RSS और BJP के लिये चुनौती

डॉ. महेंद्र धावडे, नागपूर, बलीराजा शोध संस्था

छात्र आंदोलन (Students Andolan) ने वर्तमान में भाजपा (BJP) और आरएसएस (RSS) के राजनीतिक और वैचारिक तंत्र के सामने एक गंभीर चुनौती और संकट खड़ा कर दिया है। देश में NEET परीक्षा धांधली और लगातार होते पेपर लीक विवाद के बाद शुरू हुए इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन ने सत्ता पक्ष को बैकफुट पर ला दिया है, जिसके परिणामस् स्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा भी देना पड़ा है।

यह लेख विश्लेषण करता है कि कैसे यह छात्र आंदोलन भाजपा और संघ परिवार के लिए एक बड़ा राजनीतिक खतरा बनता जा रहा था

1. वैचारिक और नीतिगत पकड़ पर चोट

आरएसएस के प्रभाव को चुनौती: विपक्ष और छात्र संगठनों का आरोप है कि आरएसएस ने देश के शिक्षा तंत्र को अपनी विचारधारा के अनुसार बदलने की कोशिश की है। पेपर लीक और प्रशासनिक विफलताओं के बाद इस "संस्थागत नियंत्रण" पर सीधे सवाल उठ रहे हैं।

Gen Z Student Protests RSS BJP Ke Liye Naya Political Challenge


2. असंतोष की गूंज

आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में बयान दिया कि आज के युवाओं को 'डिक्टेशन' (आदेश) नहीं बल्कि 'डिस्कशन' (संवाद) की जरूरत है। यह दर्शाता है कि संघ भी युवाओं के इस गहरे असंतोष और गुस्से को भांप चुका है।


3. राष्ट्रवाद के नैरेटिव का कमजोर होना

पारंपरिक हथकंडों की विफलता: आम तौर पर भाजपा विरोधी आंदोलनों को राजनीतिक या सांप्रदायिक रंग देकर काउंटर करती रही है। लेकिन यह आंदोलन सीधे छात्रों के भविष्य, रोजगार और करियर से जुड़ा है।


4. दबाव की राजनीति

देश के लाखों भविष्य के डॉक्टरों और इंजीनियरों के इस गुस्से को "देशविरोधी" बताना भाजपा के लिए भारी पड़ रहा है, जिससे उनका कोर नैरेटिव कमजोर हुआ है।


5. 'एंटी-नेशनल' का ठप्पा लगाने में नाकामी

गैर-राजनीतिक शुरुआत: यह आंदोलन किसी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी द्वारा नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और स्वतंत्र युवा समूहों (या CJP आंदोलन) द्वारा स्वतःस्फूर्त तरीके से शुरू हुआ।


6. विपक्ष को मिला हथियार

इस आंदोलन ने विपक्ष (विशेषकर राहुल गांधी और 'इंडिया' गठबंधन) को संसद से लेकर सड़क तक भाजपा-आरएसएस को घेरने का एक अचूक मौका दे दिया है। विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य पर सीधा हमला बताकर भुना रहा है।


7. चुनावी राजनीति और वोट बैंक को खतरा

युवा वोट बैंक में सेंध: भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, और 2014 के बाद से भाजपा की बड़ी जीत में युवा मतदाताओं (Gen-Z और मिलनियल्स) की अहम भूमिका रही है।


8. भविष्य का संकट

बार-बार रद्द होती परीक्षाओं और पुलिसिया कार्रवाई (लाठीचार्ज और आंसू गैस) के कारण युवाओं का यह बड़ा वर्ग अब भाजपा के सुशासन के दावों पर सवाल उठा रहा है, जो आने वाले राज्यों के चुनावों में भाजपा के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।

चुनौती का क्षेत्र भाजपा -आरएसएस पर प्रभाव

  • प्रशासनिक साख: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सरकार की विफलता को दर्शाता है।

  • युवाओं का भरोसा: रोजगार और परीक्षा सुरक्षा के मोर्चे पर गहरी नाराजगी।

  • संगठनात्मक रणनीती: RSS के भीतर भी भाजपा की आईटी सेल और रणनीति को लेकर अंदरूनी मतभेद उभरे हैं।


9. निष्कर्ष

यह छात्र आंदोलन केवल एक परीक्षा में हुई धांधली का विरोध नहीं है, बल्कि यह भाजपा-आरएसएस के उस तंत्र के खिलाफ युवाओं की सामूहिक आवाज बन चुका है जो जवाब देही से बचता आया है। यदि सरकार ने जल्द ही शिक्षा व्यवस्था में बड़े संरचनात्मक सुधार नहीं किए और युवाओं के भरोसे को बहाल नहीं किया, तो यह आंदोलन भाजपा के लिए सत्ता के गलियारों में सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा साबित था यह उन्हे एक रात मे समज मे आया. जब उनका ध्यान देश के हर राज्य पर गया और देखा की अंदोलन बढ रहा और विदेश में भी HSS को नुकसान हो सकता है यह मुख्य बिंदू है प्रधान का त्यागपत्र. यह आंदोलन कोई संस्था या पार्टी का विजय नही किंतु १२ वर्ष के दमनकारी निती का छात्र का आवाज था.


डॉ. महेंद्र धावडे, नागपूर, बलीराजा शोध संस्था