नॉन - बायोलॉजिकल की माफीगिरी: विष्णु नागर

राजनैतिक व्यंग्य-समागम

1. नॉन-बायोलॉजिकल की माफीगिरी: विष्णु नागर

जेन जी, देखी तुमने इस बूढ़े की चालाकी, इसकी शैतानी, इसका खेला ! कितनी चालाकी से वह प्रेम जताते हुए तुम्हें कटघरे में खड़ा कर रहा है।

इसे और इसके गृहमंत्री को जब आगे बढ़कर तुमसे, तुम्हारे माता-पिताओं से, बल्कि जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को इनकी पुलिस और इनकी आर ए एफ ने जो-जो ज़ुल्म ढहाये थे, उनके लिए पूरे देश से माफी मांगना चाहिए था, तब यह तुम्हें माफ करने की इच्छा प्रकट कर रहा है। ध्यान दो, माफ नहीं कर रहा है, केवल इसका इरादा जता रहा है। अपने अपराध  का बोझ तुम्हारी पीठ पर डाल रहा है और खुद फालतू में महान बनने  की कोशिश कर रहा है कि जाओ गुमराह बच्चों, बचपन में सबसे गलतियां हो जाती हैं, मैं तुम्हारे अपराध को इस बार के लिए माफ़ करने की इच्छा रखता हूं। तुम मेरी इच्छा का सम्मान करोगे, तो बेहतर है, वरना तो मेरे पास दूसरे साधन भी हैं। दुशाले में लपेटकर धमकी दी जा रही है। समर्पण करने को कहा जा रहा है।

Non Biological Ki Maafigiri Narendra Modi VS Gen Z

वह कह रहे हैं कि कोई बात नहीं, तुमने मुझे भद्दी-भद्दी गालियां दी हैं, यहां तक कि मेरी स्वर्गीया मां को भी गालियां दी हैं( क्या वाकई?), मैं चाहता तो तुम्हें सज़ा दिलवा सकता था, अदालतों के चक्कर पर चक्कर कटवा सकता था, तुम्हारी जवानी को नरक बना सकता था, तुम्हें बाकायदा अपराधी घोषित करवाकर आगे नौकरी या व्यवसाय करने के लिए तुम्हारा रास्ता बंद करवा सकता था, समाज में तुम्हें बदनाम करवा सकता था, प्रताड़ित करवा सकता था। मैं यह सब कर सकता था, मगर मेरा दिल बड़ा है, इसलिए मैं यह नहीं करना चाहता हूं।

बगैर कहे, यह भी कहा जा रहा है कि जिस शख्स ने शरणागत हुए बगैर अपने किसी विरोधी को आज तक कभी माफ़ नहीं किया, वह जीवन में पहली बार तुम्हें माफ़ कर रहा है, क्योंकि तुम गुमराह बच्चे हो! जिसने बिहार चुनाव के दौरान अपनी मां को कुछ नौजवानों द्वारा गाली दिये जाने पर कांग्रेस के खिलाफ तूफान मचा दिया था, वह तुम्हें माफ़ कर रहा है।जिसके नेतृत्व में गुजरात में 2002 में नरसंहार हुआ था, जिसके लिए उसने कभी माफी नहीं मांगी, जिसने 1100 से अधिक लोगों की हत्या पर कुल‌ इतना कहा था कि कार के नीचे आकर कुत्ता भी मर जाता है, तो दुख होता है, वह तुम्हें माफ़ करना चाहता है। तुम मेरे आगे नाक रगड़ने नहीं आए कि हुजूर हमसे गलती हो गई, उत्तेजना में हम कुछ का कुछ बोल गए, फिर भी मैं तुम्हें माफ़ करना चाहता हूं। चाहो तो मेरी उदारता का, मेरे बड़प्पन का लाभ उठाओ और फिर से जंतर-मंतर मत आओ! मेरे खिलाफ सिर मत उठाओ! उठाया तो माफ़ करने की इच्छा को स्थगित कर सकता हूं।

इसे कहते हैं फ्रेंड्स, साइकोलॉजिकल वारफेयर करना, मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ना। मारने वालों को बचाते हुए, मार खाने वालों को, पिटनेवालों को, जिनकी आंखें पैलेट गन के छर्रे घुसने से बर्बाद हो गई हैं, उनके मन में अपराध भावना भरना, क्योंकि उनका अपराध यह था कि इनमें से कुछ ने प्रधानमंत्री के विरुद्ध कुछ अपशब्द कहे थे! अपना अपराध स्वीकार  करने की बजाय पीड़ितों को अपराधी साबित करके अपने अपराधों पर पर्दा डालना, क्षमा मांगने की बजाय, हमलावर हो जाना। जिनका भविष्य बर्बाद किया, जिनको प्रताड़ित किया, उन पर खोखली दया दिखाना! इसीलिए तुलसीदास कह गए हैं कि खल की प्रीति थिर नहीं होती।

