मुख्य मजकूराकडे जा

भगवान बुद्ध और उनका धम्म - लेखक -  डॉ. भीमराव आम्बेडकर

Bhagwan Buddha aur Unka Dhamma Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

Page 112 of 132
16 जून 2023
Book
12,14,5,7,1,,

(३) क्या बौद्ध धम्म निराशावादी है ?

१. भगवान् बुद्ध के धम्म पर 'निराशावादी' धम्म होने का आरोप लगया गया है ।

२. इस आरोप का कारण प्रथम आर्य सत्य है जिसका कहना है कि संसार में दुःख ( चिन्ता - कष्ट) है ।

kya Buddha Dharm nirashavadi hai - Bhagwan Buddha aur Unka Dhamma - Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

३. यह सचमुच आश्चर्य की बात है कि दुःख का उल्लेख होने मात्र से बुद्ध धम्म पर यह आरोप लगाया जाय ।

४. कार्ल मार्क्स ने भी कहा था कि संसार में शोषण है, गरीब और भी अधिक गरीब होते चले जा रहे हैं, अमीर और भी अधिक अमीर होते चले जा रहे है ।

५. लेकिन तब भी किसी ने नहीं कहा कि कार्लमार्क्स का सिद्धांत 'निराशावादी' सिद्धांत है ।

६. तब बुद्ध देशना के ही सम्बन्ध में एक भिन्न दृष्टिकोण क्यों रखा जाय ?

७. इसका एक कारण यह हो सकता है कि उन्होंने अपने प्रथम उपदेश में ही यह कहा है कि जन्म भी दुःख है, जरा भी दुःख हैं और मरण भी दुःख है, और इसी से भगवान बुद्ध के धम्म को कुछ गहरी निराशावादी रंगत दे दी गई है ।

८. लेकिन जो शब्द-शिल्पी है वे जानते हैं कि यह एक कलापूर्ण अतिशयोक्ति मात्र है और जो इस साहित्यिक् कला में निष्णात है प्रभाव उत्पन्न करने के लिये इसका उपयोग करते ही है ।

९. यह कथन कि 'जन्म दुःख हैं' एक अतिशयोक्ति है यह भगवान् बुद्ध के ही एक दूसरे प्रवचन से सिद्ध किया जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा हैं कि 'मनुष्यजन्म एक दुर्लभ वस्तु है ।'

१०. फिर यदि बुद्ध ने केवल 'दुःख' की ही बात की होती, तब भी शायद तथागत पर यह आरोप लग सकता था ।

११. लेकिन भगवान् बुद्ध का दूसरा आर्य सत्य इस बात पर जोर देता है कि इस दुःख का अन्त होना चाहिये । दुःख का करने की बात पर ज़ोर देने के लिये ही तथागत को दुःख के अस्तित्व की चर्चा करनी पडी ।

१२. भगवान् बुद्ध ने दुःख को दूर करने की बात को ही सर्वाधिक महत्व दिया है। यही कारण है कि जब उन्होंने देखा कि कपिल ने दुःख के अस्तित्व की चर्चा भर की है और इससे अधिक कुछ नहीं किया, तो वे असन्तुष्ट हुए और उन्होंने आलार कालाम का आश्रम तक छोड़ दिया ।

१३. तब ऐसा धम्म निराशावादी धम्म कैसे कहला सकता है?

१४. निश्चय से जो शास्ता दुःख का अन्त देखने के लिये इतने उत्सुक थे, निराशावादी नहीं कहे जा सकते ।