छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज - भारत के पतन के जिम्मेदार
नीतीश और नायडू की सत्ता लोलुपता और युवाओं से विश्वासघात लोकतंत्र में युवा और छात्र देश की रीढ़ होते हैं, लेकिन आज भारत का भविष्य सड़कों पर लहूलुहान है। अपनी नौकरियों, निष्पक्ष प...
संपूर्ण वाचाबहुजन दार्शनिकांच्या विचारांसाठी समर्पित
या श्रेणीतील सर्व बातम्या आणि लेख
नीतीश और नायडू की सत्ता लोलुपता और युवाओं से विश्वासघात लोकतंत्र में युवा और छात्र देश की रीढ़ होते हैं, लेकिन आज भारत का भविष्य सड़कों पर लहूलुहान है। अपनी नौकरियों, निष्पक्ष प...
संपूर्ण वाचा(आलेख : राम पुनियानी, अंग्रेजी से अनुवाद : अमरीश हरदेनिया ) इन दिनों उत्तरप्रदेश के रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना जारी है। समाजवादी पार्टी के सदस्य...
संपूर्ण वाचाआलेख : अर्का राजपंडित - (अंग्रेजी से अनुवाद : संजय पराते) ईस्ट रदरफोर्ड में न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम जगमगा रहा था, जहाँ 2026 विश्व कप फ़ाइनल के लिए अर्जेंटीना और स्पेन का श...
संपूर्ण वाचा(सत्याग्रही विचारधारा, दिवाळी २००२ च्या अंकातून साभार) तब्बल ३१ वर्षांनंतर या लेखाचे प्रयोजन काय, असा प्रश्न कुणाला पडेल. पण धर्माच्या नावाखाली खोटारडेपणा, दांभिकपणा सध्या मोठ्य...
संपूर्ण वाचारिपोर्ट : एन एस साजित, अनुवाद : संजय पराते जब से केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की सरकार बनी है, तब से पटरी-फेरी वालों (स्ट्रीट वेंडर्स --...
संपूर्ण वाचाथैंक यू मोदी जी, सोनम वांगचुक की जान बचाने के लिए। वर्ना कॉकरोचों ने तो बेचारे लद्दाखी की जान ही ले ली थी। एक दिन नहीं, दो दिन नहीं, पूरे बीस दिन बेचारे पहाड़ी को भूखा रखा। वह भी द...
संपूर्ण वाचाराजनैतिक व्यंग्य - समागम भारत में आजकल 'विकास ' बहुत हो रहा है। पिछले शुक्रवार को एक साथ तीन जगहों का 'विकास' स्वयं प्रधानमंत्री ने किया। तीनों जगहों पर उन्होंने अपनी 'गरिमामय उ...
संपूर्ण वाचामूळ ओबीसी समाजावर अन्याय थांबवा; बेकायदेशीर कुणबी दाखल्यांची सखोल चौकशी करून दोषींवर कठोर कारवाईची मागणी कोल्हापूर - राज्यात बोगस कुणबी (ओबीसी) जातीच्या दाखल्यांच्या वाढत्या...
संपूर्ण वाचाविद्यार्थ्यांच्या आंदोलनाला पाठिंबा; राष्ट्रीय ओबीसी महासंघाची तीव्र निदर्शने, निष्पक्ष चौकशीची मागणी दिल्लीतील जंतर-मंतर येथे पेपरफुटी प्रकरणाच्या निषेधार्थ व केंद्रीय शिक...
संपूर्ण वाचाआलेख : राजेंद्र शर्मा सड़कें अगर खामोश हो जाती हैं, तो संसद आवारा हो जाती है ! जनतंत्र के भारतीय अभ्यास से निकली इस जानी-मानी कहावत के हिसाब से संसद के मानसून सत्र के पहले द...
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