डॉ. महेंद्र धावडे, प्राचीन इतिहास अभ्यासक
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार जोशी (P.K. Joshi) का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव और प्रशासनिक पदों पर बने रहने का सफर हाल के वर्षों में तीखी राजनीतिक और सामाजिक समीक्षा का विषय रहा है। विशेषकर NEET और UGC-NET जैसी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित धांधली के बाद यह मुद्दा देश की संसद से लेकर सड़कों तक चर्चा में है।
जोशी के सफर और वर्तमान विवादों के बीच उनके पद पर बने रहने की विस्तृत समीक्षा दी गई है:-

ABVP से RSS और प्रशासनिक पदों का सफर
प्रदीप कुमार जोशी की पहचान लंबे समय तक एक अकादमिक प्रोफेसर के साथ-साथ संघ परिवार के निष्ठावान सदस्य के रूप में रही है।
डॉ. जोशी जबलपुर में प्रोफेसर रहने के दौरान दक्षिणपंथी छात्र संगठन ABVP के सक्रिय पदाधिकारी रहे।
राइट टू इंफॉर्मेशन (RTI) से मिले दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2006 में उन्हें पहली बार मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) का अध्यक्ष बनाया गया था। आरोप है कि उनकी यह नियुक्ति संघ के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रचारक की सिफारिश पर हुई थी।
उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेताओं (जैसे पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और मुरली मनोहर जोशी) के करीबी वैचारिक हलकों से जुड़ा हुआ माना जाता रहा है।
MPPSC के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष (2020-2021) और अंततः देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी NTA के चेयरमैन का पद संभाला।
'सफर' पर सवाल
विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि डॉ. जोशी का प्रशासनिक करियर लगातार विवादों से घिरा रहा, लेकिन उनके वैचारिक संपर्कों के कारण उनके खिलाफ कभी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
भर्ती विवाद (2009)
उनके MPPSC अध्यक्ष रहते हुए 350 से अधिक प्रोफेसरों की भर्ती में भारी अनियमितताओं और योग्यताओं की अनदेखी के आरोप लगे थे।
NTA और पेपर लीक
अगस्त 2023 में जब उन्हें NTA का चेयरमैन नियुक्त किया गया, उसके बाद से देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं (NEET-UG, UGC-NET) में पेपर लीक और धांधली के गंभीर मामले सामने आए। संसद में भी विपक्ष (जैसे कांग्रेस नेता गौरव गोगोई) द्वारा इस बात पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
पद पर बने रहे
तमाम विवादों और पेपर लीक के मामलों के बावजूद प्रदीप कुमार जोशी का NTA प्रमुख के पद पर बने रहना दो अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जाता है:-
विपक्ष और प्रदर्शनकारी छात्रों का सीधा आरोप है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा एजेंसियों के शीर्ष पदों पर 'आरएसएस पृष्ठभूमि' के लोगों को बैठा रही है (जिसे आलोचक 'RSSification' कहते हैं)। इसी मजबूत वैचारिक ढाल के कारण बड़े से बड़े पेपर लीक होने के बावजूद उनके इस्तीफे या हटाए जाने की नौबत नहीं आती।
आलोचना का एक मुख्य बिंदु यह भी था कि जब NEET परीक्षा में गड़बड़ी की जांच के लिए एक आंतरिक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई, तो उसका नेतृत्व भी खुद जोशी को ही सौंप दिया गया, जिसे हितों के टकराव (Conflict of Interest) के रूप में देखा गया।
निष्कर्ष
पी .के. जोशी का ABVP से शुरू हुआ सफर देश की सबसे बड़ी परीक्षा नियामक संस्थाओं के शीर्ष तक पहुंचा। वर्तमान समीक्षा के अनुसार, जहां एक तरफ उनका लंबा प्रशासनिक अनुभव और वैचारिक निष्ठा उन्हें व्यवस्था के भीतर मजबूत बनाए रखती है, वहीं दूसरी तरफ हालिया पेपर लीक कांडों ने उनकी प्रशासनिक साख और परीक्षा प्रणालियों की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
शिक्षा जगत मे चर्चा का विषय है की केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा देते किंतू NTA प्रमुख बने रहते यह सत्ता का आशीर्वाद माना जाता है. देश की लाखो छात्र की परिक्षा लेने वाला विभाग के प्रमुक जब तक बने रहेंगे तब तक परिक्षा का पेपर लिक होता रहेगा और चाहे कितने भी अतिशीघ्र न्यायालय गठीत क्यो न हो या लाखो का दंड लगा दो स्थिति जैसे थी वैसी ही रहने की संभावना है ऐसी चर्चा देशभर की गलियारो में है.
डॉ. महेंद्र धावडे, प्राचीन इतिहास अभ्यासक