जुमला जिहाद और भारत जिंदाबाद !

डॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी 

     भारतीय राजनीति के मंच पर जुमलो की सुरवात और उनके विविध रूपों कि चर्चा आपके सम्मुख रखने का प्रयास है जो नेपाल में उन्हें एक न्यायप्रिय, दानी और किसानों के रक्षक (अन्नदाता) के रूप में पूजा जाता है उनका नाम है बलीराजा ।नेपाल के सबसे बड़े त्योहारों में से एक 'तिहार' (जो भारत में दिवाली के समय मनाया जाता है) का सीधा संबंध बळीराजा से है।नेपाल के नेवार समुदाय द्वारा तिहार के दौरान 'म्हा पूजा' (आत्म-पूजा) की जाती है। इसी दिन से नेपाल का आधिकारिक मौलिक कैलेंडर 'नेपाल संवत' भी शुरू होता है। इस पूजा के अनुष्ठानों में राजा बलि (बळीराजा) की मंडल बनाकर पूजा की जाती है और उन्हें एक आदर्श, परोपकारी शासक के रूप में याद किया जाता है।नेपाल के इतिहास के अनुसार, बळीराजा का वंश 'कल्याल राजवंश' (Kalyal / Kallala Dynasty) कहलाता है। इस राजवंश का प्रामाणिक इतिहास और उनकी वंशावली इस प्रकार है।नेपाल के इतिहास में "बळीराजा" (Baliraja / बलिराज) नाम से जिस ऐतिहासिक राजवंश और राजा का संबंध है, वे पश्चिमी नेपाल के जुम्ला साम्राज्य (Jumla Kingdom) के संस्थापक थे। 

     “जुमला" शब्द का इतिहास और इसका संदर्भ काफी दिलचस्प है, क्योंकि इसके भाषाई (Linguistic), राजनीतिक (Political) और भौगोलिक (Geographical) तीन अलग-अलग पहलू हैं। 

Jumla Jihad aur Bharat Zindabad

उत्पत्ति

जुमला" मूल रूप से अरबी भाषा (جُمْلَة) का शब्द है, जो फारसी के रास्ते होते हुए लगभग 13वीं शताब्दी के आसपास हिंदी-उर्दू (हिंदुस्तानी) भाषा का हिस्सा बना।

भारतीय राजनीति में जुमले का इतिहास

     आधुनिक समय में, विशेषकर भारतीय राजनीति में "जुमला" या "जुमलेबाजी" शब्द का अर्थ "खोखले चुनावी वादे" या "ऐसी राजनीतिक बयानबाजी जिसे गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए" के रूप में रूढ़ हो गया है।यह शब्द साल 2015 में तब सबसे ज्यादा सुर्खियों में आया, जब भारत के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में 2014 के चुनावों के दौरान "हर नागरिक के खाते में 15 लाख रुपये आने" वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा था कि वह महज एक "चुनावी जुमला" था।इसके बाद से विपक्षी दलों और आम जनता द्वारा इस शब्द का प्रयोग राजनेताओं के उन वादों पर तंज कसने के लिए किया जाने लगा है।

     सन २०१४ के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी और भाजपा द्वारा दिए गए नारों और वादों को विपक्ष और आलोचकों द्वारा 'खोखले वादे' या 'जुमले' की संज्ञा दी गई।यह शब्द तब मुख्यधारा की राजनीति का हिस्सा बना, जब फरवरी 2015 में भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि 15 लाख रुपये हर नागरिक के खाते में आने की बात महज़ एक 'चुनावी जुमला' (मुहावरा) थी, जिसका उद्देश्य भाषण में वज़न डालना था।

प्रमुख जुमले

१)2014 के चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था कि विदेशों में इतना काला धन जमा है कि अगर उसे वापस लाया जाए, तो हर भारतीय नागरिक के हिस्से में 15-15 लाख रुपये आ सकते हैं।

२)भाजपा के चुनावी घोषणापत्रों और रैलियों में युवाओं को हर साल 2 करोड़ नौकरियां या रोजगार के अवसर देने का आश्वासन दिया गया था।

३)'अच्छे दिन आने वाले हैं'यह 2014 के चुनाव का सबसे प्रसिद्ध नारा था, जिसने आम जनता को महंगाई, भ्रष्टाचार और आर्थिक सुस्ती से मुक्ति दिलाने का भरोसा दिया था।

