ब्रिक्स सम्मेलन और दिल्ली की धड़कन !

 ( ११ से १३ तक लाल आख दिखाने का मौका ) 

डॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी 

     ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) के कारण दिल्ली में स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी वालों) पर काफी असर पड़ा है, खासकर सुरक्षा और सफाई अभियान के तहत उन्हें काम करने से रोका जा रहा है।इसका बलीराजा पार्टी निषेध करती है ।सरकारसे अनुरोध करते हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी जिने वाले वेंडर्स का गुजारा कैसा होगा । भारतीय संविधान के मौलिक सिद्धांतों को ठेंगा दिखाते सम्मेलन से क्या मतलब होगा ।

     “जीवन यापन” के लिए सबसे केंद्रीय मौलिक अधिकार अनुच्छेद 21 है, जिसमें जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, पर्यावरण, गोपनीयता आदि जैसे अधिकार न्यायिक व्याख्याओं द्वारा शामिल किए गए हैं।इसपर विचार करने की आवश्यकता है ।

काम रोकने के निर्देश 

     नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया (NASVI) के अनुसार, इंडिया गेट, मदनगिर, भीकाजी कामा प्लेस, वसंत विहार, साकेत और आरके पुरम जैसे इलाकों में पुलिसकर्मियों ने वेंडर्स को स्टॉल लगाने या बेचने से मना किया है।सामान जब्त करने की शिकायत: मदनगिर में कुछ वेंडर्स ने यह भी आरोप लगाया कि उनका सामान जब्त कर लिया गया।दिल्ली पुलिस, DUSIB, MCD और NDMC के संयुक्त अभियान में कनॉट प्लेस, इंडिया गेट, भारत मंडपम, खान मार्केट, मंडी हाउस, निजामुद्दीन, राजघाट और लाल किले जैसे प्रमुख इलाकों से रेहड़ी-पटरी वालों, भिखारियों और बेघर लोगों को हटाया जा रहा है।

Delhi ke Rehdi Patri Walon ki Zindagi Par BRICS ka Asar

     NASVI ने चेतावनी दी है कि 13 सितंबर तक प्रतिबंध जारी रहने से वेंडर्स और उनके परिवार कई दिनों तक बिना कमाई के रह सकते हैं, जबकि पहले से ही महंगाई और घरेलू खर्चों का दबाव बना हुआ है।

ट्रैफिक और सुरक्षा प्रतिबंध

     ब्रिक्स सम्मेलन 11 से 13 सितंबर तक भारत मंडपम (प्रगति मैदान) में हो रहा है, जिसके चलते 35 से अधिक सड़कों पर यातायात प्रतिबंधित या नियंत्रित रहेगा।  विदेशी मेहमानों के काफिले और सुरक्षा व्यवस्था के चलते वीवीआईपी इलाकों में आवाजाही पर रोक है, जिसका सीधा असर स्ट्रीट वेंडर्स पर पड़ रहा है।

बंद रहने वाले कार्यालय और संस्थान

     दिल्ली और नई दिल्ली क्षेत्र में स्थित सभी केंद्रीय कार्यालय, मंत्रालय और संबंधित विभाग बंद रहेंगे।

     दिल्ली सरकार के सभी सरकारी दफ्तर, स्वायत्त निकाय (autonomous bodies) और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) बंद रहेंगे।

     सभी सरकारी, सहायता प्राप्त (government-aided) और मान्यता प्राप्त निजी स्कूल 11 सितंबर को बंद रहेंगे।

     दिल्ली की निचली अदालतें 11, 12 और 13 सितंबर (शुक्रवार से रविवार) तक बंद रहेंगी; सुप्रीम कोर्ट में भी 11 सितंबर को छुट्टी घोषित की गई है।

     नगर निगम दिल्ली (MCD) के कार्यालय 11 सितंबर को बंद रहेंगे।

     राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर): 11 से 13 सितंबर तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा।

     भारत ने 1 जनवरी 2026 से ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली और अपनी चेयरशिप थीम रखी है।Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण)।

     एजेंडा पारंपरिक राजनीतिक समन्वय से आगे बढ़कर कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, शहरी विकास, MSMEs/स्टार्टअप, जलवायु कार्रवाई और पीपुल-टू-पीपुल आदान-प्रदान जैसे व्यावहारिक सहयोग क्षेत्रों पर केंद्रित है।

     सुरक्षा और तैयारियों की समीक्षा

     शिखर सम्मेलन से ठीक पहले दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद पुलिस ने अंतर-राज्य समन्वय बैठक कर सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की है।

