डॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी
चुनाव आयोग (ECI) ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) अभियान के तहत करीब 13.39 करोड़ वोटरों के नाम हटाए या अलग कैटेगरी में डाले हैं।अब इतने भारत के मतदाता सूची से बाहर हैं जो सत्ताधारी दल के विरोध में है ऐसा विपक्ष का सीधा आरोप है।
सीमा खन्ना ECI की Director General (IT) हैं और ECINet/ERONet जैसे डिजिटल सिस्टम की देखरेख करती हैं। वे 2025 में National Informatics Centre (NIC) से deputation पर ECI आईं।
आरोप यह है कि IT विभाग ने सॉफ्टवेयर एक्सेस और डेटाबेस नियंत्रण के जरिए केंद्रीकरण बढ़ाया। हालांकि, यह अभी आरोप/आंतरिक विवाद है; इसे अदालत या किसी स्वतंत्र जांच ने अभी तक साबित नहीं किया है।

ECI का जवाब
ECI ने कहा है कि ECINet की व्यवस्था विकेंद्रित है और BLO, AERO, ERO, DEO तथा CEO अपनी-अपनी भूमिका के अनुसार unique ID और password से अपने वैधानिक काम कर सकते हैं। आयोग का दावा है कि कोई दूसरा अधिकारी—ECI का भी—किसी और का वैधानिक कार्य नहीं कर सकता।
यानी ECI की स्थिति है कि एक्सेस भूमिका-आधारित है और मतदाता सूची की जिम्मेदारी संबंधित राज्य/विधानसभा क्षेत्र के अधिकारियों के पास ही रहती है।
विवाद बढ़ने के बाद ECI ने ECINet की समीक्षा का आदेश दिया है। एक समिति, जिसमें IIT/IIIT से स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल है, यह जांचेगी कि प्लेटफॉर्म प्रचलित Acts और Rules के अनुरूप है या नहीं, और आयोग को रिपोर्ट देगी।
साथ ही, SIR से जुड़े कुछ बदलाव भी किए गए हैं—जैसे फ्लैग किए गए मतदाताओं के लिए घर-घर दस्तक और Form 7 से जुड़ी सीमा। SIR पूरा हो चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म से एक विवादित घोषणा भी हटाई गई।
राजनीतिक पहलू
विपक्ष, खासकर TMC और कांग्रेस, ने इसे मतदाता सूची में हेरफेर और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का मुद्दा बनाया। महुआ मोइत्रा ने सीमा खन्ना के खिलाफ पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई, जिसमें मतदाता सूची में हेरफेर की साजिश का आरोप लगाया गया—यह अभी आरोप है, न्यायिक सत्यापन नहीं।
राहुल गांधी के “देहरादून में छिपी महिला” वाले बयान को मीडिया ने सीमा खन्ना से जोड़ा, लेकिन यह कनेक्शन स्वयं उनके द्वारा सार्वजनिक रूप से पुष्ट नहीं है।
महत्व क्यों है ?
मतदाता सूची चुनाव की नींव है। अगर नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने का अधिकार कानूनी रूप से निर्धारित अधिकारियों के बजाय केंद्रीय IT विभाग में चला जाए, तो पारदर्शिता, जवाबदेही और मतदाताओं के भरोसे पर सवाल उठ सकते हैं।
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की महानिदेशक (IT) डॉ. सीमा खन्ना इस समय वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हुए नाम कटने (SIR प्रक्रिया) और डेटा सेंट्रलाइजेशन को लेकर विवादों और शक के घेरे में हैं।
सिमा खन्ना पर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के साथ-साथ खुद चुनाव आयोग के अंदर से भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन पर लगे आरोपों और विवाद की मुख्य वजह देखिये-
१) विपक्ष (विशेषकर कांग्रेस और टीएमसी) का आरोप है कि सीमा खन्ना ने ECINet और ERONet सॉफ्टवेयर के बैक-एंड से छेड़छाड़ की। इससे दिल्ली में बैठे-बैठे केंद्रीय स्तर पर ही वोटर लिस्ट में हेरफेर और नाम डिलीट करने का काम किया गया।
२) नियम के अनुसार, जमीनी स्तर के अधिकारियों (Electoral Registration Officers - EROs) के पास नाम जोड़ने या हटाने के कानूनी अधिकार होते हैं। आरोप है कि सीमा खन्ना के आईटी विभाग ने सॉफ्टवेयर में ऐसी पाबंदियां लगा दीं जिससे स्थानीय अधिकारियों के अधिकार सीमित हो गए।
३) इस मामले में केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के अपने दो चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) ने भी सीमा खन्ना के काम करने के तरीके और कानूनी अधिकार पर गंभीर आपत्तियां जताई थीं। उन्होंने पूछा था कि क्या आईटी विभाग जमीनी अधिकारियों के सॉफ्टवेयर एक्सेस को इस तरह रोक सकता है?
४) गोवा में EROs ने 97 वोटरों के नाम जोड़ने की मंजूरी दी थी, लेकिन सॉफ्टवेयर में पाबंदी (Rollback सुविधा न होने) के कारण वे नाम फाइनल लिस्ट में जुड़ ही नहीं पाए। गोवा चुनाव कार्यालय ने इसके लिए 8 बार पत्र लिखा था, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।
५) इस पूरे विवाद और बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आईटी प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ न्यायिक और एसआईटी (SIT) जांच की मांग की गई है।
६) विवाद और विरोध प्रदर्शनों के बढ़ने के कारण प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा (Speculation) भी तेज है कि सीमा खन्ना को उनके पद से इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में "देहरादून में छिपी एक महिला" का जिक्र किया, जिसे सीधे तौर पर सोशल मीडिया और विपक्षी नेताओं द्वारा सीमा खन्ना से जोड़कर देखा जा रहा है।टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और अन्य विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि सीमा खन्ना देहरादून में हैं और चुनाव आयोग के डेटाबेस और वोट चोरी के विवाद को लेकर अहम कड़ियां उनके पास हैं।
बलिराजा पार्टी की मांग है कि ऐसे कुटिल, लोकतंत्र के हत्यारी महिला को तुरंत गिरप्तार करके भारत की विश्वसनीयता को बचाना जरूरी है।