अस्पृश्य का विद्रोह, गांधी और उनका अनशन, पूना पैक्ट -  लेखक -  डॉ. भीमराव आम्बेडकर

     जो कुछ मैं कर पाया हूं, वह जीवन-भर मुसीबतें सहन करके विरोधियों से टक्कर लेने के बाद ही कर पाया हूं। जिस कारवां को आप यहां देख रहे हैं, उसे मैं अनेक कठिनाइयों से यहां ले आ पाया हूं। अनेक अवरोध, जो इसके मार्ग में आ सकते हैं, के बावजूद इस कारवां को बढ़ते रहना है। अगर मेरे अनुयायी इसे आगे ले जाने में असमर्थ रहे तो उन्हें इसे यहीं पर छोड़ देना चाहिए, जहां पर यह अब है । पर किन्हीं भी परिस्थितियों में इसे पीछे नहीं हटने देना है। मेरी जनता के लिए मेरा यही संदेश है।

- डॉ. भीमराव अम्बेडकर

Asprishy_ka_vidroh_-_Gandhi_aur_Unka_anshan_-_Poona_pact_-_Written_by_dr_Bhimrao_Ramji_Ambedkar

विषय सूची

भाग - I

सामाजिक

1.  सभ्यता या घोर असभ्यता

2. वह समाज जिसे हिंदुओं ने बनाया

3. हिंदू समाज की आधार शिला

4. स्पृश्य बनाम अस्पृश्य

5. जातिप्रथा का अभिशाप

 

भाग- II

राजनीतिक

6. करोड़ों की आबादी को नकारने का प्रयास

7. अस्पृश्यों का विद्रोह

8. असहाय स्थिति

9. उनकी कामनाएं हमारे लिए कानून हैं।

10. श्री गांधी की छत्रछाया में

11. गांधी और उनका अनशन

12. अस्पृश्यों को चेतावनी


भाग-III

धार्मिक

13. हिंदुओं से अलगाव

14. जातिप्रथा और धर्म-परिवर्तन

15. अस्पृश्यों का ईसाईकरण

16. धर्म-परिवर्तन करने वाले की स्थिति

अनुक्रमणिका