     सीमावर्ती क्षेत्रों में 24×7 संयुक्त जांच, खुफिया साझाकरण, होटल/गेस्ट हाउस/पीजी आदि मेंTenant-verification, और ड्रोन/पैराग्लाइडर जैसी उड़ान वस्तुओं पर निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

     दिल्ली नगर निगम (MCD) और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने भारत मंडपम और आसपास के इलाकों में सफाई, बुनियादी ढांचा और सेवाओं की जांच-परख की है।

     प्रमुख अपेक्षित परिणाम (Outcomes)

     मीडिया रिपोर्टों में भारत की चेयरशिप के तहत लगभग 20 प्रमुख परिणामों की चर्चा है, 

     १) BRICS Network on Digital Agriculture: AI, जिओ-स्पेशियल टेक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए डेटा-संचालित कृषि समाधान।

     २) स्टार्टअप फंड/फाइनेंसिंग पहल: ब्रिक्स देशों के बीच स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ने और पूंजी पहुंच बढ़ाने के उपाय।

     ३) क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स और वित्तीय सहयोग: स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, भुगतान प्रणालियों के आपसी जुड़ाव और वित्तीय स्थिरता पर चर्चा।

     ४) ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु लचीलापन और स्वास्थ्य सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझा पहलें।

     ५) भू-राजनीतिक संदर्भ और चुनौतियाँ

     यह शिखर सम्मेलन एक विभाजित वैश्विक परिदृश्य में हो रहा है, जहाँ रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व तनाव, और अमेरिका की विदेश नीति में अनिश्चितताएँ प्रमुख हैं।

     ६) भारत के लिए मुख्य चुनौती रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए चीन-रूस के साथ संबंधों को संतुलित करना और पश्चिमी देशों (विशेषकर अमेरिका) के साथ भी अपने हितों को सुरक्षित रखना है।

     ७) सीमा पर भारत-चीन तनाव के बीच LAC पर शांति-स्थिरता बनाए रखने के लिए सेना स्तर की बैठकें भी शिखर सम्मेलन से पहले हुई हैं, जो कूटनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।

भारत के लिए महत्व

     यह शिखर सम्मेलन भारत को वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका सुदृढ़ करने, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी पकड़ मजबूत करने और व्यापार-निवेश के नए रास्ते खोलने का अवसर देता है।

     साथ ही, यह भारत-चीन संबंधों में thaw (पिघलाव) और ऊर्जा/तकनीक सहयोग को आगे बढ़ाने की परीक्षा भी है।18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (12–13 सितंबर 2026, नई दिल्ली) के लिए भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर कोई सार्वजनिक “कुल खर्च” आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट्स और पिछले बड़े शिखर सम्मेलनों के पैटर्न के आधार पर अनुमानित खर्च और संभावित आर्थिक/रणनीतिक लाभ स्पष्ट हैं।

अनुमानित खर्च

     १) आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं लेकिन विदेश मंत्रालय और पीआईबी ने अब तक शिखर सम्मेलन की कुल लागत का कोई आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है।

     २) पिछले अनुभवों के आधार पर अनुमान: 2023 में भारत ने G20 शिखर सम्मेलन आयोजित किया था, जिसकी अनुमानित लागत ₹2,000–3,000 करोड़ बताई गई थी (लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा, प्रोटोकॉल, मीडिया, इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड आदि मिलाकर)। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन G20 से छोटा है (11 नेता + प्रतिनिधिमंडल), इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी लागत G20 से कम, लेकिन फिर भी कई सौ करोड़ रुपये के दायरे में होगी।

 प्रमुख खर्च

     १) सुरक्षा व लॉजिस्टिक्स दिल्ली में व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन, VIP काफिले, हवाई अड्डे और होटलों की सुरक्षा, केंद्र सरकार के कार्यालयों की छुट्टी (11–13 सितंबर)।

     २) भारत मंडपम (प्रगति मैदान) को शिखर स्तर की बैठकों के लिए तैयार करना, तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुवाद, मीडिया सेंटर आदि।

     ३) प्रोटोकॉल व आतिथ्य विदेशी नेताओं, प्रतिनिधिमंडलों, शेरपा बैठकों, मंत्रिस्तरीय बैठकों (350+ बैठकें 25+ शहरों में) की मेजबानी।

     ४) अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज, प्रेस ब्रीफिंग, लाइव स्ट्रीमिंग, प्रचार सामग्री।

भारत को होने वाले प्रमुख लाभ

     १) भारत ने इस अध्यक्षता को “व्यावहारिक सहयोग” (trade, payments, tech, development) पर केंद्रित किया है। 

