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भाषावार राज्यों के संबंध में विचार - डॉ. भीमराव अम्बेडकर

Thoughts on Linguistic States Book by Dr Bhimrao Ramji Ambedka

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15 मे 2023
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भाग I

आयोग का कार्य

अधयाय १

भाषावाद ही मूल समस्या

भारत के वर्तमान संविधान में निम्नलिखित राज्यों को मान्यता प्रदान की गई है, जिन्हें अनुसूची में दर्शाया गया है :

भाग 'क' के राज्य भाग 'ख' के राज्य भाग 'ग' के राज्य
1. आंध्र 1. हैदराबाद 1. अजमेर
2. असम 2. जम्मू व कश्मीर 2. भोपाल
3. बिहार 3. मध्य भारत 3. कुर्ग
4. बंबई 4. मैसूर 4. दिल्ली
5. मध्य प्रदेश 5. पटियाला 5. हिमाचल प्रदेश
6. मद्रास 6. राजस्थान 6. कच्छ
7. उड़ीसा 7. सौराष्ट्र 7. मणिपुर
8. पंजाब 8. त्रावणकोर - कोचीन 8. त्रिपुरा
9. उत्तर प्रदेश   9. विंध्य प्रदेश

Thoughts on Linguistic States Book by Dr Bhimrao Ramji Ambedka    संविधान के अनुच्छेद 3 के द्वारा संसद को नए राज्यों के गठन की शक्ति प्रदान की गई है। यह इसलिए किया गया है कि भाषायी आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के लिए जो भारी मांग की जा रही थी, उसके लिए समय नहीं था ।

 

     लगातार की जा रही इस मांग के अनुसार प्रधानमंत्री ने इस प्रश्न की जांच के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग की नियुक्ति की। राज्य पुनर्गठन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में निम्नलिखित राज्यों के गठन की सिफारिश की:

प्रतावित नए राज्य

राज्य का नाम क्षेत्रफल
(वर्ग मीलों में)
जनसंख्या
(करोड़ों में)
भाषाएं
1. मद्रास 50,170 3.00 तमिल
2. केरल 14,980 1.36 मलयालम
3. कर्नाटक 72,730 1.90 कन्नड
4. हैदराबाद 45,300 1.13 तेलुगु
5. आंध्र 64,950 2.09 तेलुगु
6. बंबई 151,360 4.02 मिश्रित
7. विदर्भ 36,880 0.76 मराठी
8. मध्य प्रदेश 171,200 2.61 हिन्दी
9. राजस्थान 132,300 1.60 राजस्थानी
10. पंजाब 58,140 1.72 पंजाबी
11. उत्तर प्रदेश 113,410 6.32 हिन्दी
12. बिहार 66,520 3.82 हिन्दी
13. पश्चिम बंगाल 34,590 2.65 बंगला
14. असम 89,040 0.97 असमिया
15. उड़ीसा 60,140 1.46 उड़िया
16. जम्मू व कश्मीर 92,780 0.14 कश्मीरी

     महत्वपूर्ण बात राज्यों के आकार की तुलना है।

    यदि जनसंख्या को मापदंड माना जाए तो परिणाम निम्नलिखित होगा :

     आठ राज्य ऐसे हैं, जिनमें से प्रत्येक की जनसंख्या 1 और 2 करोड़ के बीच है।

     चार राज्यों की जनसंख्या 2 और 4 करोड़ के बीच है।

     एक राज्य की जनसंख्या 4 करोड़ से ऊपर है।

     एक राज्य ऐसा है, जिसकी संख्या 6 करोड़ से ऊपर है।

    इससे जो परिणाम निकलता है, वह विलक्षण है। स्पष्ट है, आयोग का यह विचार था कि राज्य के आकार का कोई महत्व नहीं है ओर उन राज्यों के आकार की समानता का कोई महत्व नहीं, जिन्हें मिलाकर परिसंघ गठित होगा।

    यही आयोग की पहली और सबसे भयंकर भूल थी, जिसको यदि समय रहते नहीं सुधारा गया तो वह भारत के लिए बहुत महंगी पड़ेगी ।

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