देशभक्ति टेस्ट -- वंदे मातरम् ! : राजेंद्र शर्मा
राजनैतिक व्यंग्य - समागम मिल गया, मिल गया, मिल गया। देशभक्ति का टेस्ट मिल गया। टेस्ट भी एकदम आसान और मुफ्त भी। और मधुर। बल्कि संगीतमय। बहुत ही सिंपल टेस्ट है– वंदे मातरम् ग...
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राजनैतिक व्यंग्य - समागम मिल गया, मिल गया, मिल गया। देशभक्ति का टेस्ट मिल गया। टेस्ट भी एकदम आसान और मुफ्त भी। और मधुर। बल्कि संगीतमय। बहुत ही सिंपल टेस्ट है– वंदे मातरम् ग...
संपूर्ण वाचाडॉ. महेंद्र धावडे, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी भारत की राजनीति में भ्रष्टाचार-विरोधी प्रतिबद्धता का एक प्रतीकात्मक नारा बन गया है, जिसे 2014 में नरेंद्र मोदी ने प्रधा...
संपूर्ण वाचा( आलेख : संजय पराते ) संघ-संचालित भाजपा के मोदी राज में भारत सरकार ने आजादी के बाद से अपनाई गई सर्वसम्मत स्वतंत्र विदेश नीति को जिस तरह तिलांजलि दी है, उसके कारण अंतर्राष्ट...
संपूर्ण वाचा( आलेख : एम ए बेबी, अंग्रेजी से अनुवाद : संजय पराते ) 31 मार्च, 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि भारत नक्सलवाद से मुक्त हो गया है। वहीं, 15 अगस्त को लाल ...
संपूर्ण वाचा( आलेख : राजेंद्र शर्मा ) यह संयोग ही नहीं है कि भारत के अपनी स्वतंत्रता के 80वें वर्ष मेें प्रवेश के मौके पर, अपने तेरहवें स्वतंत्रता दिवस संबोधन को प्रधानमंत्री नरेंद्र म...
संपूर्ण वाचाडॉ. महेंद्र धावडे - राजकीय विश्लेषक १४ ऑगस्ट २०२६ ला भारत सरकारने जो राजपत्र जारी केला त्यामध्ये SC,ST सारखा OBC रकाना नसल्याने व फक्त जात असल्याने त्याचा लाभ होणार नाही उ...
संपूर्ण वाचाओबीसी जाति जनगणना पर सरकार का U टर्न और नये दलों का उदय डॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी सरकार और उसके वैचारिक संगठन की नजर में ओबीसी न केवल हिंदू...
संपूर्ण वाचाराजनैतिक व्यंग्य - समागम 2. "तड़ीपार सदन में हाजिर हो!" : संजय पराते इस नई सदी में हमारे देश के प्रजातंत्र में नेताओं और आपराधिक कृत्यों का चोली-दामन का साथ हैं। यदि नह...
संपूर्ण वाचाराजनैतिक व्यंग्य-समागम 1. हाय मोदी तब तुम न हुए : राजेंद्र शर्मा मुहावरा वैसे तो देर आयद, दुरुस्त आयद ही है। पर चूंकि जिक्र योगी जी-मोदी जी का है, क्या ये मुहावरा कुछ छोटा नहीं...
संपूर्ण वाचा( आलेख : बादल सरोज ) जंतर मंतर का झटका सचमुच जोर का लगा है। इतना जोर का कि सपड़ा ही नहीं बंध पा रहा। सूझ ही नहीं रहा कि बताएं तो बताएं क्या, छुपायें तो छुपायें क्या! फिलहाल ...
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