न जेब में रिकॉर्ड, न कंप्यूटर में कोई नाम है, घुसपैठियों के नाम पर बस राजनीति चमकाना है।

डॉ. महेंद्र धावडे, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी 

     भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2024 तक भारत से बांग्लादेश भेजे गए (formally deported) बांग्लादेशी नागरिकों की कुल संख्या लगभग 3,568 थी। 2025 और 2026 की शुरुआत में अभियान तेज होने के बाद और 3,700 से अधिक लोगों को निकाले जाने की रिपोर्ट है; इसलिए 2014 से 2026 तक का अनुमानित कुल आंकड़ा लगभग 7,300 या 7500 हो सकता है ।

     2014 से 2024 के बीच भारत से कुल 3,568 बांग्लादेशी नागरिकों को औपचारिक रूप से डिपोर्ट (निर्वासित) किया गया था ।

Ghuspaithiyon Ke Naam Par Rajniti Record Kahan Hai

     गृह मंत्रालय द्वारा संसद में साझा किए गए डेटा के अनुसार, 2014 के बाद से औपचारिक डिपोर्टेशन की संख्या में भारी कमी आई थी. तुलनात्मक रूप से, इससे पहले के कालखंड (2005-2013) में यह संख्या काफी अधिक (82,255) दर्ज की गई थी।

     2025-2026 में बढ़ी हुई सक्रियता- जैसा कि आपने उल्लेख किया, हाल के महीनों और वर्षों में सीमा सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर चलाए गए विशेष अभियानों के कारण धरपकड़ और निर्वासन की गति तेज हुई है। खबरों के अनुसार, अकेले पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य राज्यों से लगभग 4,800 से 5,000 अवैध प्रवासियों को वापस भेजा गया है।इस प्रकार, पिछले दशक के आधिकारिक रिकॉर्ड (3,568) और 2025-2026 के हालिया अभियानों में डिपोर्ट किए गए नागरिकों को जोड़कर कुल संख्या लगभग 7,500 से अधिक तक पहुंच जाती है।

     गृह मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस दशक के दौरान प्रतिवर्ष औपचारिक रूप से डिपोर्ट किए गए बांग्लादेशी प्रवासियों की संख्या 1,000 से भी कम रही और कुछ वर्षों में यह दहाई के अंक तक सिमट गई थी।

१)वर्ष 2014: 989 नागरिक (२)वर्ष 2015: 474 नागरिक (३)वर्ष 2016: 308 नागरिक (४)वर्ष 2017: 51 नागरिक (६)अकेले मुंबई शहर के पुलिस डेटा के अनुसार पूरे 2024 में केवल 164 (७)वर्ष 2025 में 1,061 नागरिक,(8)वर्ष 2026 मे 1,066 नागरिक,

वर्ष 2018 से 2024: शेष वर्षों में यह संख्या सालाना औसतन 150 से 300 के बीच रही।

     देशव्यापी स्तर पर (विशेषकर पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और महाराष्ट्र के डिटेंशन कैंपों से) चलाए गए अभियानों को मिलाकर इन दो वर्षों में 3,700 से अधिक अतिरिक्त बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजा जा चुका है।

महाराष्ट्र का कोम्बिंग ऑपरेशन्स

     १)महाराष्ट्र ने जिला स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट (DM) करते हैं और इसमें पुलिस अधीक्षक (SP) तथा मुख्य लोक अभियोजक शामिल होते हैं।

     २)कई बार अवैध विदेशी नागरिक अपने ऊपर कोई छोटा-मोटा आपराधिक मामला दर्ज करवा लेते थे ताकि जब तक केस चले, वे डिपोर्टेशन से बचे रहें. नई टास्क फोर्स ऐसे मामलों की कड़ाई से समीक्षा करती है ताकि उन्हें कानूनी केस का बहाना बनाकर रुकने न दिया जाए।

     ३)मुंबई और राज्य के अन्य संवेदनशील इलाकों के झोपड़पट्टियों और निर्माण स्थलों पर अवैध प्रवासियों की धरपकड़ के लिए पुलिस, खुफिया विभाग और आव्रजन ब्यूरो (FRRO) को मिलाकर 6 सदस्यीय कोर टास्क फोर्स सक्रिय की गई है, जो सीधे गृह विभाग के प्रधान सचिव के अंतर्गत काम कर रही है।

     महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम द्वारा विधानसभा/परिषद में दी गई जानकारी के मुताबिक, खुफिया-आधारित सघन कोम्बिंग ऑपरेशन्स के कारण वर्ष 2025 में ही कुल 2,376 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को ट्रेस कर सीधे बीएसएफ (BSF) के जरिए डिपोर्ट किया गया। यह पिछले चार वर्षों के संयुक्त आंकड़ों से चार गुना अधिक था।

     कोम्बिंग ऑपरेशन्स के दौरान केवल लोग ही नहीं मिले, बल्कि पुलिस और टास्क फोर्स ने 42,000 से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, जाली आधार कार्ड और पैन कार्ड को भी ट्रैक करके रद्द किया है।

SIR - 2025-2026

चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों में से अवैध विदेशी घुसपैठियों के नाम हटाने के लिए 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया गया। अक्टूबर 2026 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, 6 प्रमुख राज्यों (जहां करीब 9.86 करोड़ मतदाता हैं) की जांच पूरी होने के बाद मतदाता सूची में केवल 1,600 नागरिकों की पहचान "विदेशी नागरिक/अवैध प्रवासी" के रूप में की जा सकी है।

विदेश मंत्रालय MEA रिकॉर्ड 2026

     विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयानों के अनुसार, भारत ने हाल ही में बांग्लादेश सरकार को 2,680 से अधिक ऐसे अवैध प्रवासियों के मामले सौंपे हैं, जिन्हें भारतीय एजेंसियों ने हिरासत में लिया है। इनके आधिकारिक डिपोर्टेशन (निर्वासन) के लिए बांग्लादेश सरकार से उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि (Nationality Verification) होने का इंतज़ार किया जा रहा है।

  FT- देश भर के ट्रिब्यूनल्स में वर्तमान में 1 लाख से अधिक ऐसे मामले चल रहे हैं, जहां संदिग्ध नागरिकों के पास भारतीय आधार/पैन तो हैं, लेकिन उनके माता-पिता के 'विरासत दस्तावेज़' (Legacy Documents) या स्कूल सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए हैं।

वोटर लिस्ट से नाम हटाने और 'घुसपैठिया होने' में बड़ा अंतर

     हाल ही में चुनाव आयोग के विशेष अभियान (SIR) के तहत देश भर की वोटर लिस्ट से लगभग 13 करोड़ नाम हटाए गए। मृतक मतदाता: लगभग 2.8 करोड़ लोग।स्थान परिवर्तन (Shifted): लगभग 6.3 करोड़ लोग, जो काम या शादी के सिलसिले में दूसरी जगह चले गए।दोहरी प्रविष्टियां (Duplicate): लगभग 1 करोड़ लोग।लापता (Untraceable): लगभग 3 करोड़ लोग, जो घर-घर जाकर किए गए वेरिफिकेशन के दौरान अपने पते पर नहीं मिले।

     आरटीआई (RTI) रिपोर्टों के अनुसार, केवल 6 राज्यों में करीब 1,640 लोगों को ही आधिकारिक रूप से गैर-भारतीय नागरिक की श्रेणी में चिन्हित किया जा सका।

     घुसपैठिया” शब्द का राजनीतिक इस्तेमाल अक्सर बड़े दावों और वास्तविक, सत्यापित आंकड़ों के बीच का अंतर धूमिल कर देता है। भारत में अवैध प्रवास एक वास्तविक नीतिगत मुद्दा है, पर “करोड़ों बांग्लादेशी घुसपैठिए” जैसे दावों के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक, सत्यापित आंकड़ा नहीं है।अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा पर चर्चा जायज है, लेकिन “घुसपैठिया” शब्द को बिना व्यक्तिगत साक्ष्य के पूरी आबादी या समुदाय पर लागू करना भ्रामक और भेदभावपूर्ण हो सकता है। सही आधार यह है कि औपचारिक डिपोर्टेशन के उपलब्ध आंकड़े हजारों की सीमा में हैं, जबकि “करोड़ों” के दावों के पीछे कोई सार्वजनिक, सत्यापन योग्य सरकारी गणना नहीं है।