UP में सभी फ़सलो पर MSP क्यो नहीं ?

डॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी 

    बलीराजा पार्टी आने वाले २०२७ के विधानसभा चुनाव किसान के मुद्दे पर लड़ेंगी । केंद्र और राज्य सरकार एकही पार्टी की होने के बावजूद भी किसानों की सभी फसलो पर MSP क्यो नही ?  बलीराजा पार्टी उत्तर प्रदेश के किसानों की सभी फ़सलो को MSP में लायेगी ।

    उत्तर प्रदेश में APMC (कृषि उपज मंडी समिति) से किसानों की मुख्य शिकायतें मंडी में समय पर खरीद न होना, लंबी प्रतीक्षा, भुगतान में देरी, आढ़ती/बिचौलियों पर निर्भरता और MSP पर पूरी फसल न खरीदे जाने से जुड़ी हैं।

UP Mein Sabhi Faslon Par MSP Kyun Nahi

किसानों की मुख्य समस्याएँ

१)खरीद केंद्रों पर देरी: कई जिलों में धान खरीद शुरू होने के बावजूद कुछ केंद्रों पर खरीद शून्य रही; इसके कारण नमी की समस्या और मिलरों से कुटाई का समझौता न होना बताया गया।

२)MSP की सीमित पहुँच: यूपी में बड़ी संख्या में किसान आवेदन करते हैं, लेकिन खरीद क्षमता और केंद्रों की व्यवस्था के कारण सभी को MSP पर बिक्री का लाभ नहीं मिल पाता।

३)बिचौलियों की भूमिका: कई जगह फसल आढ़तियों के जरिए बिकती है, जिससे किसान को सीधे न्यायसंगत दाम और पारदर्शी वजन/गुणवत्ता परीक्षण नहीं मिल पाता।[jansatta]

४)मंडी शुल्क और प्रक्रिया: APMC मंडी में बिक्री के लिए पंजीकरण, वजन, ग्रेडिंग और शुल्क से जुड़ी प्रक्रियाएँ छोटे किसानों के लिए समय व लागत बढ़ा सकती हैं।

५)खरीद के बाहर दबाव: जब मंडी में उपज नहीं उठती या दाम कम होते हैं, तो किसानों को निजी खरीदारों पर निर्भर होना पड़ता है, जहाँ MSP की गारंटी नहीं होती।

यूपी में खरीप फसल

     उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ सीजन में धान की खरीद के लिए बड़ा लक्ष्य रखा था और सैकड़ों खरीद केंद्र संचालित किए; फिर भी कुछ जिलों में शुरुआती दौर में खरीद धीमी रही और किसानों को परेशानी हुई।  उदाहरण के लिए, लखीमपुर खीरी के पलिया मंडी के कुछ केंद्रों पर 13 अक्टूबर तक खरीद शून्य दर्ज हुई थी।

किसान क्या करे

१)मंडी/खरीद केंद्र पर जाने से पहले अपना पंजीकरण, टोकन और खरीद शेड्यूल जाँचें।

२)फसल की नमी और गुणवत्ता मानकों के अनुसार तैयारी करें, क्योंकि नमी अधिक होने पर खरीद रुक सकती है।

३)वजन स्लिप, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और भुगतान रसीद अवश्य रखें।

४)खरीद में देरी या अनियमितता होने पर जिला मंडी प्रशासन, खाद्य एवं रसद विभाग या जनसुनवाई पोर्टल से शिकायत करें।

हर फसल पर MSP क्यो नहीं ?

     यूपी में हर फसल पर MSP नहीं मिलती, और जिन फसलों पर MSP घोषित है, उनकी वास्तविक सरकारी खरीद भी हर जगह व हर साल नहीं होती। भारत सरकार केवल 22 अधिसूचित फसलों के लिए MSP घोषित करती है; इनमें अनाज, दालें, तिलहन, कपास, जूट और नारियल शामिल हैं।

MSP की स्थिति

१)गेहूँ और धान यूपी में सबसे बड़ी MSP-खरीद वाली फसलें हैं। उदाहरण के लिए, 2025-26 में धान की MSP ₹2,369 प्रति क्विंटल (सामान्य) और ₹2,389 प्रति क्विंटल (Grade A) थी, तथा लगभग 12.8 लाख किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया।

२)गेहूँ, चना और मसूर की MSP खरीद यूपी में 8 जुलाई 2026 तक बढ़ाई गई थी, ताकि मंडी भीड़, तुलाई या मौसम की दिक्कत से किसान MSP से वंचित न हो।

३)गन्ना को MSP की जगह FRP (Fair and Remunerative Price) मिलता है, जिसे केंद्र तय करता है; राज्य कई बार इससे अधिक SAP (State Advised Price) भी देता है। इसलिए गन्ने के लिए सामान्य अर्थों में “MSP” नहीं कहा जाता।

४)सब्ज़ियाँ, फल, आलू, प्याज, दूध, मछली, पशुचारा और कई अन्य बागवानी/डेयरी उत्पादों पर MSP लागू नहीं है। इनकी कीमतें मुख्य रूप से बाज़ार में तय होती हैं।

MSP घोषित फसलें

     MSP वाली 22 फसलों में धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, रागी, अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, निगर, कपास, गेहूँ, जौ, चना, मसूर, सरसों, कुसुम, जूट और नारियल शामिल हैं।

     MSP घोषित होना और MSP पर खरीद होना एक नहीं है। यूपी में सरकारी खरीद मुख्य रूप से गेहूँ व धान पर केंद्रित है; दालों और तिलहनों की खरीद सीमित या शर्तों के साथ होती है।  इसके अलावा, MSP लाभ पाने के लिए किसान को पंजीकरण/Farmer ID और निर्धारित खरीद केंद्र पर फसल की निर्धारित गुणवत्ता के साथ पहुँचना होता है।