सत्य निकेतन का मलबा, शिक्षा की दैनाव्यवस्था !

डॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी 

     बलीराजा पार्टी सरकार और प्रशासन से संपूर्ण भारत की शिक्षा व्यवस्था प्रणाली पर ध्यान लक्ष केंद्रित करने की अपिल करती है । भारत को विश्वगुरु बनाने का सफल प्रयत्न शिक्षा से ही संभव है ।     चाईना सरकार ने अपनी शिक्षा नीति के तहत विश्व में सबसे अधिक शिक्षित युवाओं को रोजगार दिया है ।सरकार और प्रशासन की यह मुख्य भूमिका होती है कि वह जनहित में नीतियों का निर्माण करें और कानून-व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखें। एक प्रभावी प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। 

     राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला पीजी (हॉस्टल) इमारत का ताश के पत्तों की तरह ढह जाना केवल एक ढांचागत दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था और उसके खोखले बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की पोल खोलती एक दर्दनाक त्रासदी है। देश के कोने-कोने से अपनी आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने सजाकर दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) पढ़ने आए छात्र जब मलबे के नीचे दबकर चीखते हैं, तो वह चीख सीधे हमारी व्यवस्था के कानों पर तमाचा मारती है। सत्य निकेतन का यह मलबा असल में हमारी शिक्षा व्यवस्था की उस दैनाव्यवस्था का जीता-जागता प्रतीक है, जहां छात्रों के जीवन की कीमत मुनाफ़ाखोरी के आगे शून्य हो चुकी है। 

Satya Niketan ka Malba Shiksha ki Durdasha

     यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी छात्र हब में ऐसा हादसा हुआ हो। चाहे मुखर्जी नगर के कोचिंग सेंटरों में लगी आग हो या ओल्ड राजेंद्र नगर के बेसमेंट में डूबे बेकसूर छात्र, हर बार मलबे और हादसों के बीच से सिर्फ एक ही सच बाहर आता है—'लापरवाही और जवाबदेही का अभाव'। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन जैसे इलाकों में कमरों की भारी कमी और हॉस्टल सुविधाओं के अभाव के कारण निजी पीजी संचालक मनमाना किराया वसूलते हैं। पांच-पांच मंजिला अवैध इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं, बेसमेंट में पानी भरा रहता है, पिलर कमजोर हो जाते हैं, लेकिन न तो प्रशासन की नींद खुलती है और न ही एमसीडी (MCD) के जांच दस्ते वहां पहुंचते हैं। छात्र हर महीने मोटी रकम चुकाने के बावजूद जान जोखिम में डालकर इन 'मौत के कुओं' में रहने को मजबूर हैं। 

         जब हम 'विश्वगुरु' बनने की बात करते हैं और नई शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता और वैश्विक मानकों का दावा करते हैं, तब हमें इस जमीनी हकीकत का भी सामना करना होगा। क्या शिक्षा की गुणवत्ता केवल बड़े-बड़े परिसरों, बड़ी डिग्रियों और कागजी आंकड़ों तक सीमित है? जिस देश में विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए न्यूनतम सुरक्षित आवास (Safe Housing) और बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर न हों, वहां हम किस गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर रहे हैं? शिक्षा की समीक्षा करते समय यह अनिवार्य हो जाता है कि हम केवल शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को न बदलें, बल्कि उस माहौल और बुनियादी ढांचे की भी समीक्षा करें जिसमें छात्र सांस लेते हैं। 

     नीति आयोग से लेकर तमाम वैश्विक रिपोर्ट्स बार-बार भारत की स्कूली और उच्च शिक्षा में कमजोर बुनियादी ढांचे और संरचनात्मक असमानताओं की ओर इशारा करती रही हैं। शिक्षा पर जीडीपी का पर्याप्त हिस्सा खर्च न होना और निजी क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता ने शिक्षा को एक ऐसा व्यापार बना दिया है जहां सुरक्षा और नैतिकता हाशिये पर चली गई हैं। सरकारी विश्वविद्यालयों में पर्याप्त हॉस्टलों की कमी के कारण बाहरी छात्रों को निजी मकान मालिकों और पीजी माफियाओं के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है। 

      सत्य निकेतन की इस त्रासदी से हमें अब ठोस सबक लेना होगा। सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को मिलकर सभी छात्र बहुल इलाकों में निजी हॉस्टलों और पीजी का सख्त 'सेफ्टी ऑडिट' अनिवार्य करना चाहिए। अवैध और जर्जर इमारतों पर तुरंत ताला लगना चाहिए और छात्रों के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर ही किफायती एवं सुरक्षित आवास की व्यवस्था बढ़ानी होगी। 

मलबे के नीचे दबे छात्रों की तस्वीरें और उनके द्वारा मदद के लिए लगाए गए वीडियो कॉल्स हमारे समाज के लिए शर्मनाक हैं। यदि आज भी व्यवस्था नहीं जागी, तो हम अपनी आने वाली पीढ़ी को केवल डिग्रियां दे रहे होंगे, वह भी उनकी जिंदगी और उनके सपनों की कीमत पर। समय आ गया है कि शिक्षा की समीक्षा केवल कमरों के अंदर की पढ़ाई से न हो, बल्कि उन कमरों की दीवारों की मजबूती से भी हो, जिनमें बैठकर देश का भविष्य गढ़ा जा रहा है। 

