डॉ. महेंद्र धावडे, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी
भारत में आधार बनवाना शुरू से निःशुल्क रहा है, इसलिए अब तक बनाए गए लगभग सभी आधार निःशुल्क एनरोलमेंट के तहत ही बने हैं। UIDAI के मुताबिक अब तक 145.32 करोड़ आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं।
मुख्य आंकड़े
पहला आधार 29 सितंबर 2010 को बना था।31 मार्च 2025 तक 141.80 करोड़ से अधिक आधार नंबर जारी हो चुके थे।UIDAI के नवीनतम डैशबोर्ड के अनुसार कुल जारी आधार 145.32 करोड़ हैं।UIDAI स्पष्ट करता है कि एनरोलमेंट पूरी तरह निःशुल्क है; एनरोलमेंट केंद्र पर इसके लिए कोई शुल्क नहीं देना होता।

“कितने बनाए गए” का यह आंकड़ा जारी किए गए आधार नंबरों का है, न कि वर्तमान में सक्रिय/जीवित आधार धारकों का। UIDAI की रिपोर्टों में “generated” और “live” आधार की संख्या अलग-अलग दिखाई जाती है; उदाहरण के लिए 31 मार्च 2023 तक 136.65 करोड़ आधार बने थे, जबकि अनुमानित लाइव आधार 129.48 करोड़ थे।
आधार कार्ड दुरुस्ती का शुल्क
आधार कार्ड में दुरुस्ती (अपडेट) करवाने का सरकारी शुल्क ₹75 से ₹125 तक है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या अपडेट करवा रहे हैं। UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) द्वारा निर्धारित की गई नई दरें ।
- १) डेमोग्राफिक अपडेट (नाम, पता, जन्मतिथि, लिंग, मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी बदलना) ₹75
- २) बायोमेट्रिक अपडेट (फिंगरप्रिंट, आंखों की पुतली (Iris) या फोटो बदलना) ₹125
- ३) माय आधार (myAadhaar) पोर्टल से ऑनलाइन दस्तावेज अपडेट (पहचान और पते का प्रमाण) मुफ्त (14 जून 2027 तक)
- ४) आधार सेंटर पर जाकर दस्तावेज अपडेट करवाना- ₹75
- ५) बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (5 से 7 वर्ष और 15 से 17 वर्ष की उम्र में) बिलकुल मुफ्त (FREE)
- ६) आधार पीवीसी (PVC) प्लास्टिक कार्ड मंगवाना ₹50 (जीएसटी और स्पीड पोस्ट शुल्क सहित)
भारत मे कितने आधार कार्ड धारको ने सुधार किया है
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में अब तक 331 करोड़ से अधिक बार आधार कार्ड अपडेट (सुधार) किए जा चुके हैं।
कई आधार धारक अपने जीवनकाल में एक से अधिक बार (जैसे पता बदलने पर, मोबाइल नंबर बदलने पर या बच्चों के बड़े होने पर बायोमेट्रिक्स बदलने के लिए) सुधार करवाते हैं, इसलिए यह संख्या कुल आधार धारकों की आबादी से भी अधिक है।
१) भारत में हर साल औसतन 8 करोड़ से 16 करोड़ आधार कार्डों में सुधार या दस्तावेज अपडेट किए जाते हैं। वर्तमान में हर दिन लगभग 3 से 4 लाख लोग अपने आधार में सुधार करवाते हैं।
२) हाल ही में लॉन्च हुए नए आधार ऐप के जरिए ही केवल कुछ समय में 40 लाख से अधिक लोगों ने अपना मोबाइल नंबर अपडेट किया है।
३) UIDAI द्वारा शुरू की गई 'माय आधार पोर्टल' से मुफ्त दस्तावेज (पहचान और पते का प्रमाण) री-वेरिफिकेशन और अपडेट करने की सुविधा का लाभ करोड़ों नागरिकों ने उठाया है, जिसकी समय सीमा बढ़ाकर 14 जून 2027 कर दी गई है।
कुल अपडेट की संख्या
