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हिंदू धर्म की पहेलियां - लेखक -  डॉ. भीमराव आम्बेडकर

Hindu Dharm Ki Paheliyan dr Bhimrao Ramji Ambedkar

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25 ऑगस्ट 2023
Book
5,7,2,1,,

    ऋग्वेद के कुछ मंत्रों अथवा प्रार्थनाओं को लेते हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

1. हे वायु देव! तू कितना रूपवान है हमने मसालों से सोम रस बनाया है। आ, इसका पान कर और हमारी प्रार्थना स्वीकार कर ऋग्वेद 1. 1.2.1

vedon ki Vishay samagri - Hindu Dharm Ki Paheliyan - dr Bhimrao Ramji Ambedkar

2. हे इन्द्र देव ! हमारे संरक्षण हेतु सम्पदा प्रदान कर । तेरे द्वारा प्रदत्त सम्पदा हमें सुख दे । चिरकालिक हो और हमारे शत्रु विनाश में सहायक हो। 1. 1.8.1

3. पुरुषों जब भी यज्ञ करो इन्द्र और अग्निदेव की स्तुति करना न भूलना, उनका गुणगान करो और गायत्री छंद में उनकी स्तुति करो। I. 21.2

4. हे अग्निदेव ! देव पत्नियों और त्वष्टा को ला, जो आने और सोमरस पान को लालायित है। 1. 22.9

5. हम प्रार्थना करते हैं, देव पत्नियां सभी उपलब्ध पंखों से और आनन्दित होकर हमारे पास आएं। 1. 22.11

6. मैं प्रार्थना कर रहा हूं कि इन्द्र, वरुण और अग्नि की पत्नियां मेरे पास आएं और सोम पिऐं ।

7. हे वरुण ! हम तुझ से अनुनय कर रहे हैं कि अपना क्रोध शमन कर । हे असुर ! तू पूर्ण बुद्धिमान है, हमें पाप मुक्त कर । I. 24.14

8. हमारा सोमरस स्त्रियों द्वारा तैयार किया गया है जिन्होंने इसे श्रमपूर्वक मथा है। हे इन्द्र ! हम तेरी प्रार्थना करते हैं। आओ और इस सोम का पान करो। I. 28.3

9. तेरे शत्रु जो तुझे कुछ अर्पित नहीं करते वे विलीन हो जाएं और जो अर्पित करते हैं, वे संपन्न हों। हे इन्द्र ! हमें उत्तम गाएं और अश्व प्रदान कर और विश्व में हमारी ख्याति फैला। 1. 29.4

10. हे अग्नि! हमारी राक्षसों से, धूर्त-शत्रुओं से, उनसे जो हमें घृणा करते हैं, और हमारा वध करना चाहते हैं, रक्षा कर । I. 36.15

11. हे इन्द्र! तू वीर है। आ और हमारे द्वारा तैयार सोम का पान कर और हमें सम्पदा देने को तत्पर रह । जो तुझे कुछ अर्पण नहीं करते, उनकी सम्पत्ति का हरण कर और उसे हमें प्रदान कर 1. 81-8-9

12. हे इन्द्र! इस सोम का पान कर, जो सर्वश्रेष्ठ है, अमरता प्रदान करता है और अत्याधिक मादक है। I. 84-4

13. हे आदित्य! हमारे पास आ अपना आशीर्वाद हमें दें। हमें युद्ध में विजयी बनाए। तुम समृद्ध हो। तुम दानी हो। जैसे एक रथ कठिन मार्ग पर अग्रसर होता है, उसी प्रकार हमें संकटों से पार कर 1. 1061-122

14. हे मारुत!... तुम्हारे अनुयायी तुम्हारी प्रशस्ति गा रहे हैं। प्रसन्न हो और आ सोम पान के लिए निर्मित कुश आसन पर विराजमान हो। 757-1-2

15. हे मित्र वरुण! हमने यज्ञ में तेरी आराधना की। इसे स्वीकार करने की कृपा कर। हमें संकटों से बचा। सातवां 7.60, 12

     ऋग्वेद में उल्लिखित अनेक मंत्र - समूह में से ये कुछेक हैं, किन्तु इसमें कोई संदेह नहीं कि यह छोटा-सा नमूना ही उन सबके लिए पर्याप्त है।

     मैं बता दूं कि मैंने ऋग्वेद और यजुर्वेद के बहुत से अश्लील अंशों को जानकर छोड़ दिया है। जिन्हें इस संबंध में जिज्ञासा है, वे ऋग्वेद के मण्डल दस 85.37 के सूर्य-पूशान संवाद और ऋग्वेद के मंडल दस 86.6 में इन्द्र-इंद्राणी संवाद देख सकते हैं। यजुर्वेद के अश्वमेध प्रसंग में और अश्लीलता व्याप्त है।

     इन अश्लीलताओं को छोड़ भी दें और ऋग्वेद के प्रार्थना वर्ग तक ही सीमित रहें तो भी क्या कोई कह सकता है कि यह प्रार्थनाएं नैतिक अथवा आध्यात्मिक उत्थान करने वाली हैं?

     जहां तक दर्शन का प्रश्न है ऋग्वेद में वह नदारद है जैसा कि "प्रत्येक मंत्र किसी देवता के लिए रचा गया है जिससे ऋषि का उद्देश्य इच्छापूर्ति का है और वह उसे संबोधित करता है। "

     यदि यह प्रमाणित करने के लए इतना भी पर्याप्त नहीं है कि वेदों में कोई नैतिक अथवा आध्यात्मिक मूल्य नहीं है तो अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

     जहां तक दार्शनिकता का प्रश्न है ऋग्वेद में प्राय: कुछ है ही नहीं। न ऋग्वेद नैतिकता का ही आदर्श प्रस्तुत करता है। प्रोफेसर विल्सन का कहना है कि ऋग्वेद में जो वृहद्तम है बहुत कम सैद्धांतिक अथवा दार्शनिक प्रसंग आए हैं। इसमें विभिन्न विचारधाराओं के परवर्ती अन्तर्बोध संबंधी कल्पनाओं का अभाव है। पुनर्जन्म सिद्धांत की ओर कोई संकेत नहीं है और न ही सृष्टि चक्र का कोई संदर्भ है। वेद आर्यों के सामाजिक जीवन के दिग्दर्शन का एक लाभकारी सूचना स्रोत है। यह आदिम जीवन की प्रतिच्छाया है, जिनमें जिज्ञासा अधिक है, भविष्य की कल्पना नहीं है। इनमें दुराचार अधिक, गुण मुट्ठी भर हैं।