28 जून को चंद्रपुर में ऐतिहासिक ओबीसी महामोर्चा - जनगणना में ओबीसी कॉलम की मांग:

राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन की पहल पर संयुक्त सहविचार बैठक संपन्न; सांसद धानोरकर समेत अनेक मान्यवरों की उपस्थिती

     चंद्रपुर : ओबीसी समाज की जातिवार जनगणना की न्यायोचित मांग और महाराष्ट्र सरकार द्वारा 14 मई 2026 को लिए गए विवादास्पद निर्णय को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन की पहल पर एक महत्वपूर्ण संयुक्त सहविचार बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक रविवार, 24 मई 2026 को चंद्रपुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के स्व. दादासाहेब कन्नमवार सभागृह में संपन्न हुई।

June 28 OBC Mahamorcha Urges Government to Reverse May 14 Decision

     इस बैठक में ओबीसी, विजाभज, विमाप्र, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे। सभी ने एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का दृढ़ निश्चय व्यक्त किया।


14 मई का निर्णय क्या है? — समझिए पूरा मामला

     इस आंदोलन की जड़ में महाराष्ट्र सरकार का 14 मई 2026 का एक अत्यंत विवादास्पद निर्णय है। इस निर्णय के अनुसार —

     आयु, शैक्षिक योग्यता, अनुभव या परीक्षा में बैठने के अवसर जैसी रियायतें प्राप्त आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों की नियुक्ति अब केवल आरक्षित श्रेणी की सीटों पर ही होगी। ऐसे उम्मीदवार सामान्य (खुले) वर्ग की सीटों पर दावा नहीं कर सकेंगे।

     यह निर्णय ओबीसी, एससी, एसटी और अन्य आरक्षित वर्ग के लाखों मेधावी विद्यार्थियों और नौकरी के इच्छुक युवाओं के लिए अत्यंत घातक बताया जा रहा है। इससे बहुजन समाज के प्रतिभावान उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने के अधिकार से वंचित किया जाएगा।

     महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने इस निर्णय को केवल स्थगित किया है — रद्द नहीं किया। सरकार ने विधि और न्यायालय से मत मांगा है लेकिन यह निर्णय अभी भी कानूनी रूप से अस्तित्व में है। संगठनों की मांग है कि इसे तत्काल और पूरी तरह रद्द किया जाए।


28 जून को चंद्रपुर में महामोर्चे का ऐतिहासिक प्रस्ताव

     बैठक में राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन के महासचिव सचिन राजुरकर ने दो अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किए जो सर्वसम्मति से पारित हुए —

प्रस्ताव 1: रविवार, 28 जून 2026 को चंद्रपुर में भव्य महामोर्चा आयोजित किया जाएगा। यह मोर्चा 14 मई के अन्यायपूर्ण निर्णय को रद्द करने और ओबीसी जनगणना राजपत्र की मांग को लेकर होगा।

प्रस्ताव 2: जब तक जनगणना आयुक्त ओबीसी की जातिवार जनगणना के लिए भारत सरकार का अधिकृत राजपत्र जारी नहीं करते, तब तक जनगणना में असहयोग जारी रहेगा।

     राजुरकर ने कहा — "यह लड़ाई केवल ओबीसी की नहीं है, यह पूरे बहुजन समाज के अधिकारों की लड़ाई है। जब तक हमें न्याय नहीं मिलता, हम पीछे नहीं हटेंगे।"


सांसद प्रतिभा धानोरकर — "संघर्ष जारी रहेगा"

     इस महत्वपूर्ण बैठक में सांसद प्रतिभा धानोरकर की उपस्थिति ने आंदोलन को एक नई ताकत दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा —

     "जब तक जनगणना पत्रक में ओबीसी का स्वतंत्र कॉलम नहीं आता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। राज्य सरकार को चाहिए कि वह बहुजन समाज पर अन्याय करने वाला 14 मई का निर्णय तत्काल वापस ले।"

     एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस आंदोलन को खुला समर्थन देने से समाज के कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी बढ़ा।


डॉ. बबनराव तायवाडे का अध्यक्षीय भाषण

     राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. बबनराव तायवाडे ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा —

     "आज इस बैठक में जो एकजुटता दिखी, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। भविष्य में भी बहुजन समाज में इसी प्रकार की एकता बनी रहनी चाहिए। बिखरे हुए समाज को न्याय नहीं मिलता — एकजुट होकर लड़ने से ही अधिकार मिलते हैं।"

     उन्होंने सभी समाज घटकों से 28 जून के महामोर्चे में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया।


ओबीसी जनगणना राजपत्र की मांग क्यों जरूरी है?

राजपत्र (Gazette Notification) यानी सरकार की अधिकृत और कानूनी घोषणा। यदि ओबीसी जनगणना के लिए राजपत्र जारी हो जाए तो —

  • जनगणना पत्रक में ओबीसी का स्वतंत्र कॉलम अधिकृत रूप से जुड़ेगा
  • ओबीसी की वास्तविक जनसंख्या आधिकारिक रूप से दर्ज होगी
  • राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक आरक्षण में ओबीसी को उनकी जनसंख्या के अनुपात में उचित हिस्सा मिलेगा
  • सरकारी योजनाओं का लाभ सही अनुपात में ओबीसी समाज तक पहुंचेगा

केवल मौखिक आश्वासन पर संगठनों का भरोसा नहीं है — इसीलिए अधिकृत राजपत्र जारी करना ही एकमात्र स्वीकार्य समाधान है।


बैठक में उपस्थित प्रमुख मान्यवर

     इस ऐतिहासिक सहविचार बैठक में निम्नलिखित प्रमुख जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थित थे —

     जनप्रतिनिधि व पदाधिकारी: सांसद प्रतिभा धानोरकर, महानगरपालिका उपाध्यक्ष प्रशांत दानव, स्थायी समिति अध्यक्ष मनस्वी संदीप गीन्हे, पार्षद राजेश अडूर, पप्पू देशमुख, प्रमोद बोरिकर, केशव तिरानिक, ॲड. दत्ता हजारे, धानोजे कुनबी समाज के अध्यक्ष श्रीधर मालेकर

     नगरसेवक व नगरसेविका: वसंत देशमुख, आकाश साखरकर, भालचंद्र दानव, अभिषेक डोईफोडे, रामनरेश यादव, राहुल चौधरी तथा नगरसेविका सुनंदा धोबे, मनीषा बोबडे, श्वेता लांडगे

     राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन: महासचिव सचिन राजुरकर, अध्यक्ष डॉ. बबनराव तायवाडे, कार्याध्यक्ष प्रा. शेषराव येलेकर एवं अनेक पदाधिकारी

     इसके अलावा ओबीसी, विजाभज, विमाप्र, अनुसूचित जाति और जनजाति समाज के सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।


कार्यक्रम संचालन

कार्यक्रम का संचालन कृष्णा मेश्राम ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन रामदास कामडी ने किया।


28 जून के महामोर्चे का संदेश

28 जून 2026 को चंद्रपुर में होने वाला यह महामोर्चा बहुजन समाज की एकजुटता और न्याय की मांग का प्रतीक होगा। इस मोर्चे से सरकार को दो स्पष्ट संदेश दिए जाएंगे —

1. 14 मई का अन्यायपूर्ण निर्णय तत्काल रद्द करो 2. ओबीसी जनगणना के लिए राजपत्र जारी करो — अन्यथा असहयोग जारी रहेगा

पूरे विदर्भ और महाराष्ट्र से लाखों बहुजन बंधुओं से इस महामोर्चे में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया गया है।


? आह्वान: 28 जून को चंद्रपुर महामोर्चे में भारी संख्या में भाग लें — बहुजन समाज के अधिकारों के लिए एकजुट होकर खड़े रहें!