बाजार में आग और जख्मों पर नमक !
( आलेख : संजय पराते ) बाजार में आग लगी हुई है -- महंगाई की आग। एक सप्ताह के अंदर ही प्याज के भाव दुगुने हो गए हैं -- 25 रूपये से 50 रूपये प्रति किलो। एक महीने के अंदर ही शक...
संपूर्ण वाचाबहुजन दार्शनिकांच्या विचारांसाठी समर्पित
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( आलेख : संजय पराते ) बाजार में आग लगी हुई है -- महंगाई की आग। एक सप्ताह के अंदर ही प्याज के भाव दुगुने हो गए हैं -- 25 रूपये से 50 रूपये प्रति किलो। एक महीने के अंदर ही शक...
संपूर्ण वाचाडॉ. महेंद्र धावडे, संस्थापक अध्यक्ष,बळीराजा पार्टी समृद्धी महामार्गावर प्रवाशांना गाठून लुटण्याच्या अनेक घटना समोर आल्या आहेत. यामध्ये प्रामुख्याने रात्रीच्या वेळी वाहने थ...
संपूर्ण वाचा( आलेख : विक्रम सिंह ) यह सुखद है कि हमारे देश में एक बार फिर शिक्षा और रोजगार पर चर्चा हो रही है। न चाहते हुए भी तथाकथित मुख्यधारा की मीडिया को शिक्षा के सवाल पर चर्चा करन...
संपूर्ण वाचा( आलेख : बादल सरोज ) पता नहीं, कुनबे ने मीर तकी मीर साहब को कितना पढ़ा है। पढ़ा होगा तो उनका अशआर “उल्टी हो गई सब तदबीरें, कुछ न दवा ने काम किया” जरूर याद आ रहा होगा। जेन-जी ...
संपूर्ण वाचापुणे महापालिकेच्या मुख्यसभेत गदारोळ, राष्ट्रवादी काँग्रेसच्या आव्हानानंतर सत्ताधाऱ्यांची कोंडी तैलचित्र लावण्याचा ठराव मांडला, पण संस्थापकावर बोलण्यास टाळाटाळ; अमोल बालवडकर यांच...
संपूर्ण वाचाडॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष,बळीराजा पार्टी कुठे नेऊन ठेवला महाराष्ट्र माझा अशी वल्गना करून सत्ता काबीज केल्यावर राज्यातील वाढत्या गुन्हेगारीकडे दुर्लक्ष झालेले आह...
संपूर्ण वाचा( आलेख : संजय पराते ) संघी गिरोह हमेशा ऐसे मुद्दों की तलाश में रहता है, जिससे हमारे देश की आम जनता में एकता की भावना पैदा होने के बजाय सांप्रदायिक फूटपरस्ती की भावना पैदा ह...
संपूर्ण वाचाआलेख : सुभाष गाताडे ( गतांक से आगे, समापन किश्त ) 5. नफ़रत के गुरु ! गोलवलकर के जीवन की दिशा पर एक सरसरी नज़र डालने से यह बात और भी स्पष्ट हो जाती है। याद रखिए...
संपूर्ण वाचाडॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी रामराज्य बनाम बलीराज्य भारत में दो अलग-अलग सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विचारधाराओं की तुलना को दर्शाता है। रामराज...
संपूर्ण वाचा( आलेख : सुभाष गाताडे ) एक बिल्ली आँखें बंद करके दूध पीती है और सोचती है कि दुनिया उसे देख नहीं रही है। — एक संस्कृत सुभाषित एक सदी बीत गयी, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ न...
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