प्रधानमंत्री या लोकसेवक का जनता के प्रति जवाबदेही !
डॉ. महेंद्र धावडे, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी भारतीय कानून और संवैधानिक मर्यादा के अनुसार, प्रधानमंत्री या किसी भी लोक सेवक (Public Servant) को सार्वजनिक रूप से...
संपूर्ण वाचाबहुजन दार्शनिकांच्या विचारांसाठी समर्पित
या श्रेणीतील सर्व बातम्या आणि लेख
डॉ. महेंद्र धावडे, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी भारतीय कानून और संवैधानिक मर्यादा के अनुसार, प्रधानमंत्री या किसी भी लोक सेवक (Public Servant) को सार्वजनिक रूप से...
संपूर्ण वाचा( आलेख : बादल सरोज ) इधर गिनकर बताया जा रहा है कि कुल कांवड़िए चार करोड़ 80 लाख 40 हजार थे, जो पिछले साल से 28 लाख ज्यादा हैं। उधर सोशल मीडिया उनकी हरकतों के आयाम से लिपा-पु...
संपूर्ण वाचा( आलेख : मुरलीधरन, अंग्रेजी से अनुवाद : संजय पराते ) इतिहास में हर दौर में सरकारों ने सज़ा देने और राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए लोगों को अपंग बनाने का तरीका अपनाया है...
संपूर्ण वाचा(आलेख : राजेंद्र शर्मा) हैरानी की बात नहीं है कि संसद के मानसून सत्र का तीसरा और आखिरी सप्ताह भी गतिरोध पर ही खत्म होने की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। गतिरोध की वजह वही है, जो मो...
संपूर्ण वाचाधमतरी। किसानों और मजदूर-कर्मचारी संगठनों के संयुक्त देशव्यापी आह्वान पर आज सैकड़ों मजदूरों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। ये मजदूर आंगनबाड़ी, मध्यान...
संपूर्ण वाचाराजनैतिक व्यंग्य-समागम 1. माफी मांगने का नहीं, मंगवाने का रोग : विष्णु नागर इन्हें तो अपने हर विरोधी से माफी चाहिए, मगर आज बीसवां दिन है, इनसे जंतर-मंतर पर धरने और प्रदर्शन म...
संपूर्ण वाचा( आलेख : बादल सरोज ) हजारों करोड़ रूपये और न जाने कितने करोड़ डॉलर्स खर्च करके कृत्रिम महामानव की छवि गढ़कर जो 56 इंची गुब्बारा फुलाया गया था, उसे महज 5 दिन में युवतर भारत ने जंतर...
संपूर्ण वाचानागरिक परिक्रमा ( संजय पराते की राजनैतिक टिप्पणियां ) जंतर मंतर पर हुए छात्र युवा आंदोलन और इसके देशव्यापी फैलाव के साथ मोदी सरकार ने जिस तरह से निपटने की कोशिश की है, उससे स...
संपूर्ण वाचानागरिक परिक्रमा ( संजय पराते की राजनैतिक टिप्पणियां ) मोदी सरकार ने यह दावा किया था कि शुद्ध पेट्रोल से इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल सस्ता होगा। लेकिन मोदी सरकार का यह दावा भी...
संपूर्ण वाचा( आलेख : बादल सरोज ) इतिहास में ऐसे समय आते हैं, जब देश और जनता को, वर्तमान और भविष्य को बचाने के लिए बोलना जरूरी होता है। भारत के इतिहास में आज का समय ऐसा ही समय है। दिल्ली...
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