25 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर मोर्चा और 1 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अंतिम चरण का आंदोलन
भंडारा। जातिनिहाय जनगणना और ओबीसी के लिए स्वतंत्र कॉलम की मांग को लेकर ओबीसी संघर्ष समिति महाराष्ट्र, जिला भंडारा के नेतृत्व में शुक्रवार को जिले की तहसीलों में सत्याग्रह आंदोलन किया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयोजित इस आंदोलन का नेतृत्व मुख्य समन्वयक सदानंद इलमे ने किया।
"एससी-एसटी की तरह ओबीसी के लिए भी हो अलग कॉलम"
आंदोलनकारियों ने कहा कि 2026 की जनगणना में अनुसूचित जाति-जनजाति की तरह ओबीसी के लिए भी स्वतंत्र कॉलम और ड्रॉप-डाउन मेनू का प्रावधान किया जाना चाहिए, ताकि ओबीसी की वास्तविक जनसंख्या के सटीक आंकड़े सामने आ सकें।

आंदोलन का अगला चरण
समिति ने आंदोलन के अगले चरणों की घोषणा करते हुए बताया कि:
- 25 अक्टूबर को भंडारा जिला मुख्यालय पर भव्य मोर्चा निकाला जाएगा।
- 1 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान पर अंतिम चरण का आंदोलन किया जाएगा।
सत्याग्रह में प्रभाकर वैरागड़े, भगीरथ धोटे, गोपाल सेलोकर, डॉ. बालकृष्ण सार्वे, प्रा. विष्णु जगनाडे, रोशन उरकुडे, रमेश शहारे सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।
लाखनी में तहसील कार्यालय के सामने धरना
संवाददाता | लाखनी (भंडारा)। गांधी और शास्त्री की जयंती पर शुक्रवार को लाखनी में भी ओबीसी समाज ने "जनगणना सत्याग्रह" के तहत धरना प्रदर्शन किया। आगामी जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम और डिजिटल ड्रॉप-डाउन मेनू शामिल करने की मांग को लेकर ओबीसी संघर्ष समिति की ओर से तहसील कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया गया।
इस दौरान तहसीलदार के माध्यम से भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त, केंद्रीय गृह मंत्री और सामाजिक न्याय मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि 2011 की सामाजिक, आर्थिक एवं जातिगत जनगणना में खुले सवाल पूछे जाने के कारण देशभर में 46 लाख 70 हजार से अधिक जातियों और उपजातियों का पंजीकरण हुआ था।