जेन जी ने कभी नहीं कहा कि बाबा, हम लड़के-लड़कियों ने जंतर-मंतर पर तुम्हें खूब गालियां दी हैं, खूब भला-बुरा कहा है, हमसे गलती हो गई है, उत्तेजना में हम कुछ का कुछ बोल गए हैं, हमारे प्यारे-प्यारे बाबा, हमें इसके लिए माफ कर दो। मगर ये जबर्दस्ती माफ करने पर आमादा हो रहे हैं।

सच तो ये है कि इन्हें जेन जी से डर लग रहा है, इनकी रूह अभी भी कांप रही है कि कहीं यह फिर से उठकर खड़ी न हो जाए, हमलावर न हो जाए, मुझ फकीर को कहीं झोला न पकड़ा दे कि बहुत हुआ बाबा, अब जाओ। नहीं पधारोगे, तो हम तुम्हें पठा देंगे। इसलिए ये पिछले नौ दिनों में पांचवीं बार देर रात विडियो चेंप रहे हैं। जेन जी से संवाद करने की कोशिश कर रहे हैं, उसे गले लगाने की बात कह रहे हैं, मगर जेन जी इनका नोटिस तक नहीं ले रही है। इनकी बातों की तरफ़ कान नहीं दे रही है। हेलो तक नहीं कह रही है, जबकि ये हाय कहने के लिए उतावले हुए जा रहे हैं। परेशान हैं बेचारे।कुल तीन ही घंटे तो सोते हैं, बीच-बीच में दिन में झपकी लेते रहते हैं, नींद और झपकी दोनों हवा है। बिस्तर से उठ-उठकर विडियो अपलोड कर रहे हैं।

पहली बार इनसे भूल हो गई थी, कुछ ज्यादा ही घबराए हुए थे, तो बिना मेकअप के जेन जी को खुश करने के लिए विडियो लेकर आ गए थे। उस दिन इनके चेहरे की झुर्रियां इनसे ज्यादा बोल रही थीं। अब दूल्हे की तरह खूब बन-ठन कर आते हैं। गहरा मेकअप करवाते हैं, बुढ़ापे पर जितना पर्दा डलवा सकते हैं, डलवाते हैं। कैमरे का एंगिल ऐसा रखवाते हैं कि इनकी झुर्रियां एक भी नज़र न आएं और चेहरा गुलाबी-गुलाबी नज़र आए। जेन जी यह कलाकारी खूब समझती है। वह बच्ची नहीं है। जेन जी इनकी इन अदाओं का, इनके शब्दों का नोटिस तक नहीं ले रही है।

बूढ़े हैं, तो प्रकट है कि अपने को बहुत चतुर सुजान भी मानते हैं। इन्हें लगता है कि प्यार से जेन जी की पीठ दो- चार बार सहला देंगे, तो इनका उल्लू सध जाएगा, इनकी गद्दी बच जाएगी। बुढ़ऊ समझ गये हैं कि जंतर-मंतर पर आंदोलन खत्म होने से भी खत्म नहीं हुआ है, फिर-फिर भड़क सकता है, वरना ये एक मिनट भी इन पर खर्च करने वाले नहीं थे।

इनकी आत्ममुग्धता गई नहीं है। सब जगह इन्हें मैं ही मैं दिखता है। कोई और होता तो, जेन जी के असली मुद्दों पर बात करता, ये हमेशा की तरह गाली देने पर छाती पीट रहे हैं। इन्हें शायद पता नहीं, जेन जी इस कार्यक्रम से प्रभावित नहीं होती। इंस्टाग्राम पर चेहरा बार-बार दिखाने से किसी बूढ़े को जेन जी नहीं मानती! 

और कल कहीं यह पढ़ा कि अब जेन अल्फा भी सड़क पर उतर आई है। लगता है मोदी जी और शाह साहब के 'अच्छे दिन' आ गए हैं, जिनका बरसों से इंतज़ार था!

