“आसमान में तीसरी आंख" !

(Eye in the Sky)

डॉ.महेंद्र धावडे, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी 

     आपको जानकर हैरानी होगी जो पुलिस भारतीय जनता पर अत्याचार करती उनपर भी यह कैमरा नजर रखकर फोटो खिचेगा ।EOS -05 (Earth Observation Satellite-05) भारत का पहला समर्पित जियोसिंक्रोनस (भूतुल्यकालिक) इमेजिंग उपग्रह है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 4 सितंबर 2026 को GSLV-F17 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया. अंतरिक्ष में लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण इसे भारत की "आसमान में तीसरी आंख" (Eye in the Sky) कहा जा रहा है, जो देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

     यह उपग्रह भारत और उसके आसपास के पड़ोसी क्षेत्रों (जैसे LOC और LAC सीमाओं और समुद्री रास्तों) की लगातार 24 घंटे निगरानी कर सकता है. इससे दुश्मन देशों की गतिविधियों और किसी भी संदिग्ध मूवमेंट का रियल-टाइम में पता लगाना बहुत आसान हो जाएगा।

     पारंपरिक लो-ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइटों के विपरीत, यह जियोसिंक्रोनस कक्षा में होने के कारण भारत के विशाल भूभाग की तस्वीरें हर 30 मिनट में और विशेष संवेदनशील क्षेत्रों की तस्वीरें हर 5 से 10 मिनट में भेज सकता है।

     चक्रवात (Cyclones), अचानक आई बाढ़ (Flash Floods), बादल फटने (Cloudbursts) और जंगलों की आग (Forest Fires) जैसी प्राकृतिक आपदाओं की सटीक स्थिति जानने और तुरंत राहत कार्य शुरू करने में यह उपग्रह मील का पत्थर साबित होगा।

     फसलों के चक्र, वन आच्छादन की स्थिति, जल संसाधनों के स्तर और मौसम के बदलते मिजाज का लगभग वास्तविक समय (Real-time) में आकलन करने में इससे मिलने वाले डेटा का अत्यधिक महत्व है ।

EOS 05 Indias First Geosynchronous Imaging Satellite – The Third Eye in the Sky

     यह उपग्रह पूर्ववर्ती GISAT-1 (EOS-03) मिशन का परिचालनात्मक प्रतिस्थापन (Operational Replacement) है, जो अगस्त 2021 में क्रायोजेनिक चरण की तकनीकी खराबी के कारण कक्षा में नहीं पहुंच सका था. इसका सफल प्रक्षेपण इसरो की क्रायोजेनिक तकनीक की मजबूती को भी दर्शाता है।

     SRO का यह EOS-05 उपग्रह सुरक्षा से लेकर मौसम पूर्वानुमान और नागरिक सुरक्षा के मामलों में भारत को अंतरिक्ष से एक निरंतर और अचूक नजर प्रदान करता है।

     GSLV-F17 (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक भारी प्रक्षेपण यान (रॉकेट) है, जिसने हाल ही में ISRO GSLV-F17 Mission Page के तहत 4 सितंबर 2026 को भारत के सबसे उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-05 को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।

अत्याधुनिक इमेजिंग पेलोड्स

     इस उपग्रह में मुख्य रूप से तीन तरह के एडवांस्ड कैमरा सेंसर स्पेक्ट्रम लगाए गए हैं जो एक साथ मिलकर काम करते हैं।यह मानव आंख की तरह सामान्य रोशनी में पृथ्वी की बेहद साफ और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें (Optical Images) लेता है।

     यह सेंसर फसलों की सेहत, वनों की सघनता, और वनस्पतियों (Vegetation assessment) में होने वाले बदलावों को पकड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है।यह कैमरा तापमान की विसंगतियों को मापता है। इसकी मदद से जंगलों में सुलगती आग (Forest Fires) और समुद्री पानी के तापमान का सटीक आकलन किया जा सकता है।

रेजोल्यूशन और इमेजिंग क्षमता

     जियोसिंक्रोनस कक्षा (काफी ऊंचाई) में होने के बावजूद इसके कैमरों की सटीकता लाजवाब है।यह कैमरा 36,000 किमी की दूरी से भी पृथ्वी पर 42 मीटर जितनी छोटी वस्तुओं या बदलावों को आसानी से स्कैन और पहचान सकता है।साफ मौसम के दौरान यह सेंसर अभूतपूर्व स्पष्टता के साथ डेटा प्रदान करते हैं।

कैमरों की टाइमिंग स्पीड

     यह कैमरा भारत के ठीक ऊपर एक जगह स्थिर रहता है, इसलिए इसकी री-विजिट टाइमिंग (तस्वीरें दोहराने की क्षमता) कमाल की है।यह कैमरा पूरे भारतीय भूभाग का एक चक्करदार विहंगम दृश्य हर 30 मिनट में अपडेट कर देता है।यदि सीमा सुरक्षा (Border Security) या किसी चक्रवात/बाढ़ प्रभावित इलाके की विशेष निगरानी करनी हो, तो यह कैमरा हर 5 से 10 मिनट में उस विशेष क्षेत्र की नई तस्वीरें भेज सकता है।

देश को क्या फायदा

     सीमाओं पर सैन्य वाहनों, नए निर्माणों या किसी भी संदिग्ध हलचल को इसके कैमरे रियल-टाइम में पकड़ लेते हैं।हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर यह बता सकते हैं कि किस क्षेत्र की फसल बीमार है या कहाँ पानी की कमी है।चक्रवात की बदलती दिशा, बादल फटने (Cloudbursts) की सटीक लोकेशन और नदियों के जलस्तर के फैलाव को इसके कैमरे लाइव ट्रैक करते हैं।

     २४ घंटे भारत पर निगराणी करने वाला कैमरा प्रशासन की खामियो को उजागर कर के जनता के प्रति जवाबदेही निर्धारित करेगा ।