ओबीसी को मिलेगा न्याय ! - डॉ. साल्वे ने दिया आश्वासन

     नागपुर । जहां पूरे देश में हर जगह ओबीसी की जनगणना की मांग हो रही है, वहीं एड डॉ. अंजलि साल्वे ने विश्वास जताया है कि एड डॉ. द्वारा दायर याचिका से ओबीसी को न्याय मिलेगा. बिहार में ओबीसी की अलग जनगणना शुरू की गई और उसके बाद देश के अन्य राज्यों में भी ओबीसी की अलग जनगणना की दिशा में कदम उठाए गए. महाराष्ट्र में भी एड डॉ. अंजलि साल्वे ने 2019 से ओबीसी की स्वतंत्र जनगणना के लिए विभिन्न स्तरों पर न केवल विरोध किया, बल्कि ओबीसी जनगणना प्रस्ताव को विधानमंडल में पारित कर केंद्र को भेजने की भी मांग की. सरकार, लेकिन केंद्र ने इसे खारिज कर दिया. डॉ. साल्वे ओबीसी जनगणना की लड़ाई को कई सांसदों के माध्यम से संसद तक ले गए और सुप्रीम कोर्ट में भी अपनी लड़ाई शुरू की. जनगणना अधिनियम के अनुसार, सरकार द्वारा देश की राज्यवार जनसंख्या के साथ- साथ वर्ग, जाति, उपजाति और इसी तरह की जानकारी इकट्ठा करने की उम्मीद की जाती है और उसके आधार पर सरकारी योजनाएं बनाई जाती हैं.

OBC_will_get_justice_-_Dr_Salve_assured      लोगों को नियोजित, निर्धारित, योजनाबद्ध और कार्यान्वित किया जाना है. डॉ. साल्वे ने राय व्यक्त की है कि इन तत्वों के लिए योजना बनाई जा रही है. पिछड़े वर्गों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन सरकार उनकी सटीक संख्या के बारे में कोई ठोस रुख नहीं अपना रही है. भारतीय राज्य संविधान और जनगणना अधिनियम के अनुसार, अन्य पिछड़े वर्गों की जनगणना होने की उम्मीद है. अनुसूचित जाति एवं जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग की भी अलग से जनगणना करायी जाये, ऐसी अपेक्षा है. दिवंगत वकील द्वारा दायर 2001 और 2011 की याचिका को पुनर्जीवित करने के लिए सितंबर 2019 में डॉ. वकील अंजलि साल्वे को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त किया गया. यह अर्जी बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में दायर की गई थी, उनके सहयोगी वकील अनिल धवास हाई कोर्ट में पेश हुए थे.

     ओबीसी जनगणना की अदालती लड़ाई को मजबूत बनाने के लिए एड डॉ. अंजलि साल्वे कुछ कानूनी दांवपेचों के तहत भारतीय पिछड़ा (ओबीसी) उत्पीडित संगठन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता अर्जी दाखिल की गई है. अन्य राज्य ओबीसी जनगणना मामलों के साथ-साथ डॉ. वो एक साथ सुप्रीम कोर्ट में. साल्वे ने कहा. इस आवेदन में, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से प्रार्थना की है कि जनगणना के प्रश्नावली पैटर्न में ओबीसी तत्वों को शामिल करने तक प्रस्तावित जनगणना पर रोक लगाने के अलावा, इस संबंध में कोई अन्य आदेश जारी किया जाए जो उचित समझा जाए. ओबीसी की अलग से जनगणना कराने की मुहिम चलाने वाले डॉ. साल्वे के प्रयास, उन्होंने कहा कि 'जनगणना 2021 में ओबीसी (वीजे, एनटी, डीएनटी, एसबीसी) के लिए कोई कॉलम नहीं है, इसलिए हम जनगणना में भाग नहीं ले रहे हैं.' पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार द्वारा मंडल आयोग की सिफारिशों के अनुसार ओबीसी के लिए लागू किए गए आरक्षण के ऐतिहासिक फैसले के बाद डॉ. एड अंजलि साल्वे का ओबीसी जनगणना 2021, न्यायालय, संसद, विधानमंडल, पति लावा अभियान ऐतिहासिक हो गया है. प्रस्तावित जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग की अलग से गणना किये जाने की स्थिति में उम्मीद है कि अब तक उपेक्षित रहे इन वंचित समूहों को जनगणना में उचित स्थान मिलेगा और आबादी के अनुपात में उन्हें उनका हक मिलेगा.