घुसपैठिया का जुमला, SIR का वोटरो पर हमला !

- डॉ. महेंद्र धावडे, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी 

     प्रख्यात अर्थशास्त्री और राजनीतिक विश्लेषक डॉ. परकला प्रभाकर ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा चलाए जा रहे 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision - SIR) अभियान को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने देश के चुनावी और राजनीतिक ढांचे को बचाने के लिए चुनाव आयोग के खिलाफ एक बड़े जन आंदोलन (Mass Agitation) का आह्वान किया है।

     मीडिया संस्थान The Wire को दिए एक इंटरव्यू में डॉ. प्रभाकर ने कहा कि अब समय आ गया है जब भारत के चुनावी और राजनीतिक तंत्र को पूरी तरह नष्ट होने से बचाने के लिए चुनाव आयोग के खिलाफ एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जाए।उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची से हटाए जा रहे नामों को लेकर पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही अपनानी होगी।

Ghuspaithiya ka Jumla SIR ka Voteron par Hamla

     हैदराबाद में पी.वी. नरसिम्हा राव मेमोरियल लेक्चर के दौरान उन्होंने चेतावनी दी थी कि इस विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से देश के करीब 16 करोड़ लोगों के मताधिकार छीनने का खतरा है।उनके अनुसार, यह अभियान कुछ इस तरह काम कर रहा है जिससे अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हो सकते हैं, जिससे देश केवल 'चुनिंदा लोगों का लोकतंत्र' बनकर रह जाएगा।

     प्रभाकर ने वोटर लिस्ट में किए जा रहे बदलावों और बड़े पैमाने पर कट रहे नामों की तुलना एक "बिना खून-खराबे के राजनीतिक जनसंहार" से की है।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रक्रिया को नहीं रोका गया, तो यह भारत में लोकतांत्रिक अधिकारों और भारतीय राष्ट्र के मूल स्वरूप के लिए बहुत बड़ा खतरा बन जाएगा।

अपारदर्शी प्रक्रिया -

     उन्होंने आरोप लगाया कि जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत चुनाव आयोग से यह पूछा गया कि मतदाताओं के नाम किस आधार पर और किन नियमों के तहत हटाए जा रहे हैं, तो आयोग की तरफ से कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं मिला।डॉ. प्रभाकर ने वर्तमान चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे बेहद पक्षपाती बताया है और कहा है कि देश का भरोसा चुनाव प्रणाली से लगातार कम हो रहा है।

     भाजपा SIR को “घुसपैठियों और अवैध वोटरों को हटाने” की प्रक्रिया बता रही है, जबकि विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इसके जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। इसी मुद्दे पर राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को “वोट चोरी आयोग” तक कहा है।

विवाद क्या है

     SIR का अर्थ Special Intensive Revision यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। चुनाव आयोग के अनुसार इसका उद्देश्य मतदाता सूची को सत्यापित और अद्यतन करना है।

     भाजपा का आरोप है कि विपक्ष SIR का विरोध करके कथित घुसपैठियों और अवैध वोटरों को बचाना चाहता है।

     कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का दावा है कि प्रक्रिया में दस्तावेज़ों और सत्यापन की कठिन शर्तों के कारण गरीब, प्रवासी, अल्पसंख्यक और वास्तविक भारतीय नागरिकों के नाम भी हट सकते हैं।

     महाराष्ट्र में ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम शामिल न किए जाने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” का आरोप लगाया; अधिकारियों के अनुसार इनमें मृतक, स्थान बदल चुके और फॉर्म जमा न कर पाने वाले लोग भी शामिल थे।

“जुमला” और “वोटरों पर हमला”

     “घुसपैठिए” शब्द को विपक्ष राजनीतिक जुमला और मतदाताओं को डराने का तरीका बता रहा है, जबकि भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव का मुद्दा कह रही है। इसलिए “SIR वोटरों पर हमला है या अवैध नामों पर कार्रवाई”—यह अभी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय है; अंतिम निष्कर्ष के लिए दावों, आपत्तियों और अपीलों के आधिकारिक आंकड़े देखना जरूरी होगा।

     चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) अभियान के तहत देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13.37 करोड़ से अधिक वोटरों के नाम काटे जा चुके हैं।

SIR में नाम कटने का ब्यूरो

       कुल कटौती- 30 राज्यों/UTs में मिलाकर 13.37 करोड़+ नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए।

     अकेले तीसरे चरण के 17 प्रशासनिक इकाइयों में 6.15 करोड़ नाम हटाए गए।

पहले चरण (12 राज्य/UT) में लगभग 6.5–7.2 करोड़ और दूसरे चरण में भी बड़ी संख्या में नाम कटे; कुल मिलाकर 11–13 करोड़ के आसपास की कटौती बताई गई है।

कुछ प्रमुख राज्यों में कटौती (उदाहरण)

 उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा, लगभग 2.89 करोड़ नाम हटाए गए।

 तमिलनाडु: ~97 लाख,गुजरात: ~73.73 लाख,पश्चिम बंगाल: ~58.20 लाख,मध्य प्रदेश: ~42.74 लाख,राजस्थान: ~41.85 लाख,दिल्ली: ड्राफ्ट लिस्ट से 47.56 लाख नाम हटाए गए, जो 32.7% की कटौती दर है (सबसे ऊंची दरों में से एक)।

 घुसपैठियों' की संख्या से नदारद

     भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत "अवैध घुसपैठियों" (Illegal Infiltrators) की पहचान करने को लेकर अब तक कोई भी आधिकारिक या सटीक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।चुनाव आयोग ने इस अभियान की शुरुआत में कहा था कि इसका एक मकसद मतदाता सूची से विदेशी या अवैध प्रवासियों के नाम हटाना भी है।लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स, The Wire की पड़ताल और विपक्ष के दावों के अनुसार, आयोग ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वास्तव में कितने विदेशी नागरिकों या घुसपैठियों को पकड़ा गया या उनके नाम काटे गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को अनदेखी

     मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इस अभियान की वैधानिकता को सही ठहराया था।कोर्ट ने अपने फैसले में चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया था कि वे मतदाता सूची की जांच के दौरान पहचाने गए ऐसे व्यक्तियों (जो भारतीय नागरिक नहीं हैं) की सूची गृह मंत्रालय (MHA) के साथ साझा करें। हालांकि, इस पर अभी तक कोई सार्वजनिक डेटा सामने नहीं आया है।विपक्ष का दावा है कि 'घुसपैठिया पकड़ने' की आड़ में लाखों वैध भारतीय नागरिकों के नाम ही सूची से उड़ा दिए गए हैं।

     अंत में SIR का मकसद क्या है और लगभग १४ करोड नाम काटने का लाभ चुनाव आयोग किसे पहुचाना चाहता है? इन सवालो का जवाब ECI या  सर्वोच्च न्यायालय के पास है ?