UIDAI के सार्वजनिक डेटा में यह अलग से वर्गीकृत (Categorized) आंकड़ा उपलब्ध नहीं है कि कितने लोगों ने ठीक ₹125 खर्च करके यह संयुक्त अपडेट करवाया है। लेकिन कुल मिलाकर देश में अब तक 331 करोड़ से अधिक बार आधार कार्ड अपडेट किए जा चुके हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा बच्चों और वयस्कों के बायोमेट्रिक अपडेट का है।
75 रु खर्च करके आधार कार्ड अपडेट वाली कुल संख्या
१) कुल डेमोग्राफिक अपडेट (₹75 शुल्क वाले) 101.36 करोड़ से ज्यादा बार नागरिकों ने अपने नाम, पते, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर में सुधार करवाया है।
२) कुल बायोमेट्रिक अपडेट (₹125 शुल्क वाले) 65.82 करोड़ से अधिक बार फोटो, फिंगरप्रिंट या आंखों की पुतली का अपडेट किया गया है।
३) कुल आधार अपडेट संख्या देश में अब तक कुल मिलाकर 167.18 करोड़ से भी अधिक बार आधिकारिक रूप से डेटा को अपडेट (संशोधित) किया जा चुका है।
PVC आधार कार्ड वाली संख्या
पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) से बने इस डेबिट/एटीएम कार्ड के आकार वाले आधार कार्ड को नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए अक्टूबर 2020 में लॉन्च किया गया था। तब से लेकर अब तक इसकी लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी है।
१) देश में अब तक 40 करोड़ से ज्यादा आधिकारिक PVC आधार कार्ड UIDAI के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए ऑर्डर करके स्पीड पोस्ट से मंगवाए जा चुके हैं।
२) इस मजबूत, वाटरप्रूफ और लंबे समय तक चलने वाले प्लास्टिक कार्ड को घर बैठे मंगवाने का आधिकारिक शुल्क ₹50 से ₹75 (स्पीड पोस्ट डिलीवरी और जीएसटी सहित) है।
इस कार्ड की मांग इतनी अधिक होने का मुख्य कारण इसमें मिलने वाले हाई-टेक सुरक्षा फीचर्स हैं, जैसे—सुरक्षित QR कोड, होलोग्राम, घोस्ट इमेज (धुंधली फोटो), माइक्रोटेक्स्ट और एम्बोस्ड लोगो।
जमा धन राशी
१) १०१.३६ करोड़ लोगों द्वारा ७५ रुपये शुल्क देने से कुल ७६,०२,००,००,००० रुपये (सात हजार छह सौ दो करोड़ रुपये) मिले हैं।
भारतीय मुद्रा के बड़े पैमानों के अनुसार इस राशि को इस तरह समझा जा सकता है:
• ₹७,६०२ करोड़ (7,602 Crores)
• ₹७६ अरब और २ करोड़ (76.02 Billion)
यह पूरी राशि UIDAI द्वारा आधार कार्ड के डेमोग्राफिक अपडेट (जैसे नाम, पता, मोबाइल नंबर सुधारने) के जरिए जमा की गई है।
२) ६५.८२ करोड़ लोगों द्वारा १२५ रुपये शुल्क देने से कुल ८२,२७,५०,००,००० रुपये (आठ हजार दो सौ सत्ताइस करोड़ और पचास लाख रुपये) मिले हैं।
भारतीय मुद्रा के बड़े पैमानों के अनुसार इस राशि को इस तरह समझा जा सकता है।
३) ४० करोड़ लोगों द्वारा ५० रुपये शुल्क देने से कुल २०,००,००,००,००० रुपये (दो हजार करोड़ रुपये) मिले हैं।
भारतीय मुद्रा के बड़े पैमानों के अनुसार इस राशि को इस तरह समझा जा सकता है।
• ₹२,००० करोड़ (2,000 Crores)
• ₹२० अरब (20 Billion)
यह राशि UIDAI द्वारा सुरक्षित प्लास्टिक (PVC) आधार कार्ड प्रिंट करने और उसे स्पीड पोस्ट के माध्यम से नागरिकों के घर तक सुरक्षित पहुँचाने के शुल्क के रूप में प्राप्त हुई है।
अब हम १+२+३=को जोडकर हिसाब लगाते है ।तीनों शुल्कों का पूरा जोड़ (गणितीय गणना)
• डेमोग्राफिक अपडेट (₹७५): ₹७,६०२.०० करोड़
