हिंदू धर्म की पहेलियां - लेखक - डॉ. भीमराव आम्बेडकर
Hindu Dharm Ki Paheliyan dr Bhimrao Ramji Ambedkar
IV
अब हम स्मृतियों पर आते हैं। मनुस्मृति में वेदों की उत्पत्ति के संबंध में दो सिद्धांत हैं। एक स्थान² पर वह कहती है कि वेदों की रचना ब्रह्मा ने की है :
"उसी ब्रह्म ने आरम्भ में वेद से शद्व सृजन कर पृथक-पृथक नाम, कर्म तथा व्यवस्था बनाई। उसी भगवान ने इन्द्रादि देव कर्मस्वभाव, प्राणी, अप्राणी, साध्यगण और सनातन यज्ञ की सृष्टि की। इस ब्रह्मा ने यज्ञों की सिद्धी के लिए अग्नि, वायु और सूर्य से नित्य ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद को क्रमशः प्रकट किया।"

एक अन्य स्थान³ पर ऐसा आभास मिलता है कि प्रजापति वेदों का जनक है जैसा कि निम्नांकित से प्रकट है:
"ब्रह्मा ने ऋक् आदि तीनों वेदों से क्रमशः "अ उ म" इन तीन अक्षरों तथा
“भू, भुवः, स्व:" इन तीनों व्याहृतियों को निकाला है। परम श्रेष्ठ ब्रह्मा ने ऋक् आदि तीनों वेदों से "तत" शब्द से प्रारंभ होने वाला इस सावित्री (अथवा गायत्री) का एक तिहाई पद निकाला है। ओमकार पूर्विका ये तीनों भूः भुवः स्वः अनश्वर तत्व नाशरहित है और त्रिपदा गायत्री वेदों का मुख है।"
2. वही पृ. 6
3. वही पृ. 7
V
वेदों के संबंध में पुराणों का क्या कहना है, यह भी एक दिलचस्प बात है। विष्णु पुराण¹ में कहा गया है:
"फिर अपने पूर्व मुख से ब्रह्मा ने गायत्री, ऋक्, त्रिवृत, सोमरथंतर और अग्निष्टोम यज्ञों को रचा। दक्षिण मुख से यजु, त्रैष्टुप्छन्द, पंचदशस्तोम, वृहत्साम तथा उक्थ्य की रचना की। पश्चिम मुख से साम, जगतिछंद, सप्तदशस्तोम, वैरूप और अतिरात्र को उत्पन्न किया तथा उत्तर मुख से उन्होंने एकविंशतिस्तोम, अथर्ववेद, आप्तोर्यामण, अनुष्टपछंद और वैराज छंद की सृष्टि की। "
भागवत पुराण² में कहा गया है:
“एक बार जब चतुर्मुख ब्रह्मा के मुख से वेद प्रस्फुटित हुए, वे यह जानने के लिए ध्यान लगा रहे थे कि मैं पहले की भांति सृष्टि का कैसे विस्तार करूं? उन्होंने अपने पूर्व मुख और अन्य मुखों से ऋक, यजुश, साम और अथर्ववेद की रचना की,
उसी के साथ प्रशस्ति, यज्ञ, ऋचाएं और प्रायश्चित की भी सृष्टि हुई। (मूल रचना में इस स्थान पर कुछ अंश छूटे हुए लगते हैं क्योंकि अगले भाग से उसका तारतम्य नहीं है ) ।
“उसकी आंखों में प्रविष्ट होते हुए उससे एक नर चतुष्पद उत्पन्न हुआ जो ब्रह्मा की तरह कामुक, अवर्णणीय, सनातन, अक्षय, दैहिक संवेदनाओं और गुणों से रहित था, जो विशिष्ट मेधा से दमक रहा था, चन्द्रमा की किरणों की तरह शुद्ध था और शब्दों में साकार था। भगवान ने ऋग्वेद की रचना की। उन्होंने अपनी आंखों से यजुर्वेद को बनाया, जिह्वा के छोर से सामवेद की रचना की और सिर से अथर्ववेद रचा। अपनी रचना के साथ ही ये वेद क्षेत्र में परिवर्तित हो गए। फिर उन्हें वेदों के गुरु प्राप्त हुए क्योंकि उन्हें विंदांति प्राप्त हुई। फिर इन वेदों ने अनादि सनातन ब्रह्मज्ञान की उत्पत्ति की एक अपने गुणों से सम्पन्न स्वर्गीय पुरुष की रचना की।"
उसमें प्रजापति को भी सृष्टा स्वीकार किया गया है: "इसके पश्चात् जगदीश्वर सृष्टि की इच्छा से मन ही मन कुछ विचार करने लगे। हिरण्यगर्भ प्रजापति के मुख से ओम् शङ् प्रकट हुआ। भगवान ने उससे कहा तुम अपने स्वरूप का विभाजन करो। उस पुरुष ने वाणी पर बार-बार विचार किया कि अपने स्वरूप का विभाजन कैसे करूं, इस विषय में मुझे संदेह है- 'हरिवंश' का इस बारे में कथन है:³
1. म्यूर, संस्कृत टैक्स्ट, खंड 1, पृ. 11
2. वही पृ. 11
3. वही पृ. 14
ऐसा सोचते हुए भगवान के मुख से ओम का उच्चारण हुआ । इस शब्द की समस्त पृथ्वी, वायु और आकाश में गूंज ध्वनित हुई। इस मस्तिष्क के परम तत्व को जब देवों के देव बार-बार उच्चारित कर रहे थे, तब उनके हृदय से वषट्कार प्रकट हुआ। इसके बाद पृथ्वी, वायु, अंतरिक्ष और स्वर्ग की सारभूता "भूः भुवः स्वः” महास्मृतिमयी व्याहृतियां जन्मीं । फिर श्रेष्ठ देवी गायत्री पैदा हुई जो चौबीस अक्षरों से युक्त है। भगवान ने उस पद का स्मरण करके सावित्री मंत्र को प्रकट किया। फिर प्रजापति ने ब्रह्मयुक्त कर्म के द्वारा ऋक्, साम, अथर्व और यजु नामक चारों वेदों का प्रादुर्भाव किया। "
VI
इस प्रकार वेदों की सृष्टि के विषय में हमारे सामने ग्यारह भिन्न-भिन्न व्याख्याएं हैं- 1. पुरुष रहस्यात्मक यज्ञ से उत्पन्न हुए, 2. स्कंभ पर आधारित है, 3. उससे विलगित बालों और मुख से निकले 4 इन्द्र ने उत्पन्न किए 5. काल से जन्मे, 6. अग्नि, वायु और सूर्य से उत्पन्न हुए, 7. प्रजापति और जल से पैदा हुए, 8. ब्रह्मा की श्वांस से निकले, 9. भगवान ने मानस सागर से खोदकर निकाला 10. ब्रह्मा की दाढ़ी के बालों से निकले, 11. वाच का विस्तार है।
एक सीधे से सवाल को जो एक पहेली है जवाबों के बियाबान में भटका दिया गया है। इन प्रश्नों के उत्तर ब्राह्मणों के गढ़े हैं। वे एक ही वैदिक सिद्धांत के माने वाले हैं। प्राचीन धार्मिक कहानियों के ये ही गढ़ने वाले हैं। इस सीधे से सवाल के ऐसे अजीबोगरीब और अव्यवस्थित जवाब क्यों दिए गए ?