महाराष्ट्र : एक भाषावार प्रांत - डॉ. भीमराव अम्बेडकर
Maharashtra as a Linguistic Province Dr Bhimrao Ambedkar
32. वे विशेषाधिकार क्या थे, जो उन गुजराती बनियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी से मांगे थे? दीव शहर के नीमा पारेख नाम के किसी प्रसिद्ध बनिए की निम्नलिखित याचिका से उनका कुछ स्वरूप स्पष्ट हो जाएगा। *
क. माननीय कंपनी से अनुरोध है कि वह उसे घर बनाने या भंडार घर खोलने के लिए इस कस्बे में या इसके आसपास बिना किराए के अपने विवेक के अनुसार जमीन आवंटित करने की कृपा करें।
ख. उसे और ब्राह्मणों (गौड़ों या पुरोहितों) को उनकी जाति के अन्य लोगों के साथ यह सुविधा प्रदान की जाती है कि वे अपने-अपने घरों में अपने धर्म के अनुसार बिना किसी बाधा के आचरण कर सकेंगे। अन्य किसी भी व्यक्ति को उनसे छेड़छाड़ करने की छूट नहीं दी जाएगी। किसी भी अंग्रेज, पुर्तगाली या किसी भी ईसाई अथवा मुसलमान को उनके परिसर में बसने की अथवा वहां किसी जीवित प्राणी का वध करने की या उन्हें किसी प्रकार की चोट पहुंचाने की या उनका अपमान करने की अनुमति नहीं होगी और यदि कोई उनके परिसर में ऐसा करते पाया गया और सूरत के गवर्नर को या बंबई के डिप्टी गवर्नर को तत्संबंधी शिकायत मिली तो अभियुक्तों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। उन्हें अपने रीति-रिवाजों के अनुसार मृतक का शव दाह करने की छूट होगी, शादी-ब्याह के मौके पर सभी रस्में पूरी करने दी जाएंगी तथा किसी भी उम्र के व्यक्ति को या स्त्री-पुरुष में से किसी को किसी भी शर्त पर जबरन ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा और न ही उनकी मर्जी के खिलाफ बोझा ढोने को बाध्य किया जाएगा।
ग. उसे और उसके परिवार को निगरानी और रखवाली से संबंधित सभी प्रकार के कर्तव्यों से मुक्त रखा जाएगा, न तो कंपनी और न ही गवर्नर, डिप्टी गवर्नर या परिषद या और कोई व्यक्ति किसी भी बहाने उसे निजी या सार्वजनिक कार्यों के लिए रुपया उधार देने को बाध्य नहीं कर सकेगा।
घ. यदि उसके या उसके वकील या मुख्तार या उसकी जाति के बनियों और उस द्वीप में रहने वाले किसी अन्य व्यक्ति के बीच किसी प्रकार का मतभेद या कानूनी तौर पर कोई मुकदमा उठ खड़ा हो, तो गवर्नर या डिप्टी गवर्नर उसे या उनको सार्वजनिक तौर पर गिरफ्तार करने, अपमानित करने या जेल भिजवा कर ठेस नहीं पहुंचाएगा। ऐसा करने से पहले उसे कारण बताते हुए उचित नोटिस देना होगा और उसके या उनके साथ ईमानदारी और सदाशयतापूर्वक न्याय करने का आश्वासन देना होगा। यदि उसके या उसके मुख्तार और उसकी जाति के किसी भी बनिए के बीच कोई विवाद उठ खड़ा होता है तो उन्हें इस बात की स्वतंत्रता होगी कि कानून की शरण में गए बिना ही वे परस्पर मिलकर उस मामले को निपटा लें।
ड. उसे अपने जहाजों या जलयानों में व्यापार करने की स्वतंत्रता होगी, वह अपनी पसंद के किसी भी पत्तन पर जब चाहे आ-जा सकेगा। इसके लिए यदि वह गवर्नर या डिप्टी गवर्नर या सौदागर को पूर्व- नोटिस दे देता है और उसके लिए उनकी सहमति मिल जाती है, तब उसे लंगर भाड़ा नहीं चुकाना पड़ेगा ।
च. यदि वह ऐसा कोई माल अधिक मात्रा में तट पर लाता है, जिसे वह एक साल की अवधि में उस द्वीप पर न बेच सके, तो उसे सामान को बिना कस्टम चुकाए ही उसके मनपसंद पत्तन तक ले जाने की छूट होगी।
छ. यदि कोई व्यक्ति उससे ऋण ले और अन्य बनियों से भी ले ले और किसी कारण से सारा उधार चुकाने की स्थिति में न हो, तो अन्य बनियों की तुलना में ऋण उगाहने के उसके अधिकार को तरजीह दी जाएगी।
ज. यदि युद्ध छिड़ जाए या कोई अन्य प्रकार की विपत्ति आ जाए जिससे उसको नुकसान पहुंचने की संभावना हो तो ऐसी स्थिति में वह अपने गोदाम, संपत्ति और परिवार _ किले में सुरक्षित रख सकेगा ।
झ. उसे या उसके परिवार के किसी सदस्य को किले में या गवर्नर या डिप्टी गवर्नर के आवास में आने-जाने की छूट होगी, उनका नागरिक तौर-तरीकों से स्वागत- सत्कार किया जाएगा, उनकी हैसियत के अनुसार उन्हें बैठने दिया जाएगा, उन्हें बिना किसी प्रकार की बाधा पहुंचाए मन मर्जी के अनुसार बग्घियों, घोड़ों या पालकियों और छतरियों का उपयोग करने दिया जाएगा, उनके नौकर-चाकर और रक्षक तलवार या कटारें धारण कर सकेंगे, उनके साथ गाली-गलौज नहीं की जाएगी, न मारा-पीटा जाएगा और जब तक कोई अपराध न करें, उन्हें जेल नहीं भेजा जा सकेगा। यदि उनके बाल-बच्चे या दोस्त किसी दूसरे पत्तन से आएं तो उनके साथ भद्रता और आदरपूर्ण व्यवहार किया जाएगा।
ञ. उसे और उसके कानूनी प्रतिनिधि को नारियल, सुपारी, पान और अन्य कोई भी वस्तु खरीदने और बेचने की छूट होगी ।
*बोंबे गजेटियर, खंड | पृष्ठ 74-76