(कई पुरस्कारों से सम्मानित विष्णु नागर साहित्यकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं। जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।)

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2. गोली मार दो, पर गाली मत दो! : राजेंद्र शर्मा

जेन ज़ी वालो, अब तो कुछ शर्म करो! मोदी जी ने कितना बड़ा दिल दिखाया है। छाती छप्पन इंच की है, यह तो खैर सब हमेशा से ही जानते थे। जब छाती बड़ी है, तो दिल भी बड़ा होगा ही -- सिंपल लॉजिक की बात है। फिर भी, बारह साल जो बड़ा दिल मोदी जी ने खोलकर, किसी को नहीं दिखाया था, जेन ज़ी को दिखाया है। तुम्हारी सरकशी को माफ कर दिया। अपने भौकाल में तुम्हारे कील चुभोने को पी गए। अपने दरबार के एक प्रमुख रतन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुम्हारे बाल हठ को भी पूरा कर दिया। और अब, चौथी इंस्टाग्राम रील में तो गालियां देने के बाद भी तुम्हें माफ तक कर दिया। 

गालियां भी ऐसी-वैसी नहीं, भद्दी वाली गालियां। और तो और, अपनी स्वर्गवासी मां को गाली देने तक को माफ कर दिया! जिस मां को गाली देने को बिहार के चुनाव में भी माफ नहीं किया था और खूब पानी पी-पीकर कोसा था, उसे भी तुम जेन ज़ी वालों लिए मोदी जी ने माफ कर दिया। 

छियत्तर साल का बुजुर्ग तुम्हें और कितना बड़ा दिल दिखाए, जो तुम अपना स्टूडेंटपना छोड़ोगे और अंधभक्ति की दीक्षा लोगे!

जेन ज़ी वालों की यही प्राब्लम है। उम्र का लिहाज ही नहीं है। और पुराने संस्कार तो बिल्कुल नहीं हैं। मोदी जी बड़ा दिल दिखाकर माफी दे रहे हैं। माफ कर रहे हैं। माफ करने की कोई वजह नहीं थी, कोई मजबूरी नहीं थी, फिर भी माफ कर रहे हैं। गाजियाबाद की पंद्रह साल की स्कूली बच्ची की तरह, गाली देने वालों के एक-एक साथी की पुख्ता पहचान करने, उन पर मुकदमे कराने, उन्हें पुलिस से लेकर गुंडा वाहिनियों तक से डराने-धमकाने, गोदी मीडिया के कैमरों के जरिए उन्हें मुजरिम प्रचारित करने और आखिरकार, कैमरे के सामने गलती मानकर, माफी मांगने के लिए मजबूर करने से, भला उन्हें कौन रोक सकता था? फिर भी मोदी जी माफ कर रहे हैं। और ऐसे-वैसे नहीं, ‘‘अपना’’ कहकर माफ कर रहे हैं। अंधभक्तों से लेकर अपनी पुलिस वगैरह तक से, बच्चा समझकर गले लगाने तक का आह्वान कर रहे हैं।

फिर भी ये जेन ज़ी वाले और उनके हमदर्द क्या कर रहे हैं? न थैंक यू कर रहे हैं, न आभार मानकर सम्मान दे रहे हैं। मोदी जी की दी माफी भी नहीं ले रहे हैं। उल्टे उन्हीं से माफी देने की जगह, माफी मांगने की मांग कर रहे हैं! 

गोदी मीडिया से कुप्रचार कराया -- माफी मांगो। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध लाठियां बरसवायीं -- माफी मांगो। कील-जड़ी लाठियों से बदन बिंधवाया -- माफी मांगो। बिना वर्दीवाले गुंडों से बच्चों को पिटवाया -- माफी मांगो। झटका मारने वाले डंडों से पिटवाया -- माफी मांगो। भीड़ पर आंसू गैस के गोले दगवाए -- माफी मांगो। पैलेट गन से फायरिंग करायी -- माफी मांगो। बाकायदा बंदूक से भी गोली चलवायी -- माफी मांगो। माफी मांगो -- जबकि मोदी जी-शाह जी की पुलिस ने गोली भले चलाई हो, गाली नहीं दी! जेन ज़ी की गालियों से तो उनका गुनाह हल्का ही माना जाएगा! गालियां इक्का-दुक्का सही, चोट गंभीर थी। गुनाह भारी था, फिर भी मोदी जी ने माफ कर दिया और इन्हें मोदी जी की माफी चाहिए, जबकि शाह जी का तो कोई गुनाह सा गुनाह ही नहीं था।

