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भगवान बुद्ध और उनका धम्म - लेखक -  डॉ. भीमराव आम्बेडकर

Bhagwan Buddha aur Unka Dhamma Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

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16 जून 2023
Book
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६. अन्तिम संस्कार

१. तब कुसीनारा के मल्लों ने आनन्द स्थविर से पूछा- “अब तथागत के शरीर के प्रति क्या करणीय है ?

२. आनन्द स्थविर का उत्तर था -- जैसे लोग राजाओं के राजा-महाराजाओं की दाह - क्रिया करते हैं, वैसे ही तथागत की होनी चाहिये ।"

Bhagwan Buddh ka mahaparinirvan - Bhagwan Buddha aur Unka Dhamma - Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

३. " और राजाओं के राजा के मृत शरीर के प्रति क्या क्या करणीय होता है?"

४. आनन्द स्थविर ने उत्तर दिया “महाराजाओ की देह को एक नये कपडे से लपेटा जाता है। फिर राई-- -- ऊन से लपेटा जाता है । फिर दूसरे नये कपडे से लपेटा जाता है और यह क्रम तब तक जारी रहता है जब तक वह एक के बाद दूसरे क्रम से पाच सौ बार नही लपेट लेते । तब वे शरीर को एक लोहे की तेल भरी बडी कडाही में रख देते हैं । उसके बाद उसे एक वैसे ही दूसरे लोहे के ढक्कन से ढक देते हैं । तब वे अनेक सामग्रियों से चिता का निर्माण करते है । यह वह तरीका है जिस प्रकार लोक किसी महाराजा का अन्तिम संस्कार करते हैं ।"

५. मल्ल बोले :- "ऐसा ही होगा ।”

६. तब मल्लो ने कहा:- “आज तथागत के शरीर की दाह - क्रिया करने के लिये बहुत विलम्ब हो गया है । हम इसे कल करे ।”

७. तब कुसीनारा के मल्लों ने अपने आदमीयो को आज्ञा दी -- तथागत की अन्त्येष्टि की तैयारी करो । सुगन्धियो, फूलो तथा कुसीना के बाजे बजाने वालों का संग्रह करो। "

८. लेकिन तथागत के शरीर के प्रति आदर, सत्कार, गौरव प्रदर्शित करते हुए तथा उसकी नृत्यों द्वारा, गीतों द्वारा, बाजो द्वारा, पूजा करते हुए फूल मालाओं द्वारा और सुगन्धियो द्वारा-- तथा कपड़ों के चन्दवे बनाते और उन पर लटकाने के लिये फूलो की मालाये गूँथ हुए उन्होंने दूसरा दिन भी गुजार दिया इसी प्रकार तीसरा दिन, चौथा दिन, पाचवां दिन और छठा दिन भी ।

९. तब सातवे दिन कुसीनारा के मल्लों ने सोचा, 'आज हम तथागत के शरीर को ले चलें -- आज हम उसकी अन्त्येष्टि कर लें।

१०. तदनन्तर मल्लों के आठ मुखियों ने सिर से स्नान किया, नये वस्त्र पहने ताकि वे तथागत की अर्थी को कन्धा लगा सकें ।

११. वे तथागत को मुकुट-बंधन स्नान पर ले गये, जहाँ नगर के पूर्व की ओर मल्लों का चैत्य था । वहाँ तथागत के शरीर को रखकर उसे अग्नि-स्पर्श करा दिया गया ।

१२. कुछ समय बाद तथागत की नश्वर देह राख परिणत हो गई ।