डॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी
आतंकी गतिविधियों और म्यांमार में विद्रोही समूहों को ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक (Matthew Aaron VanDyke) को कानूनी प्रक्रिया और कूटनीतिक दबाव के बाद रिहा कर दिया गया है।
रिहाई के मुख्य कारण
वैनडाइक को छोड़ने के पीछे कई कानूनी और राजनीतिक कारण सामने आए हैं।
१)डिफॉल्ट बेल (Default Bail): एनआईए (NIA) ने 90 दिनों के भीतर उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की थी, जिसके कारण दिल्ली की एक विशेष अदालत ने उसे ‘डिफॉल्ट बेल’ दे दी।
२)चार्जशीट में UAPA हटाना: शुरुआत में वैनडाइक पर आतंकवाद रोधी कानून UAPA की धारा 18 लगाई गई थी, लेकिन बाद में एनआईए ने अपनी चार्जशीट में केवल इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट के तहत आरोप लगाए, जिससे जमानत मिलना आसान हो गया।

३)अमेरिकी दबाव: कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि अमेरिकी सरकार के दबाव में भारत सरकार ने वैनडाइक को रिहा किया। अमेरिकी राजदूत ने इस मामले को विदेश सचिव स्तर पर उठाया था।
४)कूटनीतिक समझौता: वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने देश जाने की अनुमति दी गई, ताकि वे अपने परिवार से मिल सकें, हालांकि जांच अभी भी जारी है।
वैनडाइक कौन है ?
मैथ्यू वैनडाइक एक पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी और स्वयं को “फ्रीडम फाइटर” बताने वाला व्यक्ति है, जिसे अक्सर भाड़े का सैनिक (Mercenary) और CIA एसेट बताया जाता रहा है।
१)उसे म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों (Ethnic Armed Groups) को ड्रोन वॉरफेयर और हथियारों की ट्रेनिंग देने के आरोप में मार्च 2026 में गिरफ्तार किया गया था।
२)एनआईए ने उसे भारत में रहने वाले कुछ विद्रोही समूहों से कथित संबंधों के आधार पर UAPA के तहत जांच के दायरे में लाया था।
विपक्ष का विरोध
कांग्रेस नेता जयराम रमेश और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने वैनडाइक की रिहाई पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर आतंकी साजिश का आरोप था, उसे सम्मान के साथ अमेरिका भेज दिया गया।
विपक्ष ने पूछा कि क्या मोदी सरकार अमेरिकी दबाव में झुक गई और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में समझौता किया।
वैनडाइक वापस आएगा ?
वैनडाइक को एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति दी गई है, लेकिन एनआईए की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। कानूनी तौर पर उसे वापस भारत आना होगा, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर यह बड़ा मुद्दा है ।
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक की खबर पूछ रहे हैं। उन्हें और छह यूक्रेनी नागरिकों को कथित “म्यांमार ट्रेनिंग कैंप” मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने उन्हें डिफॉल्ट जमानत दे दी। एनआईए तय समय में आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सकी थी। इसके बाद वैनडाइक को 24 सितंबर 2026 की रात तिहाड़ जेल से रिहा कर अमेरिका जाने की अनुमति दी गई।
मामला क्या था
एनआईए ने आरोप लगाया था कि समूह बिना वैध परमिट के मिजोरम में दाखिल हुआ और फिर म्यांमार जाकर जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन-युद्ध का प्रशिक्षण दिया।
शुरुआत में उनके खिलाफ यूएपीए की धारा 18 के तहत आतंकवादी गतिविधियों की साजिश का मामला दर्ज किया गया था।
अदालत ने उन्हें एक महीने के लिए अपने देश जाने की अनुमति दी है।आदेश के अनुसार, उन्हें निर्धारित अवधि के बाद भारत लौटना और 72 घंटे के भीतर अदालत को सूचित करना होगा।[bbc]
हालाँकि, विदेशी दबाव के कारण रिहाई हुई—यह कांग्रेस और कुछ विशेषज्ञों का आरोप है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। BBC ने भी आरोपों और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि न होने की बात स्पष्ट की है।