४)किसानों की आय दोगुनी का ऐलान सरकार ने किया और स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ (साल 2022) तक देश के किसानों की आमदनी को दोगुना कर दिया जाएगा।

५)'मोदी की गारंटी'हालिया वर्षों (विशेषकर 2024 के आम चुनावों के बाद) में 'मोदी की गारंटी' शब्द का काफी प्रयोग हुआ है, जिसे भाजपा सरकार अपने वादों को पूरा करने की प्रतिबद्धता के रूप में पेश करती है।

भारत जिंदाबाद

     मैं देश नहीं बिकने दूँगा यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बेहद लोकप्रिय और चर्चित चुनावी नारा रहा है। यह मूल रूप से उनकी एक कविता की पंक्ति है, जिसका उपयोग वे अपनी राजनीतिक रैलियों में देशभक्ति और देश की संप्रभुता की रक्षा के संकल्प के रूप में करते रहे हैं।इस कड़ी को लेकर उन्होंने अपने भाषण द्वारा चाहे कोई भी मौका हो,

     चाहे स्वतंत्रता दिवस हो, गणतंत्र दिवस हो, या अन्य समारोह हो राष्ट्रप्रेम को उजागर करने की कोई कसर नही छोड़ी।

बेचवाल का आरोप

     कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों (जैसे प्रियंका गांधी व अन्य नेता) का आरोप है कि "देश नहीं बिकने दूंगा" का नारा देने वाली सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उपक्रमों (PSUs) और राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों या चुनिंदा उद्योगपतियों को सौंप रही है।आलोचक अक्सर एयर इंडिया (Air India) के निजीकरण, भारतीय रेलवे (Indian Railways) के कुछ हिस्सों के आधुनिकीकरण/निजी भागीदारी, एलआईसी (LIC) के आईपीओ, और विभिन्न हवाई अड्डों (जैसे मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ एयरपोर्ट) के प्रबंधन को निजी हाथों (जैसे अडानी समूह या टाटा) में सौंपे जाने का हवाला देकर इस नारे पर तंज कसते हैं।

     यह नारा जहां एक तरफ भाजपा के लिए मजबूत नेतृत्व और राष्ट्रवाद का प्रतीक है, वहीं विपक्ष के लिए सरकार की निजीकरण (Privatization) नीतियों पर हमला करने का एक प्रमुख हथियार बन चुका है।

जुम्ला राज्य

     इतिहास में इसका संबंध एक बेहद शक्तिशाली मुग़ल वज़ीर (मीर जुमला), नेपाल के एक ऐतिहासिक साम्राज्य (जुम्ला राज्य), भाषाई विकास और आधुनिक भारतीय राजनीति से है।इतिहास में 'जुमला' नाम का सबसे बड़ा संदर्भ मुग़ल काल के प्रसिद्ध सैन्य जनरल और हीरा व्यापारी मीर जुमला से जुड़ता है।इतिहास में मीर जुमला को इसलिए भी याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने ही शाहजहाँ को दुनिया का प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भेंट किया था।

     मीर जुमला का असली नाम मीर मुहम्मद सैयद अर्दिस्तानी था। वे ईरान से भारत आए और अपनी योग्यता के बल पर गोलकुंडा सल्तनत के वज़ीर बने। बाद में वे मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब के अधीन बंगाल के गवर्नर (सूबेदार) बने।

     नेपाल के इतिहास से है, तो जुम्ला (Jumla) एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक रियासत रही है।11वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान जुम्ला, विशाल खस साम्राज्य (Khasa Kingdom) का एक प्रमुख हिस्सा था। जुम्ला की सिंजा घाटी (Sinja Valley) को आधुनिक नेपाली भाषा और संस्कृति का मूल उद्गम स्थल माना जाता है।1787 में गोर्खा राजाओं द्वारा किए गए 'नेपाल के एकीकरण' अभियान के दौरान जुम्ला का विलय आधुनिक नेपाल साम्राज्य में कर दिया गया।

     इस प्रकार से जुमलो की रोचक कहानी और ऐतिहासिक सफ़र के साथ राजनीति के मंच पर अपना मजबूत स्थान बनाने वाले जुमलो को हमने देखा है जो की आज के दिन विशेष पर प्रस्तुतीकरण आपके सम्मुख पेश किया गया है यह भी एक संयोग है ।