• बायोमेट्रिक अपडेट (₹१२५): ₹८,२२७.५० करोड़
• PVC आधार कार्ड (₹५०): ₹२,०००.०० करोड़
• कुल जोड़ (Total): ₹१७,८२९.५० करोड़ (यानी ₹१७८ अरब २९ करोड़ और ५० लाख)
आधार कार्ड पर भारत सरकार को १७८ अरब २९ करोड ५० लाख रुपये प्राप्त हुवे है ।
आधार कार्ड घोटाला
आजकल साइबर अपराधियों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी का एक गंभीर जरिया बन गया है। ठग आपके आधार कार्ड की छोटी सी जानकारी या बायोमेट्रिक का गलत इस्तेमाल करके बैंक खाते खाली करने से लेकर फर्जी सिम कार्ड निकालने जैसे अपराधों को अंजाम दे रहे हैं।
१) आधार कार्ड से जुड़े घोटालों और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के कारण भारत में कुल मिलाकर हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि सरकार के पास केवल "आधार कार्ड" के नाम पर अलग से कोई एकल बजट या डेटा नहीं है, लेकिन सरकारी एजेंसियों (जैसे गृह मंत्रालय की I4C विंग) और पुलिस जांच के अनुसार इसके नुकसान को दो बड़े हिस्सों में समझा जा सकता है।
२) हाल ही में उत्तर प्रदेश (नोएडा) पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने एक बहुत बड़े देशव्यापी घोटाले का भंडाफोड़ किया था। इस घोटाले में अपराधियों ने लगभग 7 लाख आम नागरिकों के आधार कार्ड और पैन कार्ड (PAN Card) के डेटा का गलत इस्तेमाल किया था।इन फर्जी कंपनियों के जरिए फर्जी बिल बनाकर सरकार से ₹15,000 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट (GST रिफंड) चुरा लिया गया।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी
भारत में पिछले 5 वर्षों में नागरिकों ने डिजिटल और साइबर फ्रॉड में ₹52,000 करोड़ से अधिक गंवाए हैं। इसमें से साल 2024 में ही नुकसान का आंकड़ा ₹22,845 करोड़ से अधिक था।
इस कुल नुकसान में एक बहुत बड़ा हिस्सा उन घोटालों का है जहां ठग लोगों को फोन करके डराते हैं कि "आपका आधार कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग तस्करी में फंसा है"। इस डर में लोग अपनी जमा पूंजी ट्रांसफर कर देते हैं। उदाहरण के लिए, मुंबई की एक बुजुर्ग महिला ने अकेले इस आधार 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले में ₹20.25 करोड़ गंवा दिए थे।
फिंगरप्रिंट का क्लोन बनाकर सीधे बैंक खातों से पैसे निकाले जाते हैं, वह कुल वित्तीय साइबर फ्रॉड का लगभग 11% हिस्सा है। अलग-अलग राज्यों में इसके कारण करोड़ों रुपये की चपत आम लोगों को लगी है (जैसे आंध्र प्रदेश के एक मामले में अकेले ₹5.9 करोड़ का फ्रॉड पकड़ा गया था)।
सरकार का दावा
धोखाधड़ी और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए UIDAI ने सख्त कदम उठाते हुए अब तक 2.5 करोड़ से अधिक फर्जी और निष्क्रिय आधार कार्डों को डिलीट (डिएक्टिवेट) भी किया है। साथ ही सरकार की साइबर हेल्पलाइन 1930 के जरिए अब तक ठगी के ₹2,400 करोड़ से ज्यादा रुपये ब्लॉक करके बचाए जा चुके हैं।
अंत मे १७८ अरब २९ करोड ५० लाख रुपया कहा गया और जनता के आधार कार्ड की सुरक्षा क्या? यह अहम सवाल है । जो आधार का अरबो रुपया भारत सरकार को मिला उसका हिसाब कब मिलेगा ? क्या जनता द्वारा चुने गये लोकसेवक इसका हिसाब देंगे या जवाबदेही से भागेंगे ?