के लिये वैसे ही चिन्तित थे ।

६. उन्होंने उसे ‘स्वयंवर' में जाने को और यशोधरा का 'पाणि-ग्रहण' करने को कहा । उसने अपने माता-पिता का कहना माना ।

७. आगत तरूणों में से यशोधरा ने सिद्धार्थ गौतम को ही चुना ।

८. दण्डपाणि बहुत प्रसन्न नहीं था । उसे उन दोनों के 'दाम्पत्य जीवन की सफलता में सन्देह था ।

९. उसे लगता था कि सिद्धार्थ को तो साधु-सन्तों की संगति ही अच्छी लगती है। उसे तो एकान्त प्रिय है । वह एक अच्छा सद्गृहस्थ कैसे बन सकेगा?

१०. यशोधरा सिद्धार्थ गौतम के अतिरिक्त और किसी दूसरे से विवाह न करना चाहती थी । उसने अपने पिता से पूछा क्या साधू- सन्तो की संगति को अच्छा समझना कोई अपराध है? यशोधरा का ऐसा ख्याल नहीं था ।

Marriage of Gautama Buddha - Bhagwan Buddha aur Unka Dhamma - Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

११. यशोधरा की मां को जब मालूम आ कि यशोधरा सिद्धार्थ गौतम के अतिरिक्त और किसी दूसरे से विवाह करना ही नहीं चाहती, उसने दण्डपाणि से कहा कि उसे राजी हो जाना चाहिये । दण्डपाणि राजी हो गया ।

१२. गौतम के प्रतिद्वन्द्वी निराश ही नहीं हुए बल्कि उन्हें लगता था कि उनका अपमान हो गया है।

१३. उन्हें लगता था कि कम से कम उनके प्रति 'न्याय' करने के लिये ही यशोधरा को चाहिये था कि 'चुनाव' करने से पहले किसी न किसी तरह से सबकी परिक्षा लेती ।

१४. कुछ समय तो वह चुप रहे । उनका विश्वास था कि दण्डपाणि यशोधरा को गौतम का चुनाव ही न करने देगा । उनका उद्देश्य यूं ही पूरा हो जायेगा

१५. लेकिन जब उन्होंने देखा कि दण्डपाणि असफल रहा है, उन्होंने हिम्मत से काम लिया और इस बात की मांग की कि 'लक्ष्यवेध' की एक 'परिक्षा होनी ही चाहिये । दण्डपाणि को स्वीकार करना पड़ा ।

१६. पहले तो सिद्धार्थ इसके लिये तैयार न था । लेकिन, उसके सारथी, छन्दक ने उसे समझाया कि यदि वह अस्वीकार करेगा तो यह उसके लिये, उसके परिवार के लिये तथा सबसे बढ़कर यशोधरा के लिये ही बड़ी लज्जा की बात होगी ।

१७. सिद्धार्थ-गौतम के मन पर इस तर्क का बड़ा प्रभाव पड़ा । उसने उस परीक्षण में सम्मिलित होना स्वीकार किया ।

१८. ‘परिक्षण' आरम्भ हुआ । प्रत्येक प्रतिद्वन्दी ने अपना-अपना कौशल दिखाया ।

१९. सबके अन्त में गौतम की बारी थी । किन्तु उसी का 'लक्ष्य वेध' सर्वश्रेष्ठ सिद्ध हुआ ।

२०. इसके बाद विवाह हुआ । शुद्धोदन और दण्डपाणि दोनों को बड़ी प्रसन्नता थी । इसी प्रकार यशोधरा और महाप्रजापति बड़ी प्रसन्न थी ।

२१. विवाह हो चुकने के काफी समय बाद यशोधरा ने एक पुत्र को जन्म दिया । उसका नाम राहुल रखा गया ।

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