मोदी जी से माफी मंगवाना, हलवा समझ रखा है क्या? जिन मोदी जी ने हजारों मौतों के बावजूद, 2002 के गुजरात तक के लिए माफी नहीं मांगी, 2026 की 20 जुलाई के लिए माफी मांगेंगे, जिसमें घायल भले ही सैकड़ों हुए हों, पर जान एक भी नहीं गयी है! जंतर-मंतर पर दो महीने धूप-बारिश में डटे रह जाएं, तीन हफ्ते से ज्यादा भूखे रह जाएं, जुलूस में लाखों जमा हो जाएं, देश भर में ही नहीं दुनिया भर में लोगों की हमदर्दी पा जाएं, व्यंग्य के तीरों से संघ-भाजपा के आईटी सेल से लेकर, गोदी मीडिया तक मोदी जी के पूरे प्रचारतंत्र को घायल करने में कामयाब हो जाएं, पर रहेंगे ये बच्चे के बच्चे ही। राजनाथ सिंह ने 2015 में जो एलान किया था कि ये एनडीए की सरकार है, यहां इस्तीफे नहीं होते, उसे 11 साल बाद इन जेन ज़ी वालों ने पलटवा क्या दिया और धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा क्या लिखवा लिया, इन्हें क्या लगा -- मोदी जी के माफी कभी नहीं के सिद्धांत को भी पलटवा लेंगे? राहुल गांधी भले ही गलती मानने यानी माफी मांगने को स्टूडेंट होने का लक्षण बताते रहें, मोदी जी उनके झांसे में आकर माफी हर्गिज नहीं मांगेंगे। स्टूडेंट बनने/ कहलाने का लालच उन्हें होता होगा, जो बायोलॉजीकल हों ; भगवान से भी कभी गलती होती है क्या? भगवान भी कभी किसी से माफी मांगता है?

पर भगवान माफी देने में कभी कंजूसी नहीं करता है। उल्टे वह तो माफी देेने में बड़ी उदारता दिखाता है। बस, माफी पाने वाले की भक्ति दिखाई देनी चाहिए। 

रही गलती की बात, तो बायोलॉजिकल इंसान तो होता ही गलतियों का पुतला है। और उस पर बच्चे? वो तो गलतियां करते ही करते हैं। और उनकी गलतियां दुरुस्त करने के अवसर भी मिलते हैं। यही तो बचपन है। बच्चों ने जो कुछ किया, उसे बचपन की गलती मानकर मोदी जी ने माफ कर दिया। 2047 में विकसित राष्ट्र बनने के रास्ते पर देश मोदी जी के नेतृत्व में तेजी से दौड़ रहा था। तभी नीट का पेपर लीक होने का शोर मच गया। शोर मचना जरूरी नहीं था, मगर मच गया। नीट का पेपर लीक पहले भी हुआ था। दूसरे भी पेपर लीक होते ही रहते हैं। विश्व गुरु बनने वाले देशों में, पेपर लीक की छोटी-छोटी घटनाएं होती ही रहती हैं। मगर शोर मच गया, और पेपर दोबारा कराया गया, हालांकि दोबारा पेपर कराना जरूरी नहीं था। परीक्षाओं में धांधली का शोर मच गया, हालांकि जरूरी नहीं था। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा जाने लगा, हालांकि कतई जरूरी नहीं था। फिर भी, बचपना समझकर मोदी जी ने माफ कर दिया।

बस लड़कियां मुंह से गाली निकालें, यह मोदी जी चाहकर भी माफ नहीं कर पा रहे हैं। आखिर, विजातीय प्रभावों से पुरानी संस्कृति की रक्षा करना भी तो जरूरी है। अपने लिए नहीं, अपने भौकाल के लिए भी नहीं, अपनी स्वर्गीया माता जी के लिए भी नहीं, बस प्राचीन संस्कृति की रक्षा के लिए, मोदी जी का तंत्र उनके माफ करने के बाद भी जंतर-मंतर तक पहुंची लड़कियों के पीछे पड़ा रहेगा और उन्हें मनुस्मृति के सबक सिखाता रहेगा। जेन ज़ी हुए तो क्या हुआ, भारतीय लड़कियों को मर्यादा में तो रहना ही चाहिए!

पर मोदी जी इधर जेन ज़ी को बिन मांगे माफी दे रहे थे और उधर जेन अल्फा ने नारे लगाना शुरू कर दिया। अब क्या मोदी जी को माफी देने की एक और रील बनानी पड़ेगी!

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और 'लोकलहर' के संपादक हैं।)