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक की बात कर रहे हैं। उसे जमानत इसलिए मिली क्योंकि यह डिफॉल्ट जमानत थी—NIA तय 180 दिनों के भीतर UAPA के तहत पूरी चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। अदालत के अनुसार दाखिल चार्जशीट केवल Immigration and Foreigners Act, 2025 की धाराओं 21 और 23 से संबंधित थी, जबकि UAPA की जांच लंबित थी।
जमानत का आधार यह नहीं था कि अदालत ने उसे निर्दोष मान लिया।
जांच एजेंसी समय-सीमा में आवश्यक आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाई, इसलिए कानून के तहत आरोपी को डिफॉल्ट बेल मांगने का अधिकार मिला।
अदालत ने ₹1 लाख का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की जमानत मांगी तथा जांच में सहयोग जैसी शर्तें लगाईं।
बाद में अदालत ने उसे लगभग एक महीने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति दी; यह अलग अनुमति थी, जमानत मिलने का स्वतः परिणाम नहीं।
राजनीतिक दलों ने अमेरिकी दबाव का आरोप लगाया, लेकिन उपलब्ध अदालत-संबंधी रिपोर्टों में जमानत का मुख्य कानूनी कारण NIA की समय-सीमा में पूरी चार्जशीट दाखिल न कर पाना बताया गया है।
वैनडाइक का अन्य देशों के साथ संबंध
मैथ्यू वैनडाइक एक विवादास्पद व्यक्ति है, जिसे कई अंतरराष्ट्रीय संघर्ष क्षेत्रों में सक्रिय पाया गया है।
१)अमेरिका: वैनडाइक अमेरिका का नागरिक है (बाल्टीमोर, मैरीलैंड में जन्म)।
२)लीबिया: 2011 में गद्दाफी शासन के खिलाफ लड़ाई में शामिल रहा।
३)सीरिया: सीरिया के गृह युद्ध के दौरान फिल्ममेकर और सशस्त्र लड़ाके दोनों रूपों में सक्रिय रहा।
३)इराक: ISIS के खिलाफ लड़ाई में भाग लिया।
४)यूक्रेन: 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन की सेना को समर्थन दिया।
५)म्यांमार: 2025–26 में म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ सशस्त्र समूहों को ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग देने के आरोप में।
६)भारत: मार्च 2026 में NIA ने उसे और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया, आरोप था कि वे भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में उग्रवादियों को ट्रेनिंग दे रहे थे।
भारत मामले में स्थिति (2026)
७)NIA ने उसे UAPA के तहत गिरफ्तार किया, लेकिन बाद में अदालत ने उसे और उसके साथियों को एक महीने की जमानत दी और पासपोर्ट वापस करने का आदेश दिया, शर्त यह थी कि वे वापस आकर जांच में सहयोग करेंगे।
८)कुछ रिपोर्ट्स में रूसी खुफिया एजेंसियों द्वारा भारत को टिप-off देने का जिक्र है।
वास्तविक स्थिति क्या थी ?
१)वैनडाइक को मार्च 2026 में कोलकाता एयरपोर्ट से NIA ने गिरफ्तार किया था; आरोप था कि वह और छह यूक्रेनी नागरिक भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों, ड्रोन/हथियार तस्करी और विद्रोही समूहों को प्रशिक्षण देने की साज़िश में शामिल थे।
२)तिहाड़ जेल में रहते हुए उसने अदालत में अर्जी दी कि जेल का खाना उसके लिए “मसालेदार, तैलीय, गहरा तला हुआ” है, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसने 50 दिनों से अधिक की भूख हड़ताल की।
३)उसने खुद खाना बनाने की इजाज़त माँगी — इंडक्शन स्टोव, बर्तन, और 19 तरह की चीज़ें (पास्ता, झींगा, चिकन, सोया मिल्क, ऑलिव ऑयल आदि) की सप्लाई, यह कहते हुए कि परिवार ख़र्च उठाएगा।
४)अदालत ने बाद में विशेष व्यवस्था का आदेश दिया:
५)मांसाहार नहीं, लेकिन उसकी पसंद का शाकाहारी खाना बनाने के लिए रसोइया
६)इलेक्ट्रिक केतली, मच्छरों से सुरक्षा, और स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था।
७)उसके परिवार ने अमेरिकी सरकार से राजनयिक हस्तक्षेप की गुहार लगाई, यह कहते हुए कि उसे एकांतवास में रखा गया है, दवाइयाँ नहीं मिल रहीं, और परिवार से संपर्क में बाधाएँ हैं।
सितंबर 2026 में एक विशेष NIA कोर्ट ने उसे और छह यूक्रेनियों को एक महीने के लिए अपने देश जाने की ज़मानत दी, ताकि वे परिवार से मिल सकें; शर्तों के पूरा होने के बाद वे तिहाड़ से रिहा हुए।और देशी आंदोलनकर्ते जेल में हैं इसका नाम है नया भारत ।