अलीगंज कोचिंग सेंटर अग्निकांड, लखनऊ (जून 2026)

     उत्तर प्रदेश के लखनऊ के पॉश इलाके अलीगंज में एक तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में भीषण आग लग गई, जिसमें एक गेमिंग ट्रेनिंग/एजुकेशनल सेंटर चल रहा था। इस दर्दनाक हादसे में 15 छात्रों की मौत हो गई। बिल्डिंग में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) के बंद होने और फायर सेफ्टी उपकरणों की अनुपस्थिति के कारण छात्रों को खिड़कियों से कूदना पड़ा था। 

ओल्ड राजेंद्र नगर कोचिंग बेसमेंट हादसा, दिल्ली (जुलाई 2024) -

     देश के सबसे बड़े सिविल सर्विसेज कोचिंग हब ओल्ड राजेंद्र नगर में स्थित 'राव्स आईएएस स्टडी सर्किल' (Rau's IAS) के बेसमेंट में भारी बारिश के बाद अचानक बाढ़ का पानी भर गया।बेसमेंट में चल रही अवैध लाइब्रेरी में 3 यूपीएससी (UPSC) अभ्यर्थियों की डूबने से मौत हो गई। बायोमेट्रिक गेट लॉक होने और खराब ड्रेनेज सिस्टम के कारण छात्र बाहर नहीं निकल पाए थे, जिसने पूरे देश में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए। 

मुखर्जी नगर कोचिंग सेंटर अग्निकांड, दिल्ली (जून 2023)-

     दिल्ली के प्रमुख छात्र क्षेत्र मुखर्जी नगर की एक बहुमंजिला इमारत में बिजली के मीटर बोर्ड में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई थी, जहां सैकड़ों छात्र कोचिंग ले रहे थे।अपनी जान बचाने के लिए छात्रों को खिड़कियों से रस्सियों और तारों के सहारे लटककर नीचे कूदना पड़ा। इस हादसे में 60 से अधिक छात्र गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने कोचिंग सेंटरों के खिलाफ सख्त निर्देश दिए थे।

तक्षशिला आर्केड अग्निकांड, सूरत, गुजरात (मई 2019) -

     सूरत के तक्षशिला आर्केड की चौथी मंजिल पर चल रहे एक अवैध डिजाइनिंग कोचिंग क्लास में आग लग गई थी।इस भयानक त्रासदी में 22 मासूम छात्रों की मौत हो गई थी। अधिकांश छात्रों की मौत दम घुटने या जान बचाने के लिए चौथी मंजिल से नीचे कूदने के कारण हुई थी। इस परिसर के पास कोई फायर एनओसी (NOC) नहीं थी।

हादसों के मुख्य कारण

     १)नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट का उपयोग क्लासरूम या लाइब्रेरी के लिए करना।(२)अधिकांश इमारतों में फायर एक्सटिंग्विशर, वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास द्वार नहीं होते।(३)एमसीडी (MCD) और स्थानीय निकायों द्वारा जर्जर या नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों पर समय रहते कार्रवाई न करना।(४)सरकारी विश्वविद्यालयों में पर्याप्त हॉस्टल न होने के कारण छात्र इन असुरक्षित और महंगे निजी पीजी (PG) में रहने को मजबूर हैं।

विश्वविद्यालय और सरकारी स्तर पर उपाय -

     १)दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों में बाहरी छात्रों के अनुपात में सरकारी हॉस्टलों का निर्माण तेजी से किया जाए, ताकि छात्र निजी और असुरक्षित पीजी पर निर्भर न रहें।(२)स्थानीय प्रशासन (जैसे MCD या नगर निगम) के साथ हर प्राइवेट पीजी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो। प्रशासन द्वारा उनके कमरों के आकार, वेंटिलेशन और सुरक्षा मानकों के आधार पर ही उन्हें चलाने का लाइसेंस दिया जाए।(३)एक विशेष छात्र कल्याण बोर्ड का गठन हो, जो निजी आवासों में छात्रों की सुरक्षा, सुविधाओं और उचित किराए की निगरानी करे।

छात्रों और अभिभावकों के स्तर पर जागरूकता -

     १)छात्र किसी भी पीजी या कोचिंग में प्रवेश लेने से पहले वहां के आपातकालीन निकास, वेंटिलेशन और फायर एनओसी (NOC) की जांच स्वयं जरूर करें।(२)कोचिंग संस्थानों में छात्रों और स्टाफ के लिए हर तीन से छह महीने में आपदा प्रबंधन (Disaster Management) और फायर मॉक ड्रिल आयोजित की जाए।

     विश्वगुरु बनने की कोशिश कर रहे भारत सरकार और जुमलाधारी लोगोंने अपने देश में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए प्रयास करना चाहिए ताकि भारत का भविष्य बर्बाद ना हो सके किंतु हमारे चुने गए लोकप्रतिनिधी धर्म और खोकला विकास के नाम पर वोट लेकर छात्र को चोट देकर ख़ुद झूठा प्रचार कर रहें हैं.हम ५ किलो राशन पर निर्भर ना होकर हमे बेहत्तर शिक्षा, स्वास्थ्य , निवास और रोजगार के साधन मुहैया कराने वाली लोकतांत्रिक सरकार को जवाबदेही के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुवे कुम्भकर्णी नींद से जगाते रहना चाहिये ।