अरुणाचल हमारा है, ITBP हमारी शान है !”

(लाल ऑख और आत्मनिर्भर भारत कि हकीकत)

डॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी 

    अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न अंग है, और देश की संप्रभुता की रक्षा में रात-दिन जुटे भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 'हिमवीर' सचमुच पूरे देश की शान हैं।

    अक्टूबर 2026 में भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और आधिकारिक स्वीकारोक्ति सामने आई है। राजस्थान के अलवर में आयोजित वार्षिक 'हिमवीर सम्मान समारोह' में ITBP के महानिदेशक (DG) शत्रुजीत कपूर ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ सुरक्षा बलों का आमना-सामना (Face-off) हुआ है और यह स्थिति अभी भी जारी है।

चीनी घुसपैठ

    जुलाई 2026 के आखिरी हफ्ते से ही अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले असफिला इलाके में दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं।रिपोर्टों के मुताबिक, चीनी सैनिकों ने भारत की समझ वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के भीतर लगभग 6 से 7 किलोमीटर के दायरे में अपने तंबू गाड़ रखे हैं।इस तनातनी को सुलझाने के लिए पिछले महीने अरुणाचल के वाचा और दमाई में कॉर्प्स कमांडर स्तर की बैठकें भी आयोजित की गईं, लेकिन सीमा पर गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है।

Arunachal is Ours ITBP is Our Pride – The Real Story Behind Red Eye Diplomacy and Atmanirbhar Claims

    कालक्रम की दृष्टि से "लाल आंख दिखाना" भारत-चीन सीमा विवाद के संदर्भ में एक बेहद चर्चित और बहुआयामी राजनीतिक मुहावरा बन चुका है। वर्तमान सुरक्षा परिदृश्यों (अक्टूबर 2026) के आधार पर, जहाँ अरुणाचल प्रदेश के ताकसिंग सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध [1, 2] और नाम बदलने जैसे चीनी कूटनीतिक हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, इस जुमले और जमीनी हमले की हकीकत को दो अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है।

    सीमा पर तनाव के बावजूद चीन के साथ भारत का आयात (Imports) और द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। आलोचकों का तर्क है कि भारत आर्थिक रूप से चीन पर अपनी निर्भरता कम करने में पूरी तरह सफल नहीं रहा है, जिससे चीन को भारत के खिलाफ एक आर्थिक हथियार मिल जाता है।

ITBP का अदम्य शौर्य

    दुर्गम और विषम परिस्थितियों में भी ITBP के जवानों ने चीनी आक्रामकता का डटकर मुकाबला किया है। महानिदेशक ने खुद इस बात की सराहना की है कि विषम परिस्थितियों में बल की नवगठित 'शौर्य कमांडो' टीमों ने अत्यंत अनुकरणीय और ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।गलवान घाटी (2020) जैसी हिंसक झड़पों की पुनरावृत्ति को रोकने और आधुनिक युद्ध कौशल से निपटने के लिए ITBP सीमा पर बड़े आधुनिकीकरण अभियान चला रही है।सुरक्षा बल सीमा पर निगरानी मजबूत करने के लिए भारी-भरकम बजट के साथ ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।भविष्य के हवाई व तोपखाने हमलों से बचने के लिए अग्रिम चौकियों पर भूमिगत बंकर (Underground Shelters) और शेल्टर बनाए जा रहे हैं।जवानों को किसी भी आपातकालीन आमने-सामने की स्थिति से निपटने के लिए विशेष 'स्ट्राइक' ट्रेनिंग दी जा रही है।

सरकार के रुख पर उठते सवाल

    ITBP प्रमुख के इस बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है, और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की सीमा-नीति और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

 आत्मनिर्भर भारत कि हकीकत

    यह एक कड़वी हकीकत है कि 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के बावजूद चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम होने के बजाय बढ़ रहा है। हालिया आंकड़ों (अक्टूबर 2026) के अनुसार, 2025-26 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

    आम जनता को लगता है कि भारत केवल चीनी खिलौने या मोबाइल फोन खरीदता है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। भारत चीन से तैयार माल (Finished Goods) से ज्यादा कच्चा माल (Raw Materials), कंपोनेंट्स और मशीनरी आयात करता है।

    भारत में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण (Manufacturing) तो बढ़ा है, लेकिन भारत केवल पुर्जों को जोड़ने (Assembly) का काम कर पाता है। इन फोन्स और उपकरणों के अंदर लगने वाले मदरबोर्ड, चिप्स, और डिस्प्ले चीन से ही आते हैं।एक हालिया स्टडी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स की 71 प्रमुख उत्पाद श्रेणियों (जैसे मोटर्स, केबल्स, स्विचिंग इक्विपमेंट) में भारत 80% से अधिक केवल चीन पर निर्भर है।

    भारत दुनिया का फार्मा हब है, लेकिन जीवन रक्षक दवाएं बनाने के लिए जो मुख्य कच्चा माल (API - एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट) चाहिए, उसका लगभग 70% चीन से आता है।भारत में लगने वाले सोलर पैनल (सौर ऊर्जा) और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की लिथियम-आयन बैटरी का 83% से ज्यादा हिस्सा चीन से आयात होता है।

    भारत रातों-रात चीन से व्यापार बंद नहीं कर सकता क्योंकि ऐसा करने से भारतीय फैक्ट्रियां ठप हो जाएंगी।भारत आज चीन पर निर्भर जरूर है, लेकिन यह मजबूरी का नहीं बल्कि बदलाव का दौर है।

गहरी चुप्पी या ५६ इंच पर सवाल

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित विपक्ष ने आरोप लगाया है कि जब देश की सीमा पर जुलाई से इतना बड़ा गतिरोध चल रहा था, तो सरकार ने देश को अंधेरे में क्यों रखा? विपक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री और शीर्ष नेतृत्व इस संवेदनशील मुद्दे पर पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं।स्थानीय निवासियों और रिपोर्टों के हवाले से विपक्ष ने आशंका जताई है कि लद्दाख की तरह ही अरुणाचल के ताकसिंग सेक्टर में भी भारतीय सेना के पारंपरिक पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक जाने की पहुंच प्रभावित हुई है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने इस विषय पर विस्तृत ब्योरा अभी साझा नहीं किया है।

    आलोचकों का तर्क है कि चीन एक तरफ अरुणाचल प्रदेश के 27 भौगोलिक स्थानों के नाम बदलकर (जिसे भारत ने खारिज किया है) और सीमा के पास विशाल बांध बनाकर हमारी जल सुरक्षा को चुनौती दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत सरकार का रुख चीन के प्रति उतना सख्त नजर नहीं आ रहा है, जितना होना चाहिए।

    इन तीखे हमलों के बीच, विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि जब भी चीनी सेना स्थापित पेट्रोलिंग पैटर्न्स (गश्त के तौर-तरीकों) से अलग हटती है, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बाधित होती है। विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए सीमा पर शांति बनाए रखना अत्यंत आवश्यक शर्त है।

    "अरुणाचल हमारा है" यह महज एक नारा नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का दृढ़ संकल्प है। देश की भौगोलिक अखंडता अक्षुण्ण रहे, इसके लिए हमारे जांबाज सैनिक सीमा पर मुस्तैदी से खड़े हैं। लेकिन सैन्य तैयारियों के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि सरकार कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर अत्यधिक आक्रामक नीति अपनाए। सीमा पर चीनी घुसपैठ की हर छोटी-बड़ी कोशिश की जानकारी देश के सामने पारदर्शी तरीके से रखना और चीन को उसकी की भाषा में जवाब देना ही हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को स्थायी मजबूती दे सकता है।