राज्य सरकार से कहा, सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं के निराकरण के लिए जल्दी कार्यवाही करें
जबलपुर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी आरक्षण देने के मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं के निराकरण के लिए जल्दी कार्यवाही करे। जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने ओबीसी को 14 फीसदी आरक्षण देने के अंतरिम आदेश पर यथास्थिति रखते हुए, अगली सुनवाई 23 जनवरी 2023 को निर्धारित की है ।
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने से पहले कोई आदेश नहीं दे सकते । बुधवार को अधिवक्ता आदित्य संघी, अंशुमान सिंह, सुयष ठाकुर व अन्य द्वारा याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्षा रखा गया। वहीं ओबीसी के विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक शाह ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित चार याचिकाओं में से एक याचिका वापस वापस ले ली है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2022 को ईडब्ल्यूएस आरक्षण के मामले में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा मान्य किया है। इसे देखते हुए 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण किया जाना संवैधानिक है। राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल हरप्रीत रूपराह हाजिर हुए। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरणों की त्वरित सुनवाई करने के कार्यवाही कर हाईकोर्ट को अवगत कराएं।