     २) व्यापार व निर्यात अवसर, FY2025–26 में भारत का ब्रिक्स देशों को माल निर्यात ~$82 अरब और 2024 में सेवाएँ निर्यात ~$31.3 अरब रहा; बेहतर बाजार पहुँच, कम प्रमाणन बाधाएँ और तेज़ भुगतान सीधे लाभ दे सकते हैं।

     ३) फार्मा, इंजीनियरिंग, डिजिटल सेवाएँ, ऊर्जा सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में अवसर रेखांकित किए गए हैं।

     ४) क्रॉस-बोर्डर भुगतान/लेन-देन लागत में कमी।

     ५) भारत का प्रस्ताव सदस्य देशों के CBDCs को जोड़कर व्यापार-पर्यटन भुगतान तेज़ व सस्ता बनाने पर केंद्रित है (डॉलर-विस्थापन नहीं, बल्कि लागत/समय कमी)।

     ६) स्थानीय मुद्रा निपटान व करेंसी स्वैप से परिवर्तन लागत घट सकती है, बशर्ते डेटा/संपूर्णता/संज्ञा अनुपालन जैसे मुद्दे सुलझें।

     ७) वित्तपोषण व इंफ्रास्ट्रक्चर,

     ८) न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ~₹25,000 करोड़ का रुपये-बांड कार्यक्रम 5 वर्ष में लाने की योजना बना रहा है—स्थानीय पूँजी बाज़ार को गहराई और इंफ्रा फंडिंग को बल।

     ९) ब्रिक्स २०२६ (सॉवरेन कैपिटल सम्मेलन) में ~$1 ट्रिलियन पूँजी वाले 500+ संस्थागत निवेशक भाग ले रहे हैं—इंफ्रा/ऊर्जा/डिजिटल परियोजनाओं से सीधा जुड़ाव।

     १०)  MSME/स्टार्टअप इकोसिस्टम:

     ११) BRICS इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज़म और MSME सहयोग पोर्टल से छोटे निर्यातकों को ट्रेड फाइनेंस आसान होगा।

     १२)  BRICS स्टार्टअप इनोवेशन फंड का प्रस्ताव—प्रारंभिक/ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स के लिए पूल फंडिंग।

     १३) वैश्विक दक्षिण की आवाज़ व रणनीतिक संतुलन।

     १४) ब्रिक्स द्वारा एकही मंच पर भारत चीन-रूस के साथ एक ही टेबल पर रहते हुए ऊर्जा उत्पादकों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से भी जुड़ता है; यह ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई-चेन विविधीकरण और “de-risking” में सहायक है।

     १५) भारत ने सामान्य ब्रिक्स मुद्रा के प्रस्ताव को खारिज किया है; इससे मौद्रिक स्थिरता और नीति-स्वायत्तता बनी रहती है।

सम्मेलन का दुसरा पहलू

     भारत मे 12 –13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहा है, जहाँ विस्तारित 11 सदस्यों और भागीदार देशों के नेता भाग ले रहे हैं।  आधिकारिक कुल बजट सार्वजनिक न होने के बावजूद, व्यापक लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा-प्रबंधन और 350+ पूर्व-सम्मेलन कार्यक्रमों को देखते हुए खर्च कई हज़ार करोड़ रुपये के क्रम में होने का अनुमान है; इसका एक दृश्य संकेत दिल्ली-एनसीआर में होटल टैरिफ़ का ~₹18,000 से ₹80,000+ तक उछलना भी है।

     वित्तीय लागत के मुकाबले भारत के अपेक्षित लाभ अधिकतर रणनीतिक-आर्थिक हैं । ब्रिक्स देशों को FY25–26 में ~$82 अरब माल और ~$31.3 अरब सेवा निर्यात की मौजूदा पहुंच को और सुदृढ़ करना, CBDC-लिंकेज व स्थानीय मुद्रा निपटान से लेन-देन लागत घटाना, NDB के ₹25,000 करोड़ रुपये-बांड और iBRICS के $1 ट्रिलियन सॉवरेन पूँजी मंच से इंफ्रा फंडिंग को बढ़ावा देना, तथा MSME/स्टार्टअप के लिए इनवॉइस डिस्काउंटिंग व स्टार्टअप फंड जैसे नए तंत्र स्थापित करना।  साथ ही, ऊर्जा सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में भारत की भूमिका मजबूत होती है, जबकि सामान्य ब्रिक्स मुद्रा जैसे प्रस्तावों को खारिज कर मौद्रिक स्थिरता बरकरार रखी गई है।